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Sitamarhi Punaura Dham: मां जानकी मंदिर शिलान्यास से पहले नाराज हुए जगद्गुरु रामभद्राचार्य, बीच रास्ते से लौटे

Ramabhadracharya Sitamarhi Punaura Dham: बिहार के सीतामढ़ी में अयोध्या के राम मंदिर की तर्ज पर भव्य सीता मंदिर का निर्माण प्रस्तावित है। 8 अगस्त शुक्रवार को पुनौराधाम में आयोजित भूमि पूजन और शिलान्यास कार्यक्रम को लेकर स्थानीय स्तर पर भारी उत्साह देखने को मिल रहा था। गृह मंत्री अमित शाह और बिहार के सीएम नीतीश कुमार के हाथों भव्य शिलान्यास किया गया। लेकिन कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही इस ऐतिहासिक आयोजन पर विवाद की छाया पड़ गई है।

दरअसल, मंदिर के भूमि पूजन कार्यक्रम में भाग लेने के लिए रवाना हुए जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी श्री रामभद्राचार्य जी महाराज बीच रास्ते से ही लौट गए। अब इसको लेकर विवाद शुरू हो गया है।

Ramabhadracharya Sitamarhi Punaura Dham

इस वजह से वापस लौटे

दरअसल, श्री चित्रकूट तुलसीपीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी श्री रामभद्राचार्य जी महाराज, जो इस कार्यक्रम के प्रमुख संत अतिथि थे, अंततः कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे। वे 7 अगस्त को अपने आश्रम से सीतामढ़ी के लिए निकले थे और वाराणसी तक पहुंच भी गए थे, लेकिन वहां से उन्हें लौटना पड़ा। कार्यक्रम में उनकी अनुपस्थिति को लेकर जब सवाल उठे तो आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि उन्हें पर्यटन विभाग की ओर से यह सूचना दी गई थी कि कार्यक्रम के मंच पर राजनेताओं के लिए आरक्षित स्थान पहले से तय है, जिससे मंच पर उन्हें उचित स्थान नहीं मिल पाएगा।

सूत्रों के अनुसार, जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी को यह सुझाव भी दिया गया कि ऐसी स्थिति में उनकी उपस्थिति मंच पर असहजता पैदा कर सकती है, लिहाजा वे कार्यक्रम में न जाएं। इस असमंजसपूर्ण परिस्थिति को देखते हुए उन्होंने बीच रास्ते से ही सीतामढ़ी की अपनी यात्रा रद्द कर दी और वापस लौट गए।

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श्रद्धालुओं में निराशा का माहौल

firstbihar.com के मुताबिक सीता रसोई के संचालक रामाशंकर शास्त्री और सीता आराधना मंडल के महामंत्री दिनेश चंद्र द्विवेदी ने पुष्टि की कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी कार्यक्रम में आने को लेकर बेहद उत्साहित थे और उन्होंने 2 अगस्त को पत्र के जरिए आमंत्रण स्वीकार भी कर लिया था। अब उनके लौटने की खबर के बाद आयोजकों पर यह सवाल उठने लगे हैं कि आखिर कार्यक्रम में धार्मिक संतों के स्थान को लेकर स्पष्ट व्यवस्था क्यों नहीं की गई थी।

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