किसमें कितना दम? लालू की 'विरासत' सारण से रोहिणी मैदान में, रूडी के लिए आसान नहीं होगी राह
रोहिणी आचार्य को आरजेडी का टिकट मिलने के साथ ही सारण लोकसभा सीट बिहार की हॉट सीट बन गई है। सारण लोकसभा सीट लालू यादव की विरासत वाली सीट मानी जाती है। इस सीट पर खुद लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी और उनके समधी चंद्रिका राय तक चुनाव लड़ चुके हैं।
इस बार लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य को सारण लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ने का अवसर मिला है। वह पहली बार इस सीट से अपनी चुनावी राजनीति की शुरुआत कर रही हैं। इस बार उनका मुकाबला चार बार के सांसद रहे राजीव प्रताप रूडी से हो रहा है। सारण में पांचवें चरण में 20 मई को मतदान होगा। आईये जानते हैं इसबार किस प्रत्याशी का पलड़ा भारी नजर आ रहा है?

सारण लोकसभा सीट पहले छपरा लोकसभा सीट हुआ करती थी। छपरा शहर सारण जिले का मुख्यालय है। राजीव प्रताप रूडी और लालू प्रसाद यादव इस सीट पर सबसे अधिक 4-4 बार सांसद रह चुके हैं। लालू यादव 1977, 1989, 2004 और 2009 में इस सीट से सांसद रहे हैं वहीं, रूडी 1996, 1999, 2014 और 2019 में सांसद रहे हैं।
रोहिणी आचार्य पहली बार इस सीट पर चुनाव लड़ रही हैं तो वहीं रूडी इस बार पांचवी बार यहां से सांसद बनने की कोशिशों में जुटे हैं। राजीव प्रताप रूडी ने राबड़ी देवी और उनके समधी चंद्रिका राय को चुनाव में हराया है। ऐसी में रोहिणी आचार्य की चुनौती न सिर्फ रूडी की हैट्रिक रोकनी है बल्कि अपनी परिवार की खोई हुई विरासत को बचाना भी है।
रोहिणी आचार्य भले ही पहली बार चुनाव लड़ रही हैं मगर वे बिहार की राजनीति में लंबे समय से चर्चा में रही हैं। सोशल मीडिया पर आरजेडी का बचाव करने और विरोधी दलों पर हमला करने में रोहिणी का कोई सानी नहीं है। हालांकि सोशल मीडिया की लड़ाई और चुनावी लड़ाई में काफी अंतर है।
सारण में आरजेडी एक बड़ा समर्पित कोर वोटर है जो लालू परिवार को वोट करता है। रोहिणी आचार्य के पास ये वोट आसानी से शिफ्ट होगा। हालांकि तेज प्रताप की पत्नी एश्वर्या के साथ लालू परिवार का व्यवहार बड़ा मुद्दा बनेगा। पिछले बार लालू ने समधी चंद्रिका राय को टिकट देकर इस विवाद पर पर्दा डालने की कोशिश की थी। हालांकि बाद में चंद्रिका राय ने आरजेडी से रिश्ता तोड़ लिया और जेडीयू में चले गए।
वहीं, राजीव प्रताप रूडी के लिए भी चुनाव इतना आसान नहीं होने जा रहा है। पिछली बार वे मोदी लहर पर आसानी से चुनाव जीत गए थे मगर इस बार उन्हें स्थानीय स्तर पर विरोध का सामना करना पड़ रहा है। कई बार उनके टिकट काटे जाने की भी चर्चा हो रही थी। कोरोना काल में वे एक बड़े विवाद में फंस गए थे। तब उन पर एम्बुलेंस से बालू ढुलाई का आरोप लगा था। इस मामले में उनकी काफी किरकिरी हुई थी।
सारण का समीकरण
सारण सीट पर राजपूत और यादव के बीच सीधे मुकाबला होता है। इस सीट पर यादवों की आबादी 25 फीसदी है जबकि राजपूत 23 फीसदी हैं। रोहिणी यादव हैं और रूडी राजपूत। यानी कि इस बार भी हर बार की तरह दो बड़ी जातियों के बीच टक्कर देखने को मिलेगी।
यादव और राजपूत के अलावा सारण में वैश्य 20 फीसदी, भूमिहार 3 फीसदी, ब्राह्मण 3 फीसदी, और मुसलमान 6 फीसदी हैं। कोयरी, कुर्मी, एससी-एसटी और अन्य जाति 20 फीसदी है। ये 20 फीसदी वोट ही किसी भी प्रत्याशी के लिए निर्णायक साबित होता है।












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