Bihar: सारण ज़िला के DM को इंसान के रूप में फरिश्ता की संज्ञा दे रहे हैं लोग, जानिए क्यों हो रही तारीफ़?
DM Saran: सारण जिला के DM राजेश मीणा अपने काम के अंदाज़ को लेकर सुर्खियों में बने रहते हैं।

Saran DM राजेश मीणा टीबी मुक्त राष्ट्रीय अभियान को कामयाब बनाने के लिए सराहनीय पहल की है। उन्होंने कहा कि लोग भागीदारी कर समाज में जागरुकता फैलाएं। टीबी मुक्त भारत अभियान के मद्देनज़र डीएम राजेश मीणा ने भी सराहनीय क़दम उठाया है। वहीं लोग कह रहे हैं 'इंसान के रूप में फरिश्ता हैं डीएम साहब'
5 टीबी मरीज़ों को गोद लेकर उनकी तीमारदारी कर रहे हैं। डीएम राजेश मीणा ने क़रीब 1 महीने पहले 5 टीबी मरीज़ों को गोद लिया था, कुछ दिन पहले उन्होंने मरीज़ों के बीच पोषण सामग्री बांटी। वह टीबी मरीज़ों का 6 महीने तक इलाज में भी मदद करेंगे। मरीज़ों के खाने पीने से लेकर उनकी दवाई तक का भी ख्याल रखेंगे।आपको बता दें कि दें कि केंद्र सरकार ने टीबी मुक्त भारत अभियान की शुरूआत की है।
इस अभियान को जन आंदोलन बनाने की कोशिश की जा रही है। इसी क्रम में सारण जिलाधिकारी ने निक्षय मित्र योजना के ज़रिए टीबी के खिलाफ एक सार्थक पहल की है। मरीज़ों के दी गई पोषण सामग्री में आटा, दाल, खाद्य तेल, चना, बादाम, अंडा, सोयाबीन वगैरह शामिल किया गया है। 1 हजार रुपये वाले फूड बास्केट अगले 6 महीने तक टीबी मरीज़ों को दिए जाएंगे।
डीएम राजेश मीणा ने छपरा शहर के दहियावां की रहने वाली रजनी कुमारी और अंजु कुमारी, शिव बाजार के रहने वाली कुंती देवी, माला के रहने वाले अवधेश माझी और जान टोला की रहने वाली बिंदु देवी को गोद लिया है। वहीं डीएम राजेश मीणा ने कहा कि टीबी मरीज़ों की मदद के लिए हर कामयाब इंसान निक्षय मित्र बने और इस राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा बनें।
टीबी मुक्त भारत इस अभियान में सरकारी विभाग, जनप्रतिनिधि, गैर सरकारी संगठन और कॉपोर्रेट्स संस्थान से जुड़े लोग मदद के लिए आगे आ सकते हैं। 2025 तक राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत सारण जिले को टीबी मुक्त करने की कोशिश की जा रही है। सरकार और विभाग के लोग अभियान को सफल बनाने में काफी कोशिश कर रहे हैं। लोगों के जागरूक होकर टीबी के खिलाफ जंग जीतने की ज़रूरत है।
आपको बता दें कि सभी जिले के सरकारी अस्पतालों में टीबी इलाज से लेकर जांच तक की मुफ्त व्यवस्था है। इसके कुछ लोग बड़े निजी अस्पताल और बड़े शहरों में जाकर इलाज कराने जा रहे हैं। वहां से मायूस होकर जिले के सरकारी अस्पतालों के चक्कर काटते हुए नज़र आ रहे हैं। ग़ौरतलब है कि टीबी के लक्षण दिखने के पर सबसे पहले नजदीकी सरकारी अस्पताल जाएं। सरकारी अस्पतालों में टीबी का इलाज सही तरीक़े से किया जा रहा है, अनुश्रवण की व्यवस्था की जाती है।
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