Sand Artist Nalanda: पावापुरी महोत्सव में मशहूर सैंड आर्टिस्ट ने बिखेरा जलवा, सेल्फी लेते नहीं थक रहे लोग
Sand Artist Nalanda: पंडाल में बने मुख्य सांस्कृतिक मंच के सामने उन्होंने बालू पर भगवान महावीर का विशाल आकृति बनाई। इसके साथ ही अहिंसा परमो धर्म का संदेश भी लोगों को दिया। सैंड आर्टिस्ट मधुरेन्द्र की अद्भुत कलाकारी...
Sand Artist : बिहार के एतिहासिक धरोहरों में नांदा के पावापुरी स्थित जल मंदिर भी शुमार किया जाता है। दिवाली के दिन इस मंदिर की अहमियत और ज़्यादा बढ़ जाती है। हर साल भगवान महावीर के निर्वाण पर पावापुरी में विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। इस बार 2548वे निर्वाण दिवस पर भी दो दिवसीय पावापुरी महोत्सव का आयोजन किया गया। रविवार से शुरू हुए पावापुरी महोत्सव का नज़ारा देखने दूर से दूर लोग पहुंच रहे हैं।
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मशहूर सैंड आर्टिस्ट ने बिखेरा जलवा
पावापुरी महोत्सव में मशहूर सैंड आर्टिस्ट मधुरेन्द्र ने अपनी कला का शानदार नज़ारा पेश किया। पंडाल में बने मुख्य सांस्कृतिक मंच के सामने उन्होंने बालू पर भगवान महावीर का विशाल आकृति बनाई। इसके साथ ही अहिंसा परमो धर्म का संदेश भी लोगों को दिया। सैंड आर्टिस्ट मधुरेन्द्र की अद्भुत कलाकारी महोत्सव में आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। आपको बता दें कि बालू पर बनाई गई कलाकृति भगवान महावीर की है। महोत्सव में आए हुए जैन श्रद्धालु और आम नागरिक सैंड आर्टिस्ट की काफी तारीफ कर रहे हैं। गौरतलब है कि सैंड आर्टिस्ट मधुरेन्द्र विभिन्न अन्तर्राष्ट्रीय महोत्सवों में बिहार का इंटरनेशनल लेवल पर परचम लहरा चुके हैं, उन्हे कई अवार्ड्स से सम्मानित भी किया जा चुका है।

जैन के पवित्र जल मंदिर की अहमियत
नालंदा जिला मुख्यालय से क़रीब 11 किलोमीटर दूर जैन धर्मावलंबियों के आस्था का केंद्र पावापुरी में पवित्र जल मंदिर स्थित है। हर साल दिवाली पर जल मंदिर की अहमियत और ज्यादा बढ़ जाती है। ग़ौरतलब है कि इस साल दिवाली के मौके पर भगवान महावीर का 2548वां निर्वाण दिवस है। इस खास मौके पर बेहतरीन आयोजन कर मंदिर खास पूजा-अर्चना की जा रही है। आपको बता दें कि इस मौके पर देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से भी श्वेतांबर और दिगंबर जैन अनुयायी आयोजन में शिरकत करते हैं।

निर्वाण दिवस के मौके पर विशाल मेले का आयोजन
निर्वाण दिवस के मौके पर पावापुरी में विशाल मेले का भी आयोजन किया जाता है। स्थानीय बुज़ुर्गों की मानें तो भगवान महावीर का दिवाली (कार्तिक मास की अमावस्या) की आधी रात में परिनिर्वाण हुआ था। इसलिए जल मंदिर में हर साल दीप उत्सव मनाया जाता है। दीपोत्सव देखने के लिए बड़ी तादाद में जैन धर्मावलंबी पहुंचते हैं। जल मंदिर में बोली लगाकर लड्डू (लाडो) चढ़ाने की अनोखी परंपरा भी है। श्वेतांबर और दिगंबर श्रद्धालुओं के बीच मंदिर में लड्डू चढ़ाने के लिए बोली लगाई जाती है। ज्यादा बोली लगाने वाले श्रद्धालु मंदिर में लड्डू चढ़ाने का अवसर मिलता है।

लड्डू चढ़ाने की अनोखी परंपरा
जल मंदिर के पुजारी की मानें तो भगवान महावीर के निर्वाण दिवस के दिन 1 किलो वजन से लेकर 51 किलो वजन तक का लाडू चढ़ाया जाता है। लड्डू बनाने के लिए विशेष रूप से दूसरे प्रेदशों से कारीगर बुलाये जाते हैं। इस बार लड्डू बनाने के लिए राजस्थान और महाराष्ट्र से कारीगर बुलाए गए हैं। जैन श्वेताम्बर और दिगंबर प्रबंधन अपनी निगरानी में शुद्ध देसी घी के लड्डू बनवाते हैं। इसके बाद जैन श्रद्धालु अपने माथे पर लड्डू लेकर निर्वाण स्थल के आखिर छोर तक जाते हैं। फिर वहां जल मंदिर में लड्डू अर्पित किया जाता है।

पावापुरी में दिवाली मेले का भी आयोजन
निर्वाण महोत्सव के मद्देनज़र पावापुरी में दिवाली मेले का भी आयोजन होता है। इस दौरान काफी तादाद में जैन श्रद्धालु रथ यात्रा में शिरकत करते हैं। इस दौरान पावापुरी के विभिन्न जैन मंदिरों में चांदी के रथ पर भगवान महावीर को भ्रमण कराया जाता है। रथ यात्रा खत्म होने के बाद जल मंदिर (पावापुरी निर्वाण स्थान) में पूजा-अर्चना की जाती है। चारों तरफ जल और बीच में पावापुरी मंदिर की भव्यता देखने काफी दूर-दूर से लोग पहुंते हैं।
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