सम्राट चौधरी को देखते ही इंप्रेस हो गए थे लालू यादव, तुरंत बना डाला मंत्री, BJP ने क्यों मचाया हंगामा?
samrat chaudhary bjp president: सम्राट चौधरी उस समय विवादों में आए थे, जब लालू यादव की कैबिनेट में सबसे कम उम्र के मंत्री बन गए थे। फिर लंबे बवाल के बाद उन्हें मंत्री पद से हटना पड़ा था।

Image: Oneindia
बिहार में बीजेपी ने नए प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सम्राट चौधरी को सौंप दी है। इसके पहले संजय जायसवाल बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष थे। दिलचस्प बात ये है कि संजय जायसवाल की तरह सम्राट चौधरी भी कभी लालू यादव के आरजेडी का हिस्सा रहे हैं। सम्राट चौधरी ही नहीं उनके माता-पिता दोनों ही आरजेडी में रह चुके हैं। पिता शकुनी चौधरी की तरह सम्राट चौधरी भी लालू यादव के खासमखास रह चुके हैं। सम्राट चौधरी और इनके पिता पूर्व मंत्री शकुनी चौधरी की पूर्वी बिहार में काफी राजनीतिक पैठ मानी जाती है।
3 बार मंत्री रहे हैं सम्राट चौधरी
सम्राट चौधरी कुशवाहा समाज से आते हैं। बिहार सरकार में तीन बार मंत्री रह चुके हैं। सम्राट चौधरी राबड़ी देवी और जीतनराम मांझी के कैबिनेट में भी मंत्री रह चुके हैं। इससे पहले एनडीए सरकार में भी वे मंत्री थे। सम्राट चौधरी के पिता और पूर्व मंत्री शकुनी चौधरी किसी जमाने में आरजेडी प्रमुख लालू यादव के खासमखास माने जाते थे। इसी वजह से शकुनी के बेटे सम्राट चौधरी का भी लालू निवास पर आना-जाना लगा रहता था। कहा जाता है कि सम्राट चौधरी जब हायर एजुकेशन की ही पढ़ाई कर रहे थे, तभी लालू आवास के कारण उनके मन में मंत्री बनने की इच्छा जग गयी थी।
सम्राट से मिलकर खूब इंप्रेस हुए लालू यादव
बेटे की महत्वाकांक्षा से शकुनी चौधरी ने लालू यादव को अवगत कराया। इसके बाद लालू ने सम्राट चौधरी से मिलना चाहा। कहा जाता है कि पहली ही मुलाकात में सम्राट चौधरी ने लालू को प्रभावित कर लिया था। ये वो दौर था जब बिहार में नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू से आरजेडी को काफी टक्कर मिल रही थी। सम्राट चौधरी के कुशल राजनीतिक ज्ञान और कुशवाहा जाति से आने की वजह से लालू ने फौरन कैबिनेट में शामिल करने की स्वीकृति दे दी। इस तरह सम्राट चौधरी बिहार के सबसे कम उम्र के मंत्री बन गए।
राबड़ी सरकार में बने माप-तौल मंत्री
1999 में सम्राट चौधरी को राबड़ी सरकार में माप-तौल व बागवानी मंत्री बनाया गया। लेकिन विपक्ष ने उनकी उम्र को लेकर नया बखेड़ा शुरू कर दिया। उनकी उम्र 25 वर्ष से भी कम थी। विवाद गहराने पर राज्यपाल ने सम्राट से उम्र प्रमाण पत्र की मांग कर दी। ऐसे में उन्हें मंत्री पद से हटना पड़ा। पूर्वोत्तर बिहार में कुशवाहा समाज पर जबर्दस्त पकड़ रहने के कारण सम्राट चौधरी का कद हमेशा बढ़ा रहा। चौधरी उस समय भी सक्रिय भूमिका में थे, जब राजद को जदयू तोड़ रही थी। कुछ विधायक और एमएलसी लेकर सम्राट चौधरी जदयू में शामिल हो गए थे। इसके बाद वे नीतीश के इतने खास हो गए कि पार्टी में शामिल होते ही उन्हें पहले MLC बनाया गया और फिर मंत्री बना दिया गया।
नीतीश कुमार को हटाने की खाई कसम
इसके बाद सम्राट चौधरी और नीतीश की जम नहीं पाई और वे जदयू को अलविदा कहकर भाजपा के साथ हो लिए। भाजपा ने भी उन्हें इनाम देते हुए राज्यपाल कोटे से एमएलसी बनाया। पंचायती राज मंत्री बनाया। जब भाजपा सरकार से हटी तो उन्हें विधान परिषद में प्रतिपक्ष का नेता बनाया गया। आज सम्राट चौधरी बिहार बीजेपी के सबसे पॉपुलर नेता माने जाते हैं। वे नई सरकार के कठन के बाद से ही सीधे नीतीश कुमार पर हमलावर हैं। उन्होंने शपथ ली है कि जब तक वो नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री की कुर्सी से बेदखल नहीं कर देंगे। तब तक वो पगड़ी बांधे रखेंगे।












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