Bihar Floor Test: बहुमत की कसौटी पर खरी बिहार की नई सरकार, CM सम्राट चौधरी ने पास किया फ्लोर टेस्ट

Bihar Floor Test 2026: बिहार की राजनीति के लिए आज यानी 24 अप्रैल, 2026 का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज होने जा गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (CM Samrat Choudhary) के नेतृत्व वाली नवनियुक्त NDA सरकार आज विधानसभा में अपना बहुमत साबित कर दिया है। इस विशेष सत्र पर न केवल बिहार बल्कि पूरे देश की निगाहें टिकी हुई थी। बिहार विधानसभा में सम्राट सरकार ने ध्वनिमत से फ्लोर टेस्ट पास कर लिया है।

15 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद सम्राट चौधरी के लिए यह पहली और सबसे बड़ी विधायी परीक्षा थी। बिहार के संसदीय इतिहास में यह पहला अवसर है जब भारतीय जनता पार्टी का कोई नेता मुख्यमंत्री के तौर पर सदन में विश्वास मत (Trust Vote) पेश कर रहा है। राजनीतिक गलियारों में इसे 'शक्ति प्रदर्शन' के रूप में देखा जा रहा है, जहां NDA अपनी एकजुटता और विपक्ष अपनी प्रासंगिकता साबित करने की कोशिश करेगा।

Bihar Floor Test 2026

NDA का पलड़ा भारी, आंकड़ों का गणित

243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में वर्तमान में एक सीट खाली होने के कारण प्रभावी संख्या 242 है। इस जादुई आंकड़े को छूने के लिए किसी भी सरकार को 122 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है। आंकड़ों के लिहाज से सम्राट चौधरी की सरकार बेहद सुरक्षित और मजबूत स्थिति में नजर आ रही है।

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NDA खेमे के पास कुल 201 से 202 विधायकों का विशाल समर्थन होने का दावा किया जा रहा है, जो बहुमत के आंकड़े से काफी अधिक है। पार्टीवार स्थिति इस प्रकार है:

  • भाजपा: 88 विधायक
  • जदयू (JDU): 85 विधायक
  • लोजपा (रामविलास): 19 विधायक
  • हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM): 5 विधायक
  • राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM): 4 विधायक

सरकार ने किसी भी तरह की 'क्रॉस वोटिंग' या अप्रत्याशित स्थिति से बचने के लिए अपने सभी विधायकों को पटना में ही मौजूद रहने और सदन में अनिवार्य रूप से उपस्थित होने के निर्देश जारी किए हैं।

विपक्ष और तेजस्वी यादव के लिए अग्निपरीक्षा

यह फ्लोर टेस्ट विपक्षी गठबंधन 'महागठबंधन' और विशेषकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के लिए एक बड़ी चुनौती है। पिछले कुछ राजनीतिक घटनाक्रमों में तेजस्वी यादव ने "बड़ा खेल" होने के दावे किए थे, लेकिन राज्यसभा चुनाव और हालिया दलबदल ने विपक्ष की स्थिति को कमजोर किया है।

वर्तमान में विपक्ष के पास केवल 35 से 41 विधायकों का समर्थन बचा है। इनमें आरजेडी (25), कांग्रेस (6), और वामपंथी दलों (सीपीआई-एमएल, सीपीआई-एम) के विधायक शामिल हैं। तेजस्वी यादव के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने बचे हुए कुनबे को एकजुट रखने की है, क्योंकि एनडीए की ओर से सेंधमारी का डर लगातार बना हुआ है।

'सम्राट जब CM हैं तो उन्हें किस बात की परेशानी'

बिहार विधानसभा में फ्लोर टेस्ट को लेकर AIMIM बिहार अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने कहा कि जब वह (सम्राट चौधरी) NDA के मुख्यमंत्री हैं, तो उन्हें आखिर किस बात की परेशानी है। उन्होंने कहा कि बहुमत साबित करने की जिम्मेदारी उनकी है और सदन में सब कुछ साफ हो जाएगा। वहीं पश्चिम बंगाल चुनाव में मतदान को लेकर उन्होंने कहा कि लोगों ने अच्छी संख्या में वोट डाले हैं, जो लोकतंत्र के लिए एक अच्छा संकेत है।

नीतीश कुमार के बिना एक नए युग की शुरुआत

इस सत्र की सबसे खास बात यह है कि लगभग दो दशकों तक बिहार की सत्ता के केंद्र रहे नीतीश कुमार इस बार सदन में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नजर नहीं आएंगे। मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने और राज्यसभा सदस्य बनने के बाद उन्होंने सत्ता की कमान सम्राट चौधरी को सौंप दी है। हालांकि, नीतीश कुमार ने भरोसा दिलाया है कि वह मार्गदर्शक के रूप में NDA सरकार के साथ बने रहेंगे।

सम्राट चौधरी ने बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला है। सदन में उनका आज का संबोधन न केवल सरकार की नीतियों को स्पष्ट करेगा, बल्कि यह भी संकेत देगा कि नीतीश युग के बाद बिहार की राजनीति किस दिशा में मुड़ने वाली है।

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