बिहार :12 साल पुराने मामले में मिली ऐसी सज़ा, बर्बाद हो गई रिटायर्ड अधिकारी की जमा पूंजी
बिहार प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी का अजय कुमार ठाकुर को ये सज़ा दी गई हैं। वहीं अजय ठाकुर का कहना है कि उनकी कार्य अवधि के दैरान उन पर घोटाले का किसी भी प्रकार का आरोप नहीं लगा है।
पटना, 23 जुलाई 2022। बिहार में भ्रष्टाचार के अनगिनत मामले उजागर होते रहते हैं, कई मामले में दोषियों को सज़ा भी मिलती है। कई मामले में आरोप बेबुनियाद भी पाए जाते हैं। वहीं अब राज्य सरकार ने एक रिटायर्ड कर्मी को ऐसी सज़ा सुनाई गई कि उसकी ज़िंदगी की पूंजी ही बर्बाद हो गई। राज्य सरकार ने करीब 12 साल पुराने मामले में अवकाश प्राप्त अधिकारी को सज़ा सुनाई है। सज़ा भी इतनी ज्यादा कठोर है कि उसकी सौ फिसद पेंशन ही काट लिया जाएगा।

पूर्व अधिकारी अजय कुमार ठाकुर को सुनाई गई सज़ा
बिहार प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी का अजय कुमार ठाकुर को ये सज़ा दी गई हैं। वहीं अजय ठाकुर का कहना है कि उनकी कार्य अवधि के दैरान उन पर घोटाले का किसी भी प्रकार का आरोप नहीं लगा है। आरोप नहीं लगने के बावजूद सभी आरोपों का खंडन क्या। लेकिन असके बावजूद उनके जवाब से अधिकारी संतुष्ट नहीं हुए और जांच के दौरान जवाब को नहीं माना गया। ग़ौरतलब है कि बहुत कम मामले में शत प्रतिशत पेंशन कटौती की सज़ा सुनाई जाती है।

गलत तरीके से किया था चावल मिल मालिकों के साथ करार
सामान्य प्रशासन विभाग की जांच रिपोर्ट के मुताबिक 2012-13 में अजय कुमार ठाकुर पूर्णिया में जिला प्रबंधक, राज्य खाद्य निगम के पद पर काम कर रहे थे। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने ग़लत तरीक़े से चावल मिलों के साथ करार किया था। करार की ज़्यादातर शर्तों को उन्होंने दरकिनार कर दिया था। इसके अलावा मिल मालिकों को बैंक गारंटी की न्यूनतम राशि में भी को छूट दे दी थी। धान कुटाई के लिए सभी करार किए गए थे। जांच रिपोर्ट के मुताबिक 22 चावल मिलों के साथ गलत तरीके से करार किया गया था। जिसकी वजह से राज्य सरकार को बहुत ज्यादा आर्थिक नुकसान भी हुआ था।

संतोषजनक नहीं रहा अजय ठाकुर कार्यकाल
विभाग के जांच रिपोर्ट के मुताबिक आरोपों का जवाब देने में भी अजय ठाकुर ने बिना किसी ठोस वजह के देरी की। जबकि समय पर उन्हें आरोप पत्र दे दिया गया था। आपको बता दें कि जांच रिपोर्ट में साफ तौर पर यह लिखा गया है कि अजय ठाकुर के सेवाकाल में आपराधिक मामले को देखते हुए मालूम होता है उनका कार्यकाल पूरी तरह संतोषजनक नहीं रहा है।

कार्यकाल के दौरान दर्ज हुई कई आपराधिक मामले
ग़ौरतलब है कि अजय ठाकुर ने कहा कि उनके कार्यअवधि के दौरान कोई केस नहीं था। जबकि सामान्य प्रशासन विभाग को जांच के दौरान यह बात सामने आई कि अजय ठाकुर के कार्यकाल में उनपर कई आपराधिक मामले भी दर्ज हुए थे। सरकार ने चार मामलों में उनके खिलाफ अभियोजन को मंज़ूर किया था। वहीं आपराधिक मामलों में विभाग की तरफ़ से कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
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