Republic Day Bihar Tableau: कर्तव्य पथ पर लंबे समय बाद दिखी बिहार की झांकी, मोह लिया दर्शकों का मन

Republic Day Parade: आठ साल के लंबे इंतजार के बाद, गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ पर बिहार की झांकी ने फिर से अपनी धाक जमाई। विजय चौक से जैसे ही बिहार की झांकी कर्तव्यपथ पर आगे बढ़ी, दर्शकों ने उसे उत्साह और सम्मान के साथ तालियों की गड़गड़ाहट से जोरदार स्वागत किया।

झांकी ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा, और यह आयोजन न केवल बिहार बल्कि पूरे देश के लिए एक ऐतिहासिक पल बन गया। जब झांकी मुख्य मंच के पास पहुंची, तो मंच से उद्घोषणा की गई, "यह है बिहार की झांकी, जो राज्य की ज्ञान और शांति की समृद्ध परंपरा का उत्सव मना रही है।"

Republic Day Bihar Tableau

यह उद्घोषणा राज्य की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर का गर्वपूर्ण प्रतीक थी। झांकी में दिखाए गए दृश्य बिहार की प्राचीन ज्ञान भूमि और शांति की परंपरा को जीवित करते हुए, दर्शकों को एक अद्वितीय सांस्कृतिक अनुभव प्रदान कर रहे थे। राज्य की समृद्धि और गौरव को प्रदर्शित करने वाली यह झांकी, बिहार के गौरवमयी अतीत और वर्तमान की सशक्त तस्वीर पेश कर रही थी।
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ज्ञान और शांति की प्रतीक झांकी

झांकी में बिहार की प्राचीन ज्ञान भूमि की झलक दिखाई गई, जिसमें भगवान बुद्ध को ध्यानमग्न धर्म चक्र मुद्रा में और पवित्र बोधि वृक्ष के साथ दिखाया गया। साथ ही नालंदा विश्वविद्यालय के खंडहर भी प्रदर्शित किए गए। प्रधानमंत्री द्वारा नए अंतरराष्ट्रीय नालंदा विश्वविद्यालय का उद्घाटन किए जाने के साथ, बिहार ने खुद को वैश्विक ज्ञान केंद्र के रूप में पुनः स्थापित किया है।

दर्शकों में दिखा गजब का उत्साह

मुख्य मंच से इस उद्घोषणा के बाद कर्तव्यपथ पर स्थित दर्शक दीर्घाओं में सभी दर्शक खड़े होकर बिहार की समृद्ध परंपरा को दर्शाती इस झांकी का अभिनंदन कर रहे थे। दर्शक इसे अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर रहे थे, और कार्यक्रम में उपस्थित विदेशी अतिथियों ने भी झांकी को अपने कैमरे में संग्रहित किया।

बोधिवृक्ष के जरिए ज्ञान का संदेश

झांकी में प्रदर्शित बोधिवृक्ष इस बात का संदेश दे रहा था कि इसी भूमि से ज्ञान का प्रकाश पूरे विश्व में फैला है। बिहार राज्य की इस झांकी में शांति का संदेश देने वाले भगवान बुद्ध को भी दिखाया गया था। भगवान बुद्ध की यह अलौकिक मूर्ति राजगीर स्थित घोड़ा कटोरा जलाशय में स्थापित है, जहां प्रतिवर्ष लाखों पर्यटक आते हैं। 2018 में स्थापित 70 फीट ऊंची इस मूर्ति के साथ घोड़ा कटोरा झील का विकास बिहार सरकार का इको टूरिज्म के क्षेत्र में अनूठा प्रयास है।

नालंदा महाविहार के भग्नावशेष

झांकी में प्राचीन नालंदा महाविहार (विश्वविद्यालय) के भग्नावशेष भी दर्शाए गए, जो यह प्रमाणित करते हैं कि चीन, जापान और मध्य एशिया के देशों से छात्र ज्ञान प्राप्ति के लिए यहां आते थे। नालंदा विश्वविद्यालय के भग्नावशेष भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रतीक हैं। इन भग्नावशेषों का संरक्षण और संवर्धन भारतीय सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। बिहार सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों से नालंदा के प्राचीन गौरव को पुनः स्थापित किया जा रहा है।

नालंदा विश्वविद्यालय और भविष्य की दिशा

झांकी में बिहार की प्राचीन और समृद्ध विरासत को भित्तिचित्रों के माध्यम से भी उकेरा गया है। नालंदा को एक वैश्विक ज्ञान केंद्र के रूप में पुनः स्थापित करने के उद्देश्य से राजगीर में अंतर्राष्ट्रीय नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है। इस विश्वविद्यालय का उद्घाटन बिहार के माननीय मुख्यमंत्री की उपस्थिति में भारत के माननीय प्रधानमंत्री द्वारा 19 जून 2024 को किया गया।
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