बिहार में रामायण सर्किट का कायाकल्प: अयोध्या की तर्ज पर संवर रहा पुनौराधाम, अहिल्या तक होगा वैश्विक विकास
Ramayan Circuit Bihar Development: बिहार अब सिर्फ इतिहास और संस्कृति की धरती नहीं, बल्कि एक नया धार्मिक पर्यटन हब बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। खासकर रामायण से जुड़े स्थलों को जोड़कर "रामायण सर्किट" को विश्वस्तर पर पहचान दिलाने की कवायद तेज हो चुकी है।
अब सीतामढ़ी का पुनौराधाम भी अयोध्या की तर्ज पर विकसित होने जा रहा है, जो भगवान राम और माता सीता की कथा से जुड़े भक्तों के लिए बेहद खास खबर है।

अयोध्या की तर्ज पर संवर रहा है पुनौराधाम
सीतामढ़ी जिले में स्थित पुनौराधाम को माता जानकी की जन्मस्थली माना जाता है। अब इस जगह को भव्य धार्मिक केंद्र में बदलने के लिए 120 करोड़ से ज्यादा की योजना बनाई गई है। यहां 17 एकड़ भूमि पहले से है और 50 एकड़ जमीन और अधिग्रहित की जा रही है। इस प्रोजेक्ट की कमान एक अनुभवी डिज़ाइन कंसल्टेंसी को दी गई है जो इसे अयोध्या जैसा बनाएगी।
रामायण सर्किट के अन्य प्रमुख स्थल भी होंगे विकसित
पुनौराधाम के साथ-साथ बिहार के अन्य धार्मिक स्थलों को भी नया रूप दिया जा रहा है। पूर्वी चंपारण का सीताकुंड अब एक आधुनिक और धार्मिक पर्यटन स्थल बनने जा रहा है। यहां घाट, प्रवेश द्वार, कैफेटेरिया जैसी तमाम सुविधाएं अगले 18 महीनों में तैयार होंगी।
सीतामढ़ी के पंथपाकर की भी धार्मिक मान्यता है। कहा जाता है कि यहीं माता सीता की डोली रुकी थी। इस स्थान पर भी मंदिर परिसर का विस्तार, तालाब का जीर्णोद्धार और पर्यटक सुविधाओं का विकास अगले 24 महीनों में पूरा किया जाएगा।
मधुबनी का फूलहर स्थान भी राम-सीता के प्रथम मिलन का गवाह है। यहां पर लेजर शो, घाट, पार्किंग और कैफेटेरिया जैसी सुविधाएं बनाकर इसे एक इंटरैक्टिव टूरिस्ट डेस्टिनेशन में बदला जा रहा है।
दरभंगा का अहिल्या स्थान भी संवर रहा है
अहिल्या स्थान, जहां भगवान राम ने अहिल्या का उद्धार किया था, अब आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। यहां गेस्ट हाउस, मेडिटेशन पौंड, फाउंटेन और प्रवेश द्वार जैसी सुविधाएं बनेंगी। इसके लिए 3.74 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत हो चुकी है और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भी शुरू है।
क्या है सरकार का मकसद?
राज्य सरकार इस पूरे रामायण सर्किट को न सिर्फ धार्मिक भावनाओं से जोड़ रही है, बल्कि इसे आर्थिक और सामाजिक दृष्टिकोण से भी एक बड़ा अवसर मान रही है। पर्यटकों के आने से स्थानीय रोजगार बढ़ेगा, होटल व ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री को मजबूती मिलेगी और बिहार की सांस्कृतिक विरासत को नया जीवन मिलेगा।
बिहार का यह कदम न सिर्फ रामायण से जुड़े स्थलों को जीवंत करेगा, बल्कि पूरे राज्य को एक नई पहचान भी देगा। जो लोग अब तक अयोध्या या चित्रकूट तक सीमित थे, वे अब सीतामढ़ी, मधुबनी, दरभंगा और चंपारण जैसे ऐतिहासिक-धार्मिक स्थलों की ओर भी रुख करेंगे। यह बिहार के लिए एक सांस्कृतिक पुनर्जागरण का संकेत है।












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