Prashant Kishor: जेल जाकर तो खेल गए प्रशांत किशोर! क्या नीतीश के लिए बन रहे चुनौती?
Prashant Kishor News: जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बिहार की राजनीति में नया दांव चल दिया है। उन्होंने शर्तों पर जमानत लेने की जगह न्यायिक हिरासत में जेल में ही रहना पसंद किया। और उनकी यह रणनीति पहली ही कोशिश में सफल साबित हुई और वह बिना शर्त रिहा कर दिए गए। वह बीपीएससी (BPSC) की प्रारंभिक परीक्षा रद्द करने की मांग को लेकर छात्रों के समर्थन में भूख हड़ताल कर रहे हैं।
इससे पहले पटना पुलिस ने उन्हें ऐतिहासिक गांधी मैदान से सोमवार तड़के जबरन उठा लिया था। जिला प्रशासन का दावा है कि गांधी मैदान में प्रदर्शन करना'गैरकानूनी है।' गांधी मूर्ति के पास से उनकी गिरफ्तारी के वक्त का जो वीडियो वायरल है,उसमें वहां लोग 'वंदे मातरम' के नारे लगा रहे हैं।

Prashant Kishor: जमानत की जगह जेल को चुनकर प्रशांत किशोर ने खेला बड़ा राजनीतिक दांव!
दरअसल, अदालत ने इस शर्त पर उनकी जमानत मंजूर की थी कि वह आगे ऐसे प्रदर्शनों में हिस्सा नहीं लेंगे, जिससे कि प्रशासन को व्यवस्था बनाए रखने में किसी तरह की दिक्कत हो। लेकिन, पीके ने इन शर्तों को मानने के बजाए, न्यायिक हिरासत में जेल जाना पसंद किया। बिहार की राजनीति के जानकार इसे बहुत ही दमदार सियासी फैसला मान रहे हैं।
Prashant Kishor: प्रशासन ने पीके के खिलाफ किया हाई कोर्ट के आदेश के उल्लंधन का दावा
इससे पहले पटना के जिलाधिकारी चंद्रशेखर सिंह ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया कि पटना हाई कोर्ट के आदेशानुसार, 'गर्दनीबाग में निर्धारित स्थान के अलावा किसी भी जगह पर कोई धरने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।' सत्ताधारी जदयू के प्रवक्ता नीरज कुमार का आरोप है कि जन सुराज पार्टी के संयोजक ने गांधी मैदान में धरना देकर हाई कोर्ट के आदेश का उल्लंघन किया है।
उन्होंने कहा, 'छात्र प्रशांत किशोर को समझते हैं, जो कंबल लेकर आए थे और उनके पास वैनिटी वैन भी थी। प्रशासन ने नियमानुसार उनके खिलाफ कार्रवाई की है।'
Prashant Kishor: आंदोलनकारी छात्रों का समर्थन करके आंदोलन का क्रेडिट लेना चाह रहे नेता
बीपीएससी 70वीं की प्रारंभिक परीक्षा रद्द करने की मांग के पीछे हजारों छात्र हैं, जिनके साथ युवाओं की एक बड़ी शक्ति की सहानुभूति भी जुड़ी हुई है। यही वजह है कि विपक्षी दलों से लेकर कुछ सत्ताधारी दल के नेताओं में भी छात्र आंदोलन का समर्थन करके क्रेडिट लेने की होड़ लगी हुई है।
राजद नेता तेजस्वी यादव से लेकर निर्दलीय सांसद पप्पू यादव और केंद्रीय मंत्री और एलजेपी के चीफ चिराग पासवान तक छात्रों के साथ खड़े होते दिखना चाहते हैं।
Prashant Kishor: पीके ने बिहार की राजनीति में नए दौर की शुरुआत कर दी!
इसी कड़ी में पहले दूसरी पार्टियों के लिए चुनावी रणनीति बनाने वाले प्रशांत किशोर भी आंदोलन में कूद पड़े हैं। शुरू में इसके लिए उनपर कुछ आरोप भी लगे और छात्रों की ओर से भी उनके बर्ताव पर सवाल उठाए गए। लेकिन, अब उन्होंने इस मुद्दे पर जेल जाने पर अड़े रहकर बिहार की राजनीति में नए दौर की शुरुआत कर दी है।
Prashant Kishor: बिहार के युवा वोट बैंक पर है प्रशांत किशोर की नजर
प्रशांत किशोर की तरफ से कहा गया था कि जेल में रहकर भी उनकी भूख हड़ताल जारी रहेगी। बीजेपी से लेकर टीएमसी और कांग्रेस तक को चुनावों में मदद कर चुके प्रशांत अब खुद ही नेता बन चुके हैं। बिहार की राजनीति में युवा वोट बैंक का क्या मतलब है, उन्हें बहुत अच्छे से पता है। पिछले लोकसभा चुनाव में राज्य में मात्र 18 से 19 साल के वोटरों की संख्या 9.26 लाख से भी ज्यादा थी।
Prashant Kishor: अपने सियासी 'गुरु' नीतीश के लिए चुनौती बन गए पीके ?
प्रशांत किशोर का यह दांव मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकती है, जो कभी सियासत में उनके (प्रशांत किशोर के) 'गुरु' रह चुके हैं। यह तब की बात है जब पीके नीतीश के साथ थे और उन्हें बिहार सरकार में मंत्री का दर्जा मिला हुआ था। बाद में वह जेडीयू सुप्रीमो का साथ छोड़कर बंगाल में ममता बनर्जी की सियासत के साथ हो लिए थे। बिहार में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं और सत्ताधारी एनडीए की अगुवाई खुद नीतीश ही कर रहे हैं।
यह बात सही है कि जिस जगह पर प्रशांत धरना दे रहे थे, वहां सबकुछ शांतिपूर्ण तरीके से हो रहा था। लेकिन, खबरें हैं कि पटना पुलिस ने उनके साथ अभद्रता भी की है और राजनीतिक विश्लेषक इसे सरकार की बहुत बड़ी चूक मान रहे हैं। जानकारों का कहना है कि प्रशांत किशोर के साथ जो बर्ताव हुआ है, उससे युवाओं में काफी नाराजगी देखी जा रही है।
ऐसे समय में उनकी ओर से यह बातें भी सामने आ रही हैं कि 26 जनवरी को गांधी मैदान में लाखों लोग जुटने जा रहे हैं। मतलब, बिहार सरकार ने खुद ही अपनी परेशानी बढ़ी ली है। किशोर 2 जनवरी से आमरण अनशन कर रहे हैं और 13 दिसंबर, 2024 को आयोजित बीएपीएससी 70वीं की संयुक्त (प्रारंभिक) परीक्षा रद्द करने की मांग को लेकर छात्रों के साथ अड़े हुए हैं।












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