Bihar Politics: RJD बिहार अध्यक्ष का बदल सकता है चेहरा, जगदानंद सिंह की जगह इन नामों की हो रही चर्चा
Bihar RJD Politics: बिहार की राजनीति में आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह की विदाई की संभावना है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, उन्हें पद से हटाकर नया अध्यक्ष नियुक्त किया जाएगा। विधानसभा चुनाव के समय में यह जिम्मेदारी किसे सौंपी जाएगी, इस पर चर्चा हो रही है। पटना में नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
राजद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक 18 जनवरी को होने वाली है। इसी बैठक में प्रदेश अध्यक्ष का बदलाव तय माना जा रहा है। लालू प्रसाद राष्ट्रीय अध्यक्ष बने रहेंगे, लेकिन स्वास्थ्य कारणों से कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त करेंगे या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है। जगदानंद सिंह उम्र और स्वास्थ्य के कारण फिर से पद संभालने की स्थिति में नहीं हैं।

RJD की हार और संभावित उम्मीदवार: विधानसभा उपचुनाव में आरजेडी को 10 में से 9 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा, केवल बोचहां सीट पर जीत मिली। इस परिप्रेक्ष्य में, जगदानंद सिंह की जगह चार संभावित नामों पर विचार हो रहा है। इनमें इसराइल मंसूरी, शिवचंद्र राम, कुमार सर्वजीत और आलोक कुमार मेहता शामिल हैं। ये सभी लालू परिवार के करीबी माने जाते हैं।
कार्यालय नहीं आ रहे प्रदेश अध्यक्ष: जगदानंद सिंह पिछले डेढ़ महीने से कार्यालय नहीं आ रहे हैं। 2020 के विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में ऐसी ही स्थिति बनी हुई है। उनकी उम्र और स्वास्थ्य ने उन्हें पुनः प्रदेश अध्यक्ष बनने से रोक दिया है। पार्टी अब नए नेतृत्व की तलाश कर रही है जो आगामी चुनावों में बेहतर प्रदर्शन कर सके।
राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर कौन?: लालू प्रसाद यादव का राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर बने रहना पहले से ही तय है। हालांकि, उनके स्वास्थ्य को देखते हुए यह सवाल उठता है कि क्या वे किसी अन्य को कार्यकारी अध्यक्ष बनाएंगे या नहीं। पार्टी के भीतर इस विषय पर भी चर्चाएं जारी हैं और जल्द ही निर्णय लिया जा सकता है।
वोट बैंक साधने की सियासत: राजद आलाकमान ने चार संभावित नामों पर विचार किया है जो विभिन्न जातियों का प्रतिनिधित्व करते हैं। पसमांदा अकलियत समाज से इसरायल मंसूरी, दलित रविदास जाति से शिवचंद्र राम, दलित पासवान जाति से कुमार सर्वजीत और पिछड़ा कुशवाहा जाति से आलोक कुमार मेहता प्रमुख दावेदार हैं। इन नेताओं को लालू परिवार का करीबी माना जाता है और वे पार्टी के प्रति समर्पित रहे हैं।
पार्टी के भीतर नए प्रदेश अध्यक्ष के चयन को लेकर गहन विचार-विमर्श चल रहा है। यह निर्णय महत्वपूर्ण होगा क्योंकि इससे आगामी विधानसभा चुनावों में पार्टी की रणनीति प्रभावित होगी। नए नेतृत्व से उम्मीदें होंगी कि वह पार्टी को मजबूत करेगा और चुनावी सफलता दिलाएगा।












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