Bihar Politics: AK-47, ग्रेनेड और करोड़ों की संपत्ति, फिर भी बचा है अनंत सिंह, कौन दे रहा संरक्षण- अमिताभ दास
Reet lal Vs Anant Singh News: बिहार की राजनीति और प्रशासन पर एक बार फिर दोहरे मापदंडों का आरोप लग रहा है। दानापुर से राजद विधायक रहे रीत लाल यादव की करोड़ों की संपत्ति जब्त करने की प्रक्रिया तेज़ हो गई है। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) यानी धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत की जा रही है।
वन इंडिया हिंदी से बात करते हुए पूर्व आईपीएस अमिताभ दास ने नीतीश सरकार की दोहरी नीती पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि अपराधी को सज़ा देना सही है लेकिन चेहरा देखकर कार्रवाई करना ग़लत है, नियम सबके लिए समान होने चाहिए। उन्होंने कहा कि मैं राजद विधायक रीतलाल यादव का कोई समर्थक नहीं हूं।

रीत लाल यादव पर संगीन आरोप
रीत लाल यादव इस समय हत्या के एक मामले में भभुआ जेल में बंद हैं। वे लंबे समय से विवादों में रहे हैं और उन पर कई संगीन आरोप भी हैं। मगर यही सवाल अब उठ रहा है कि क्या बिहार में कानून का डंडा सिर्फ उन्हीं पर चलता है जो सत्ताधारी पार्टी के विरोध में हों? रीतलाल से भी ज़्यादा खूंखार अपराधी अनंत सिंह है, उस पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।
कार्रवाई की प्रक्रिया क्या है?
PMLA के तहत जब किसी की संपत्ति जब्त की जाती है, तो पहले धन-संपत्ति की रिपोर्ट DSP (धन संपत्ति प्रकोष्ठ) को दी जाती है। इसके बाद एसपी के जरिए अनुमोदन के लिए न्यायालय में प्रस्ताव भेजा जाता है। कोर्ट की अनुमति के बाद ही संपत्ति की जब्ती होती है।
अनंत सिंह पर कब होगी ऐसी कार्रवाई?
अब सवाल यह है कि जब अनंत सिंह जैसे नेता, जिन पर हत्या, अपहरण, अवैध हथियार रखने और गिरोहबंदी जैसे संगीन आरोप दर्ज हैं,उनकी करोड़ों की संपत्तियों पर सरकार इतनी सख्ती क्यों नहीं दिखाती? क्या इसलिए कि अनंत सिंह ने समय के साथ अपने राजनीतिक संबंधों को बदल लिया और सरकार के नज़दीक हो गए?
अमिताभ दास ने कहा कि अनंत सिंह की कोठी से AK-47, हैंड ग्रेनेड, और भारी मात्रा में गोलियां बरामद हो चुकी हैं। एक समय उन्हें "छोटे सरकार" कहा जाता था। लेकिन अब तक उनकी एक भी संपत्ति PMLA के तहत जब्त नहीं की गई है। क्योंकि सीएम नीतीश कुमार उसके गिरोह में शामिल हैं, इस वजह से अनंत सिंह को संरक्षण मिला हुआ है।
कानून सबके लिए बराबर है, या नहीं?
अगर रीत लाल यादव का अपराध उन्हें कुर्की की ओर ले जा रहा है, तो अनंत सिंह की करोड़ों की अवैध संपत्तियों पर चुप्पी क्यों? क्या यह मान लिया जाए कि कानून का इस्तेमाल अब "राजनीतिक औजार" बन गया है? कई होटल औऱ हाल ही में अनंत सिंह ने 3 करोड़ की गाड़ी ख़रीदी, यह सब उसके खून पसीने की कमाई नहीं है।
नीतीश सरकार पर दोहरे मापदंड का आरोप
सरकार को भी चाहिए कि मामले संज्ञान लेते हुए इसकी संपत्ती कुर्की करे औऱ उसे तिहाड़ जेल भेजे। राजनीतिक विशेषज्ञों और विपक्ष का कहना है कि राजद से जुड़े नेताओं पर तेजी से कार्रवाई होती है, लेकिन जेडीयू या भाजपा के करीबियों को "क्लीन चिट" मिलती दिखती है। "रीत लाल यादव की कुर्की तो तुरंत हो रही है, लेकिन अनंत सिंह की करोड़ों की हवेलियों पर प्रशासन को चश्मा लग गया है क्या?"
अनंत सिंह पर कार्रवाई क्यों नहीं?
अमिताभ दास ने कहा कि रीत लाल यादव दोषी है तो उस पर कार्रवाई होनी चाहिए, इसके साथ ही अनंत सिंह पर भी कार्रवाई की जानी चाहिए। चुनिंदा कार्रवाई से जनता का भरोसा टूटता है। अगर बिहार में सचमुच "सुशासन" है, तो फिर कानून की तलवार अनंत सिंह जैसे बाहुबली नेताओं पर भी समान रूप से क्यों नहीं चल रही है।












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