नालंदा हिंसा के निकाले जा रहे सियासी मायने, क्या बदलेंगे प्रदेश के राजनीतिक समीकरण?
Bihar Politics: सासाराम और नालंदा में हुए हादसे के बाद अब बिहार में सियासी पारा चढ़ने लगा है।

Bihar Politics: सासाराम और नालंदा हिंसा मामले में अख्तरुल ईमान (प्रदेश अध्यक्ष, AIMIM) ने कहा कि जानबूझकर कुछ लोग माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। मामले को संभालने की बजाय कुछ लोग माहौल बिगाड़ रहे हैं। ऐसा करने से भाजपा और महागठबंधन फायदा मिल रहा है। उन्होंने कहा सांप्रदायिक शक्तियां समझ रही है कि मुसलमानों को निशाना बनाने से उनका वोट बैंक बढ़ेगा।
अख्तरुल ईमान ने कहा कि महागठबंधन के नेता सोच रहे हैं कि ऐसी घटना से मुसलमान डरे सहमे रहेंगे, उनके पास कोई विकल्प नहीं रहेगा। इस वजह से मुसलमानों को वोट डर के साए में महागठबंधन के पास ही रहेगा। इससे साफ ज़ाहिर होता है कि NDA और महागठबंधन माइनॉरिटी वोट बैंक को सियासी खेल का शिकार बना रहे हैं, AIMIM ऐसा बिल्कुल भी होने नहीं देगी।
हिंसा मामले में केंद्रीय मंत्री गिरीराज सिंह ने नीतीश सरकार पर जुबानी हमाल बोला, उन्होंने कहा कि बिहार भी बंगाल के तर्ज़ पर चल रहा है। रामनवमी के जुलूस में पथराव की योजना पहले से थी, इस बात की जानकारी सीएम नीतीश कुमार को नहीं था। सीएम को अपने पद से इस्तीफ़ा दे देना चाहिए। तीखा हमला बोलते हुए गिरिराज सिंह वे कहा कि सीएम नीतीश कुमार कह दें कि वह सिर्फ मुसलमानों के मुख्यमंत्री हैं। हिंदू नालंदा और सासाराम छोड़ दें, मुख्यमंत्री यह भी कह दें।
जदयू राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि बिहार में बीजेपी धार्मिक उन्माद फैलाना चाहती है। हिंसा फैलाकर भारतीय जनता पार्टी वोटों का ध्रुवीकरण करना चाहती है। भाजपा अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाएगी। नीतीश कुमार के रहते प्रदेश में सांप्रदायिक माहौल बन्ने नहीं दिया जाएगा।
हिंसा मामले में आम आदमी का कहना है कि सभी पार्टी अपने वोट बैंक के लिए ही सियासत करती है। AIMIM के नेता बयानबाज़ी कर सोच रहे हैं कि, मुस्लिम वोट को अपने पक्ष में कर लेंगे। कोई भी जनता के हित में नहीं सिर्फ कुर्सी के लालच में सियासी रोटी सेकता है।
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