Bihar Chunav 2025: जन सुराज के दबाव में सरकार, पेंशन, आशा, रसोइया सबको मिला फायदा, बेगूसराय में PK का बयान
Bihar Chunav 2025: जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने बुधवार को बेगूसराय के बखरी में आयोजित "बिहार बदलाव जनसभा" में सरकार और चुनाव आयोग पर करारा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा और एनडीए, चुनाव आयोग के साथ मिलकर बिहार के गरीबों, वंचितों और प्रवासी मजदूरों के नाम मतदाता सूची से हटाने की साजिश कर रहे हैं।
प्रशांत किशोर ने केंद्र सरकार के मंत्री और बेगूसराय के सांसद गिरिराज सिंह के उस बयान पर पलटवार किया, जिसमें गिरिराज ने SIR (Standard of Identification Rules) को लेकर विपक्षी दलों पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया था। पीके ने कहा, "सरकार को डर है कि जो बिहारी मजदूरी के लिए बाहर गए हैं, वे लौटकर NDA के खिलाफ वोट डालेंगे।

इसलिए उनके नाम वोटर लिस्ट से काटे जा रहे हैं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि आधार कार्ड वाले हर नागरिक को वोट देने का अधिकार है। उन्होंने चेतावनी दी कि, "जिसका नाम कटेगा, हम उसके लिए लड़ेंगे, और जो नाम बचेंगे वही NDA सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए काफी होंगे।"
जनता को बताया 'हनुमान', खुद को बताया 'जामवंत'
प्रशांत किशोर ने जमालपुर जनसभा को लेकर प्रशासनिक अनुमति में देरी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि, "जनता को अपनी ताकत दिखाने के लिए किसी परमिशन की जरूरत नहीं है। हम तो जामवंत हैं, जो जनता रूपी हनुमान को उसकी शक्ति याद दिला रहे हैं।"
PK ने दावा किया कि जन सुराज की सक्रियता से सरकार ने कई फैसले लिए हैं, जैसे -
20 साल बाद वृद्धावस्था पेंशन राशि में बढ़ोतरी
आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय में वृद्धि
रसोइयों का वेतन दोगुना
डोमिसाइल नीति की पुनर्बहाली की घोषणा
PK ने कहा कि ये सब इस बात का प्रमाण है कि जब लोकतंत्र में मजबूत विकल्प आता है, तो सरकारें भी घबराकर फैसले लेने को मजबूर होती हैं।
TRE-4 में डोमिसाइल नीति पर भी उठाए सवाल
TRE-4 (Teacher Recruitment Exam) में डोमिसाइल लागू करने की नीति को लेकर पीके ने नीतीश सरकार को घेरा। उन्होंने कहा, 2023 में प्रधानमंत्री बनने के लालच में नीतीश कुमार ने डोमिसाइल नीति हटा दी थी। उसी का नतीजा था कि 3 लाख शिक्षकों की बहाली में अधिकांश बाहर के लोग भर्ती हो गए।
अब चुनाव सामने है, तो फिर से बिहार के नाम पर घोषणा हो रही है। प्रशांत किशोर ने स्पष्ट रूप से मांग की कि बिहार में कम से कम दो-तिहाई पदों पर स्थायी रूप से डोमिसाइल आरक्षण लागू किया जाए।












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