Bihar Chunav 2025: जन सुराज के 14 उम्मीदवारों को धमकी दी गई, 3 टूट गए, Prashant Kishor ने लगाए गंभीर आरोप
Bihar Chuanv 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण के बाद जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) ने सोमवार को राजधानी पटना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भाजपा नेतृत्व पर सीधा और गंभीर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने राजनीतिक प्रभाव का दुरुपयोग कर जन सुराज के प्रत्याशियों को धमकाया, दबाव डाला और नामांकन वापस कराने का षड्यंत्र रचा।
PK ने कहा कि भाजपा अब जन सुराज से डरने लगी है, क्योंकि पहली बार बिहार की जनता को बाहुबलियों और पारंपरिक नेताओं से अलग एक नया विकल्प दिख रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा अब लोकतंत्र की सीमाएं लांघ रही है, जहाँ पार्टी नेताओं के बजाय खुद केंद्रीय मंत्री विपक्षी प्रत्याशियों के घर जाकर उन्हें धमकाने में लगे हैं।

दानापुर केस: "गृह मंत्री के पास बैठा था जन सुराज प्रत्याशी, नामांकन नहीं करने दिया गया"
प्रशांत किशोर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत दानापुर के उदाहरण से की। उन्होंने बताया कि वहाँ से जन सुराज ने व्यवसायी अखिलेश कुमार उर्फ़ मुटूर शाह को टिकट दिया था। वे जनता के बीच लोकप्रिय हैं और बाहुबली उम्मीदवारों के सामने एक सशक्त विकल्प बन सकते थे।
PK ने कहा कि हमारे उम्मीदवार अखिलेश शाह को नामांकन करने नहीं दिया गया। सुबह से शाम तक वो अमित शाह और धर्मेंद्र प्रधान के साथ बैठे रहे। भाजपा ने खुद प्रचार किया कि राजद के गुंडों ने उन्हें बंधक बना लिया है, लेकिन हकीकत ये है कि वे खुद गृह मंत्री के साथ बैठे थे।
एक सामान्य व्यवसायी को देश का गृह मंत्री बुला रहा है, क्या ये चुनाव आयोग की आँखों से ओझल है? उन्होंने कहा कि भाजपा अब इस डर से परेशान है कि जनता बाहुबली उम्मीदवारों के बजाय सामान्य लोगों को वोट देने लगेगी। जन सुराज ने ऐसे ही लोगों को टिकट दिया है, जिनका समाज से सीधा जुड़ाव है, अपराध या धनबल से नहीं।
ब्रह्मपुर केस: धर्मेंद्र प्रधान की तस्वीर के साथ डॉ. सत्य प्रकाश तिवारी का नामांकन वापसी
PK ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक तस्वीर जारी की जिसमें बक्सर के ब्रह्मपुर सीट से जन सुराज प्रत्याशी डॉ. सत्य प्रकाश तिवारी केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के साथ दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि "ये तस्वीर सबूत है कि धर्मेंद्र प्रधान ने डॉ. तिवारी पर दबाव बनाकर उनका नामांकन वापस कराया। ब्रह्मपुर में लोजपा के बाहुबली हुलास पांडे चुनाव लड़ रहे हैं।
वहां हमने एक डॉक्टर को खड़ा किया जो जनता में लोकप्रिय हैं, पर भाजपा को डर था कि बाहुबली के खिलाफ ये डॉक्टर जीत सकते हैं। इसलिए केंद्रीय मंत्री खुद बीच में उतर आए। PK ने कहा कि यह पहली बार हो रहा है जब चुनाव के दौरान किसी प्रत्याशी से देश का मंत्री मिलकर उसे नामांकन वापस लेने को कहता है। उन्होंने चुनाव आयोग से इस पूरे मामले की जांच की मांग की है।
गोपालगंज में भी दबाव, डॉक्टर प्रत्याशी ने फोन बंद किया
तीसरा मामला गोपालगंज का है। PK ने बताया कि वहाँ जन सुराज के प्रत्याशी डॉ. शशि शेखर सिन्हा, जो स्थानीय समाज में प्रतिष्ठित चिकित्सक हैं और पूर्व विधायक रघुनाथ पांडे के दामाद हैं, उन्हें भाजपा नेताओं और स्थानीय MLC ने धमकाया। PK ने कहा कि "डॉ. शशि शेखर ने मुझसे फोन पर कहा कि मुझपर बहुत दबाव बनाया जा रहा है, लेकिन मैं पार्टी के साथ हूं।
कुछ घंटों बाद उनका फोन बंद हो गया और खबर आई कि उन्होंने नामांकन वापस ले लिया। यह लोकतंत्र पर हमला है। जब उम्मीदवार सुरक्षित नहीं हैं तो आम वोटर कैसे सुरक्षित रहेगा? "अगर उम्मीदवार असुरक्षित हैं तो वोटर की सुरक्षा कौन करेगा?" प्रशांत किशोर ने चुनाव आयोग पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब प्रत्याशियों को धमकाया जा सकता है, उनके नामांकन रुकवाए जा सकते हैं, तो आम मतदाता के लिए निष्पक्ष माहौल कैसे बनेगा।
14 उम्मीदवारों को धमकी दी गई है, जिनमें से तीन टूट गए- PK
प्रशांत किशोर ने कहा कि जन सुराज के 14 उम्मीदवारों को धमकी दी गई है, जिनमें से तीन टूट गए हैं, जबकि 240 उम्मीदवार अब भी मजबूती से मैदान में डटे हुए हैं। उन्होंने पटना के कुम्हरार से उम्मीदवार प्रो. केसी सिन्हा और वाल्मीकिनगर के शिक्षक उम्मीदवार का उदाहरण देते हुए कहा कि उन पर भी प्रशासन और सत्ता के दबाव बनाए जा रहे हैं, लेकिन वे डटे हुए हैं।
PK ने कहा, हम आयोग से पूछते हैं कि अगर आप एक प्रत्याशी की सुरक्षा नहीं कर सकते, तो आप वोटर को कैसे सुरक्षा देंगे? यह लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है। भाजपा को अब बाहुबलियों या महागठबंधन से नहीं, बल्कि अच्छे और ईमानदार उम्मीदवारों से डर लग रहा है। ये लोग डरते हैं डॉक्टरों से, प्रोफेसरों से, समाजसेवकों से। हमने जिन लोगों को टिकट दिया है, वे जनता के असली प्रतिनिधि हैं।
भाजपा का डर यही है कि लोग अब बाहुबलियों और जातीय राजनीति से हटकर इन सच्चे चेहरों को वोट देंगे। उन्होंने कहा कि जन सुराज बिहार में एक आंदोलन बन चुका है - जो जात, धर्म या धन की राजनीति नहीं बल्कि जनता की ताकत से सरकार बदलने की तैयारी कर रहा है।
अतिपिछड़ा और मुस्लिम समाज को प्रतिनिधित्व
PK ने आगे बताया कि इस बार जन सुराज ने 54 अतिपिछड़ा समाज के उम्मीदवार उतारे हैं, जो बिहार की किसी भी पार्टी द्वारा दी गई अब तक की सबसे बड़ी भागीदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी ने 34 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया है, और सीमांचल को छोड़कर वहां मुस्लिम उम्मीदवार उतारे हैं जहां पहले से कोई मुस्लिम विधायक नहीं था।
जन सुराज हार नहीं मानेगा- प्रशांत किशोर
दूसरी पार्टियाँ मुसलमानों को केवल वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करती हैं। लेकिन हमने उन्हें सम्मानजनक भागीदारी दी है। अंत में प्रशांत किशोर ने कहा कि चाहे भाजपा कितनी भी साज़िश कर ले, जन सुराज पीछे नहीं हटेगा। "हम बिहार के युवाओं से कहना चाहते हैं कि इस बार बाहर जाने की ज़रूरत नहीं होगी, अगर आप सत्ता को बदल देंगे। अब वक्त आ गया है कि बिहार अपने पैरों पर खड़ा हो। जन सुराज डरने वाला नहीं है, हम भाजपा के दांत खट्टे कर देंगे।












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