Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Bihar Chunav 2025: अश्वनी चौबे के बेटे अर्जित शाश्वत चौबे ने क्यों नहीं भरा नामांकन, क्या हुई है कुछ बड़ी डील?

Bihar Chunav 2025: बिहार के राजनीतिक गलियारों में मंगलवार को एक अप्रत्याशित और चर्चा पैदा करने वाला घटनाक्रम देखने को मिला, जब पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे के बेटे अर्जित शाश्वत चौबे, जो बीजेपी से टिकट न मिलने के बाद निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में उतरने वाले थे, अचानक नामांकन दाखिल करने से लौट गए।

समर्थकों के बीच अचानक यू-टर्न
सूत्रों के अनुसार, अर्जित शाश्वत उस समय जिला समाहरणालय परिसर पहुंचे थे जब उनके समर्थक भारी मालाओं से उन्हें स्वागत कर रहे थे और जयकारों की गूँज सुनाई दे रही थी। लेकिन इसी बीच एक फोन कॉल ने पूरी तस्वीर बदल दी। अर्जित ने पत्रकारों के सामने फोन उठाया और संक्षिप्त, एक-शब्द वाले उत्तर दिए। इसके बाद उन्होंने बिना नामांकन दाखिल किए ही वापस लौटने का निर्णय लिया।

Bihar Chunav 2025

पिता अश्विनी चौबे का स्पष्ट निर्देश
अर्जित ने बाद में पत्रकारों को बताया कि यह फोन उनके पिता अश्विनी चौबे का था। उन्होंने कहा, "मेरे पिता ने स्पष्ट निर्देश दिए कि आप बीजेपी में हैं और बीजेपी में ही रहेंगे।" इस निर्देश को सम्मान देते हुए अर्जित ने चुनावी मैदान से अपना नाम वापस ले लिया। उन्होंने कहा, "मैं अपनी पार्टी और देश के खिलाफ बगावत नहीं कर सकता। मेरे माता-पिता और पार्टी का सम्मान मेरी प्राथमिकता है।"

बीजेपी का दबाव और बड़ी डील
जानकारों का कहना है कि अर्जित शाश्वत चौबे पर बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व का लगातार दबाव था। सूत्रों के अनुसार, उन्हें पार्टी के अंदर कोई बड़ा पद देने की डील भी हुई है, ताकि वे पार्टी के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ने से बचें। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह कदम केवल व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा का मामला नहीं बल्कि पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे के घटते राजनीतिक क़द को बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा भी है।

चुनावी रणनीति और पार्टी अनुशासन
भाजपा के अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि पार्टी नेतृत्व ने साफ कर दिया था कि यदि अर्जित शाश्वत चुनाव लड़ते हैं तो यह न केवल पार्टी के चुनावी खेल को प्रभावित करेगा बल्कि स्थानीय स्तर पर विरोधियों के लिए अवसर भी पैदा करेगा। इसके मद्देनजर पार्टी ने उन्हें एक आकर्षक प्रस्ताव देकर निर्दलीय चुनाव से रोकने का प्रयास किया।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों की राय
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह घटना बिहार की राजनीतिक परंपरा में एक नया मोड़ है। चुनावी रणनीति, पारिवारिक दबाव और पार्टी अनुशासन का यह अद्वितीय उदाहरण बताता है कि कैसे व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा और पारिवारिक परंपराएँ कभी-कभी राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाती हैं।

परिवार, पार्टी और राजनीति
इस अप्रत्याशित यू-टर्न ने भागलपुर में सियासी हलचल को और बढ़ा दिया है। जहां एक ओर समर्थक और स्थानीय लोग अर्जित के अचानक हटने को लेकर हैरान हैं, वहीं दूसरी ओर बीजेपी को इस घटना से अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने का अवसर मिला है। अंततः, यह मामला केवल एक परिवार की राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि बिहार के चुनावी परिदृश्य में पार्टी अनुशासन, राजनीतिक समझौते और सत्ता-संबंधी रणनीतियों का परिचायक भी है।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+