Bihar Chunav: आज दिवाली के दिन सभी बांध पर रहने को मजबूर हैं, वोट देने जाएं तो... PK ने दुखती रगों पर रखा हाथ
Bihar Chunav 2025: भोजपुर जिले के जवानियां गांव में दिवाली के अवसर पर जन-सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर पहुंचे और बाढ़ पीड़ितों के साथ समय बिताया। उन्होंने दोपहर से देर शाम तक गांव के पास बांध पर शरण लिए लगभग 700 परिवारों के कठिन हालातों को करीब से देखा। बांध पर जीवन यापन कर रहे लोग आज भी अपने घरों से बेघर हैं और सरकार की उदासीनता का सामना कर रहे हैं।
प्रशांत किशोर ने बताया कि यह उनकी जिम्मेदारी है कि बिहारवासियों को यह दिखाया जाए कि कैसे आम लोग सरकारी नीतियों की अनदेखी का शिकार हो रहे हैं। उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि फिलहाल हम इन लोगों को सीधे मदद नहीं कर सकते, लेकिन यह बताना जरूरी है कि जैसे आज सरकार ने इनकी कोई परवाह नहीं की, कल अगर किसी और के साथ ऐसी स्थिति आएगी तो उसका भी समाधान नहीं होगा।

प्रशांत किशोर ने साफ शब्दों में चेताया कि आने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में वोट देने से पहले जनता को यह देखना चाहिए कि किस तरह सरकार आम लोगों की समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने कहा, "जनता के वोट से ही सरकार की संवेदना बदलेगी। जिस तरह से पेंशन और मानदेय बढ़ाए गए, उसी तरह नई सरकार जवानियां गांव के पुनर्वास के लिए कदम उठाएगी। बिहारवासियों को चाहिए कि दिवाली के इस पर्व में भी इन बाढ़ पीड़ितों के संघर्ष में उनका समर्थन करें।"
भोजपुर की जवानियां जैसी बाढ़-प्रवण जगहों में मौजूदा प्रशासन की उदासीनता चुनावी मोड़ पर अहम मुद्दा बन सकती है। प्रशांत किशोर ने इस अवसर पर चुनावी संदेश भी दिया और कहा कि बिहार के लोग अब सिर्फ वादों पर भरोसा नहीं करेंगे, बल्कि उन सरकारों को चुनेंगे जो वास्तव में जनता की समस्याओं को हल करने के लिए प्रतिबद्ध हों। उन्होंने अपील की कि आने वाले विधानसभा चुनाव में जनता ऐसे नेताओं को वोट दें जो वास्तविक मुद्दों पर काम करें और संवेदनशील हों।
गांव के बाढ़ पीड़ितों ने भी अपनी पीड़ा बताई और कहा कि दिवाली पर परिवार के साथ घर में नहीं बल्कि बांध पर शरण लेना कोई सामान्य बात नहीं है। उन्होंने प्रशासन की उदासीनता को लेकर अपनी नाराजगी जताई और चुनाव से पहले इस मुद्दे को राजनीतिक मंच पर लाने की उम्मीद जताई। प्रशांत किशोर ने कहा कि उनकी पार्टी और संगठन जनता के बीच इस तरह की समस्याओं को लेकर जाएंगे और बिहारवासियों को याद दिलाएंगे कि उनका वोट उनकी समस्याओं का हल है।
इस मौके पर प्रशांत किशोर ने यह भी कहा कि बिहार में चुनाव सिर्फ सत्ता पाने के लिए नहीं, बल्कि लोगों की वास्तविक समस्याओं को उजागर करने का माध्यम होना चाहिए। उन्होंने बिहारवासियों से अनुरोध किया कि दिवाली मनाते समय भी जवानियां गांव के परिवारों के संघर्ष को याद रखें और अपने वोट के जरिए ऐसे नेताओं को चुनें जो संवेदनशील और जिम्मेदार हों।












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