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फ़र्ज़ी DSP मामला: विजय कुमार के बड़ा कांड करने से पहले ही खुल गई पोल, पढ़िए इनसाइड स्टोरी

पुलिस की वर्दी का विजय ने कई जगहों पर ग़लत इस्तेमाल भी किया। उसके गांव में दो पक्षों के बीच ज़मीन विवाद चल रहा था। पुलिस ने विवाद की वजह से एक व्यक्ति को गिरफ़्तार किया था।

पटना, 23 जुलाई 2022। बिहार में इन दिनों फ़र्ज़ी डीएसपी का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। विजय कुमार भारती के ज़ेहन में फ़र्ज़ी डीएसपी बनने का ख़याल कैसे आया और फिर बड़ा कांड करने से पहले पोल कैसे खुल गई। आइए विस्तार से जानते हैं इस शख्स विजय कुमार भारती के बारे में जिसने वर्दी की रौब में कई लोगों पर सितम ढाया है। मिली जानकारी के मुताबिक विजय अपनी बहन के घर पटना के शास्त्रीनगर में रह कर कॉम्पेटेटिव एग्ज़ाम्स की तैयारी करता था। कई बार परीक्षा देने के बाद भी कामयाब नहीं मिली तो उसके दिमाग़ में शातिर ख़याल आया और उसने फ़र्ज़ी डीएसपी बन्ने का खेल ही रच डाला।

'परिवार वालों को बताया की DSP बन गया हूं'

'परिवार वालों को बताया की DSP बन गया हूं'

विजय कुमार भारती सरकारी नौकरी नहीं मिलने को लेकर परिवार के दबाव में यह क़दम उठाया। फ़र्ज़ी डीएसपी के लिए उसने पुलिस की वर्दी के साथ-साथ फर्जी आईकार्ड बनाया। जब उसका ड्रेस मुकम्मल हो गया तो उसने परिवार वालों को झूठ ही बताया कि वह डीएसपी बन गया है। यहां तक की ग्रामीणों को दिखाने के लिए वह वर्दी पहन कर गांव भी गया था। जब घर वालों को इस बात का यक़ीन हो गया की उसका बेटा डीएसपी बन गया है तब परिवार वालों ने पैसे मांगे तो झांसा दे दिया की सैलरी नहीं मिली है। इसके बाद उसका नकली डीएसपी का कोरबार शुरू हो गया। वह वर्दी की रौब पर कई काम करवाने लगा।

नकली DSP बन कर दिखा रहा था वर्दी का रौब

नकली DSP बन कर दिखा रहा था वर्दी का रौब

पुलिस की वर्दी का विजय ने कई जगहों पर ग़लत इस्तेमाल भी किया। उसके गांव में दो पक्षों के बीच ज़मीन विवाद चल रहा था। पुलिस ने विवाद की वजह से एक व्यक्ति को गिरफ़्तार किया था। तो विजय खुद को डीएसपी बताकर उसे छुड़ाने की पैरवी करने गया था लेकिन पुलिस उसके फ़र्ज़ीवाड़े को समझ पाती उससे पहले ही वह वहां से रफूचक्कर हो गया। यूं कह लीजिए की विजय नकली डीएसपी बनकर खूब मज़े में जिंदगी के मौज ले रहा था। अब वह बड़ा कांड करने की फिराक में था ही कि उससे पहले पोल ही खुल गई।

ऑटो ड्राइवर से बहस करने पर हुआ खुलासा

ऑटो ड्राइवर से बहस करने पर हुआ खुलासा

विजय कुमार भारती के फ़र्ज़ीवाड़े का खुलासा उस वक्त हुआ जब वह ऑटो के किराये के लिए कारगिल चौक पर ऑटो ड्राइवर से झगड़ा किया। किराए को लेकर वर्दी का धौंस दिखा रहा था, मामले को बढ़ता देख पुलिसवाले वहां पहुंचे विजय से जब ने आईकार्ड मांगा तो फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। खुद की डीएसपी बताते हुए ऑटो ड्राइवर को नकली आईकार्ड दिखा रहा था। पुलिस वाले को विजय कुमार की बॉडी लैंग्वेज से ही शक हो गया था। जब आईकार्ड देखा तो उसपे पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी का हस्ताक्षर ही नहीं था। इसके बाद शक और बढ़ गया, जब उसे थाना ले जाकर पूछ-ताछ की गई तो सच्चाई सामने आई।

महिला पुलिस अधिकारी से शादी के फिराक में था शातिर

महिला पुलिस अधिकारी से शादी के फिराक में था शातिर

पुलिस ने आरोपी के पास पास से पुलिस की उलेन वर्दी, नकली मुहर समेत कई सामान भी बरामद किया है। युवक के खिलाफ गांधी मैदान थाना में मामला दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि शातिर विजय कुमार भारती मूल रूप से मधुबनी के जरौली (आन्धा मठ थाना) का रहने वाला है। पिता का नाम डॉ. विन्देश्वर मंडल है और वह पेशे से डॉक्टर हैं। आरोपी ने परिवार समेत गांव वालों को झांसे में लिया ही, इसके साथ ही महिला पुलिस अधिकारी को भी झांसे में लेकर शादी करने की तैयारी कर रहा था। अगर ऑटो ड्राइवर से बहस नहीं हुआ होता तो वह महिला पुलिस अधिकारी को भी झांसे में ले चुका होता।

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