Patliputra Seat: 'यादव बनाम यादव' की सियासत के बाद भी, आज तक नहीं जीती RJD, जानिए सियासी इतिहास
Patliputra Lok Sabha Seat Political History: बिहार में लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर अभी से ही सियासी पार्टियों ने रणनीतियां बनानी शुरू कर दी हैं। वहीं प्रदेश की सभी 40 लोकसभा सीटों पर चुनावी चर्चा भी तेज़ हो चुकी है। इसी क्रम में आज हम आपको बिहार की VIP सीटों में शुमार की जाने वाली पाटलिपुत्र लोकसभा सीट का इतिहास और समीकरण बताने जा रहे हैं।
बिहार की सियासी फ़िज़ा में पाटलिपुत्र लोकसभा सीट का नतीजा बहुत ही चौंकाने वाला रहा है। ग़ौरतलब है कि इस सीट पर यादव बनाम यादव की ही सियासत को हवा मिलती रही है। इसके बावजूद यहां से राजद आज तक खाता नहीं खोल पाई है।

आपको बता दें कि पहले बाढ़ और पटना इसी जिले की लोकसभा सीटें थीं। नए परिसीमन के बाद पाटलिपुत्र और पटना साहिब लोकसभा सीट अस्तित्व में आई। 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई पाटलिपुत्र लोकसभा सीट पर अभी तक 3 बार लोकसभा चुनाव हो चुके हैं।
बिहार की सियासत के दिग्गज नेता राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने यहां से एक बार चुनावी दांव खेला है। दो बार लू यादव की बड़ी बेटी मीसा भारती ने राजद की टिकट पर चुनावी चाल चली लेकिन कामयाबी नहीं मिली। 2009, 2014 और 2019 में इस लोकसभा सीट पर राजद को चुनावी मात मिली।
सियासी गणित तो देखिए कि लालू प्रसाद यादव जैसे दिग्गज नेता को भी जनता ने नकार दिया। पहली बार इस लोकसभा सीट पर 2009 में लालू से ही सियासत सीखने वाले जदयू नेता रंजन प्रसाद यादव ने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद को हराया था।
2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी रामकृपाल यादव ने राजद नेत्री लालू प्रसाद यादव की बड़ी बेटी मीसा भारती को चुनावी मात दी। आपको बता दें कि पाटलिपुत्र लोकसभा सीट के अंतर्गत छह विधानसभा क्षेत्र आते हैं।
मनेर, दानापुर और मसौढ़ी पर राजद का क़ब्ज़ा है। वहीं बिक्रम विधानसभा सीट पर कांग्रेस, पालीगंज सीट पर CPML और फुलवारी सीट पर भाकपा का कब्जा है। पाटलिपुत्र लोकसभा क्षेत्र के जातीय समीकरण की बात की जाए तो यहां 5 लाख यादव, 4 लाख कुर्मी और 3 लाख भूमिहार मतदाताओं की तादाद है।












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