सत्ताधारी विधायक ने इस बच्ची को बना दिया बिहार की निर्भया, फैसले के इंतजार में परिवार
मामले के मुताबिक बिहार के एक सत्ताधारी पार्टी के विधायक ने पीड़िता के साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया था। हालांकि दिल्ली की निर्भया को तो इंसाफ मिल गया लेकिन बिहार की निर्भया को भी अब अपने फैसले
पटना। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया के दोषियों की फांसी की सजा बरकरार रखा है। फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि निर्भया के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के मामले जैसे जघन्य अपराध करने वाले दोषियों को माफ नहीं किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद पूरे देश में खुशी की लहर दौड़ गई। दिल्ली की निर्भया की तरह ही एक मामला बिहार की निर्भया का भी है। मामले के मुताबिक बिहार के एक सत्ताधारी पार्टी के विधायक ने पीड़िता के साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया था। हालांकि दिल्ली की निर्भया को तो इंसाफ मिल गया लेकिन बिहार की निर्भया को भी अब अपने फैसले का इंतजार है। फिलहाल देखना यह है कि कोर्ट इनके दोषी को क्या सजा देती है।

घटना के पीछे बताया गया एक महिला दलाल का हाथ
दरअसल, यह घटना 9 फरवरी 2016 की है। तथाकथित मामले के मुताबिक नवादा के राजबल्लभ नाम के विधायक ने पहले पीड़िता को पहले पैसे का लालच दिया और बाद में डरा धमकाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। विधायक के खिलाफ नालंदा जिले में मामला दर्ज कराया गया था। यह नाबालिग लड़की नालंदा जिले के ही रूई ब्लॉक की रहने वाली है। रिपोर्ट में किए गए जिक्र के मुताबिक यह मामला हाई प्रोफाइल सेक्स रैकेट से संबंधित था। इसके पीछे एक महिला दलाल का हाथ बताया जा रहा है।
पुलिस हिरासत से पहले खुद किया आत्मसमर्पण
आरोप के चलते पहले तो विधायक को तत्काल प्रभाव से पार्टी से निलंबित कर दिया गया। उसके बाद उनके खिलाफ पुलिस ने पॉस्को एक्ट और इम्मोरल ट्रैफिक एक्ट के तहत आईपीसी की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत मामला लगाया गया। हालांकि पुलिस की दबिश के वजह से जहां विधायक ने कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया। वहीं महिला दलाल के साथ अन्य लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। गौरतलब है कि राजबल्लभ बिहार की सबसे बड़ी पार्टी राजद पार्टी में विधायक है। पहले तो विधायक राजबल्लभ यादव पुलिस एफआईआर के चलते फरार हो गए लेकिन एक महीने बाद 10 मार्च 2016 को बिहार शरीफ कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया। जिसके बाद उन्हें अपराधी वारदातों के तहत हिरासत में ले लिया गया।
सत्ता के गलियारों से जुड़े होने के कारण मामला हो गया गंभीर
सत्ता के गलियारे से जुड़े मामले को चर्चा का प्रश्न बनते समय नहीं लगता। यही वजह है कि नाबालिग से रेप के आरोप पर पूरे राज्य में बहुत तेजी से तूल पकड़ा था और लोगों के बीच चर्चा का बड़ा विषय बन गया। मामला एक बड़ी पार्टी के विधायक से जुड़ा हुआ था तो इसकी सुनवाई पटना रेंज के डीआईजी, आईपीएस शालीन ने इस मामले की जांच का जिम्मा उठाया। उन्होंने 20 अप्रैल 2016 को कोर्ट में विधायक के खिलाफ चार्जशीट पेश किया। चार्जशीट पेश होने के बाद लोअर कोर्ट में ट्रायल शुरू हुआ और 6 अगस्त 2016 को विधायक के खिलाफ आरोप तय कर दिया गया। पहली बार 30 अप्रैल 2016 को मामले की सुनवाई करते हुए निचली अदालत ने जेल में बंद विधायक की जमानत याचिका खारिज कर दी। तदुपरान्त 27 जुलाई को हाईकोर्ट में जमानत के लिए अपील की गई थी । पर जमानत रदद कर दी गई थी। दोबारा 30 सितंबर को मामले की सुनवाई करते हुए उन्हें जमानत मिल गई। जेल से बाहर आने के कुछ ही दिनों बाद बिहार सरकार ने हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में अपील किया और सरकार से अपील पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के फैसले को गलत ठहराते हुए 2 हफ्ते के भीतर विधायक को सरेंडर करने का आदेश दिया था। अगर बात करें अभी की तो विधायक फिलहाल जेल में अपने गुनाहों की सजा काट रहे हैं ।

क्या चाहता है परिवार
वहीं अगर बिहार की निर्भया की बात करें तो उनकी हालत काफी निराशाजनक है। रिपोर्ट के मुताबिक वह अपने साथ हुए दुष्कर्म से इस तरह घबरा गई थी कि कई दिनों तक वो ड्रोमा में रहीं। अस्पताल में कई दिनों तक उनका इलाज चला। सूत्रों के मुताबिक पीड़िता की गवाही भी शुरू हो गई है। उसे और उनके परिवार को जल्द उम्मीद है कि उन्हें भी दिल्ली की निर्भया की तरह ही इंसाफ मिलेगा।












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