'भारत जोड़ो यात्रा निजी है' : नीतीश को लोकसभा चुनाव के लिए समान विचारधारा वाली पार्टियों का इंतजार
बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा को कांग्रेस का निजी कार्यक्रम कहा है। उनके मुताबिक वह इस यात्रा के बाद लोकसभा चुनावों के लिए समान विचारधारा वाले दलों की बैठक के इंतजार में हैं।

गणतंत्र दिवस के दिन मोदी सरकार को लेकर जो सर्वे के नतीजे आए हैं, उसमें विपक्ष की स्थिति काफी कमजोर बताई जा रही है। लेकिन, विपक्ष अभी भी केंद्र की एनडीए सरकार के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने की बात तो कर रहा है, लेकिन सबका अपना-अपना एजेंडा है, जिससे वह जरा भी हिलने को तैयार नहीं दिख रहे हैं। इन्हीं में से एक हैं बिहार में सत्ताधारी महागठबंधन की अगुवाई कर रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी पार्टी जेडीयू। जो भाजपा-विरोधी गठबंधन के लिए तो बहुत उतावले हैं, लेकिन कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा से कन्नी काटे रहे हैं और आगे भी रखना चाहते हैं। अब जानिए कि बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों की रणनीति और अपनी पार्टी की अंदरूनी स्थिति को लेकर क्या कुछ कहा है।

भारत जोड़ो 'यात्रा पार्टी का निजी कार्यक्रम है'
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि वह अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए समान विचारधारा वाले दलों के साथ एक बैठक का इंतजार कर रहे हैं। इसके लिए उन्हें कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के खत्म होने का इंतजार है। कांग्रेस बिहार में नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू की जूनियर पार्टनर है। सबसे बड़ा दल लालू यादव का आरजेडी है। नीतीश ने राहुल की यात्रा को उनकी पार्टी का 'निजी' कार्यक्रम बताया है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि वह लोकसभा चुनाव को देखते हुए राज्य के महागठबंधन में शामिल सभी सात दलों के सहयोग की उम्मीद कर रहे हैं।

नीतीश को भारत जोड़ो यात्रा खत्म होने का इंतजार
बिहार के सीएम ने शुक्रवार को कहा, 'मैं यात्रा के खत्म होने और पार्टियों (बीजेपी विरोधी) की एक बैठक बुलाए जाने का इंतजार कर रहा हूं। उसमें हमलोग लोकसभा चुनावों को लेकर रणनीति बनाएंगे, जो अब ज्यादा दूर नहीं है।' नीतीश की पार्टी ने पिछला लोकसभा चुनाव एनडीए में रहकर ही लड़ा था और पिछले साल अगस्त में अचानक उस गठबंधन से बाहर निकल लिए थे। तब उन्होंने भाजपा पर कथित तौर पर उनकी पार्टी तोड़ने की कोशिश का आरोप लगाया था। जबकि, बीजेपी ने उनपर यह कहकर पलटवार किया कि उन्होंने अपनी राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा के लिए जनादेश के साथ धोखा किया है।

अगर पार्टी कमजोर थी तो आए क्यों- कुशवाहा पर नीतीश
मुख्यमंत्री अबतक इस बात पर कायम हैं कि उनकी पार्टी अपने संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा पर कार्रवाई नहीं करना चाहेगी, जिनके पार्टी के कमजोर होने के दावे को सीएम पहले ही खारिज कर चुके हैं। कुशवाहा के बारे में पूछे जाने पर जदयू नेता ने कहा, 'वह जानते थे कि हमने विधानसभा चुनावों में सिर्फ 43 सीटें जीती हैं। अगर उन्हें चीजें इतनी कमजोर नजर आ रही थीं तो उन्हें वापस नहीं आना चाहिए था। उन्हें याद रखना चाहिए कि मेरे कहने पर ही उनकी पार्टी में वापसी हुई, क्योंकि कई लोग उन्हें वापस लेने के पक्ष में नहीं थे।....'

2020 में बीजेपी की वजह से कम हुई सीट- नीतीश
नीतीश का कहना है कि उनकी पार्टी का जनाधार बढ़ रहा है और 2020 में एमएलए की संख्या कम हुई, उसकी वजह बीजेपी थी। उन्होंने आरोप लगाते हुए दावा किया है, 'हमारी सदस्यता अभियान ने पार्टी का आधार 50 लाख से भी कम से बढ़ाकर 75 लाथ तक पहुंचा दिया है। 2020 में हमारी टैली इसलिए गिरी थी क्योंकि हमारी सहयोगी (बीजेपी) ने तब हमें बिल्कुल ही सपोर्ट नहीं किया था।'

जेडीयू ने कुशवाहा को बहुत कुछ दिया है- नीतीश
जेडीयू ने आरोप लगाया था कि बीजेपी ने पिछले चुनाव में एलजेपी के चिराग पासवान के साथ साजिश रची थी, जिन्होंने नीतीश की पार्टी के उम्मीदवारों के खिलाफ सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे और बीजेपी के बागियों को टिकट दिया था। पार्टी से नाराज नेता को लेकर नीतीश ने यह भी कहा है कि 'कुशवाहा को यह याद रखना चाहिए कि इस पार्टी ने उन्हें बहुत कुछ दिया है। विधानसभा और राज्यसभा में पहले के कार्यकालों में और अभी की विधानपरिषद सदस्यता उन्हें जेडीयू ने ही दिलाई है।' (इनपुट-पीटीआई)












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