Nitish Kumar Security: नीतीश कुमार की सिक्योरिटी पर कितना होता है खर्च? PM मोदी से कम नहीं CM का सुरक्षा कवच
Nitish Kumar Security: बिहार की राजनीति में चुनावी माहौल जैसे-जैसे गरम हो रहा है, वैसे-वैसे नेताओं की सुरक्षा भी चर्चा का बड़ा मुद्दा बन गई है। खासकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सिक्योरिटी पर हमेशा से बहस होती रही है-क्योंकि वे न सिर्फ राज्य के सबसे बड़े नेता हैं, बल्कि बीते 20 साल से बिहार की राजनीति की धुरी बने हुए हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद से उन पर कई बार राजनीतिक विरोधियों और उग्र संगठनों की तरफ से खतरे की आशंका जताई गई है।
खासकर नक्सल प्रभावित इलाकों में सीएम नीतीश की सुरक्षा को लेकर हमेशा अतिरिक्त इंतजाम किए जाते हैं। इसके अलावा, उनकी सरकार में लागू हुई शराबबंदी नीति और कानून-व्यवस्था से जुड़े फैसलों के बाद कुछ समूहों की नाराजगी भी सामने आई थी। ऐसे में उनकी सुरक्षा में किसी भी तरह की चूक बर्दाश्त नहीं की जा सकती। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरह ही सीएम नीतीश का सिक्योरिटी सिस्टम हाईटेक है। आइए जानते हैं कि आखिर नीतीश की सुरक्षा कैसे होती है, इसमें कौन-कौन तैनात रहते हैं और इस पर कितना खर्च आता है।

🔵 नीतीश कुमार की सुरक्षा: 200 कमांडो और तीन परतों वाला 'किला'( Nitish Kumar Security cover)
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार देश के उन नेताओं में से एक हैं, जिन्हें सबसे ऊंचे स्तर की सुरक्षा मिली हुई है। फिलहाल उन्हें Z+ श्रेणी और ASL (Advanced Security Liaison) की सुरक्षा प्राप्त है। इसके अलावा उन्हें बिहार विशेष सुरक्षा बल अधिनियम 2000 के तहत भी सुरक्षा कवर दिया गया है।
नीतीश कुमार की सुरक्षा केवल कुछ गार्ड्स तक सीमित नहीं है। उनकी हिफाजत के लिए करीब 200 ट्रेनिंग प्राप्त कमांडो हमेशा तैयार रहते हैं। यह पूरा दस्ता स्पेशल सिक्योरिटी ग्रुप (SSG) के नाम से जाना जाता है। इसमें पुलिस के साथ-साथ आईटीबीपी, सीआरपीएफ, एनएसजी और एसपीजी जैसे देश के सबसे चुस्त-दुरुस्त बलों के कमांडो शामिल हैं।
इनमें से 36 कमांडो का एक स्पेशल दस्ते को सबसे अहम जिम्मेदारी दी गई है, जो हर वक्त नीतीश कुमार के साथ 'साए' की तरह मौजूद रहते हैं। इसका मतलब है कि उनके चारों तरफ हर समय सैकड़ों सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं। इसमें एनएसजी (National Security Guard) और एसपीजी जैसी ट्रेंड फोर्सेज भी शामिल हैं। सीएम हाउस से लेकर उनके रोड शो और जनसभाओं तक, हर जगह उनका सिक्योरिटी कवच बेहद कड़ा रहता है।
उनकी सिक्योरिटी डिटेल में शामिल होते हैं:
🔹 काफिला सुरक्षा: दर्जनों गाड़ियां, जिनमें बुलेटप्रूफ कार और एस्कॉर्ट वाहन होते हैं।
🔹 स्थानीय पुलिस बल: हर जिले में यात्रा के दौरान जिला पुलिस और एसएसबी (Sashastra Seema Bal) की तैनाती होती है।
🔹 विशेष शाखा (Special Branch): इंटेलिजेंस इनपुट जुटाने और भीड़ को मैनेज करने की जिम्मेदारी।

🔵 नीतीश कुमार का तीन-लेयर सिक्योरिटी कवच
सीएम नीतीश की सुरक्षा का सबसे दिलचस्प पहलू है उनका तीन-लेयर सिक्योरिटी कवच।
🔹 पहली परत - इसमें SSG के कमांडो और DSP रैंक के अधिकारी शामिल होते हैं। ये सबसे नजदीक रहकर नीतीश कुमार को हर खतरे से बचाते हैं।
🔹 दूसरी परत - इसमें स्पेशल ब्रांच के अधिकारी तैनात रहते हैं। इनका काम भीड़ पर पैनी नजर रखना और किसी भी संदिग्ध गतिविधि को तुरंत पकड़ना है।
🔹 तीसरी परत - बाहरी घेरा स्थानीय पुलिस का होता है। ये जवान सीएम के काफिले को सुरक्षित रास्ता देने और रूट क्लियर कराने का काम करते हैं। दिलचस्प बात ये है कि हर जिले की पुलिस सिर्फ अपने इलाके तक ही जिम्मेदारी निभाती है, इसके बाद काफिले के दूसरे जिले में प्रवेश करते ही वहां की पुलिस सुरक्षा संभाल लेती है।

🔵 कितना होता है नीतीश कुमार की सुरक्षा पर खर्च? (Nitish Kumar security cost)
सिक्योरिटी का खर्च सिर्फ गाड़ियों या गार्ड्स की सैलरी तक सीमित नहीं है। इसमें शामिल है, सुरक्षाकर्मियों की ट्रेनिंग और डिप्लॉयमेंट, बुलेटप्रूफ गाड़ियों का रखरखाव, हेलिकॉप्टर मूवमेंट और हवाई यात्रा, डीजल-पेट्रोल, साइबर और इंटेलिजेंस सपोर्ट आदि।
जानकारों के मुताबिक, बिहार सरकार हर साल नीतीश कुमार की सिक्योरिटी पर कई करोड़ रुपये खर्च करती है। अकेले उनके काफिले और सुरक्षाकर्मियों के मूवमेंट पर ही लाखों रुपये रोजाना खर्च हो जाते हैं।
🔵 क्यों खास है नीतीश का सुरक्षा कवर?
इतने बड़े स्तर पर सुरक्षा इंतजाम होना सिर्फ पद की वजह से नहीं है, बल्कि इस वजह से भी कि नीतीश कुमार पिछले दो दशकों से बिहार की राजनीति का सबसे बड़ा चेहरा रहे हैं। उनकी रैलियों, सभाओं और यात्राओं में लाखों की भीड़ जुटती है। ऐसे में उनकी सुरक्षा पर जरा भी चूक भारी पड़ सकती है।

🔵 चुनावी मौसम और सीएम नीतीश के सिक्योरिटी का मसला
बिहार चुनाव 2025 की आहट के साथ ही नेताओं की सुरक्षा पर बहस तेज हो गई है। विपक्ष सवाल उठा रहा है कि करोड़ों रुपये सिर्फ वीआईपी सिक्योरिटी पर खर्च किए जाते हैं, जबकि आम लोगों की सुरक्षा अक्सर खतरे में रहती है। वहीं, सरकार का तर्क है कि मुख्यमंत्री और अन्य बड़े नेताओं की सुरक्षा जरूरी है क्योंकि उनके ऊपर पूरे राज्य की जिम्मेदारी होती है।
चुनावी मौसम में सुरक्षा का मुद्दा राजनीतिक रंग भी ले लेता है। विपक्ष नीतीश कुमार पर आरोप लगाता है कि वे जनता की सुरक्षा से ज्यादा अपनी सुरक्षा पर ध्यान देते हैं। हालांकि नीतीश के समर्थक कहते हैं कि उनकी सुरक्षा में भारी खर्च कोई नई बात नहीं है, बल्कि देश के सभी मुख्यमंत्रियों और राष्ट्रीय स्तर के नेताओं की सिक्योरिटी पर इसी तरह करोड़ों रुपये खर्च होते हैं।












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