क्या ममता और राहुल बन गए पीएम की रेस में रोड़ा, नीतीश कुमार ने क्यों कर दिया सरेंडर?

साल 2024 लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी दलों की सक्रियता तेज हो गई गई लेकिन विपक्षी एकता की हवा निकलती दिख रही है। ऐसे में किसी को बड़ा झटका लगता दिख रहा है तो वह हैं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार।

Nitish Kumar

देश में 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले सियासत उबाल मारने लगी है। विपक्ष की तरफ से प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी को लेकर चर्चा तेज हो गई है। आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर सबसे ज्यादा सक्रिय ममता बनर्जी और राहुल गांधी दिख रहे हैं। हालांकि, कुछ दिन पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विपक्षी एकता बनाने के लिए काफी एक्टिव दिख रहे थे लेकिन इन दिनों वह शांत दिख रहे हैं। एक तरह से से उनके हाव भाव से लग रहा है कि उन्होंने सरेंडर कर दिया हो क्योंकि विधानसभा में तेजस्वी ने तो साफ कह दिया कि न ही वह मुख्यमंत्री बनने जा रहे न ही नीतीश कुमार प्रधानमंत्री बनने जा रहे। आइए समझते हैं कहीं नीतीश कुमार के सरेंडर करने की वजह राहुल और ममता बनर्जी तो नहीं?

राहुल गांधी की सक्रियता
भारत जोड़ो यात्रा के बाद राहुल गांधी जिस तरह से मोदी सरकार पर हमला बोल रहे हैं उससे साफ लग रहा है कि राहुल गांधी कांग्रेस को साइड लाइन होने नहीं देना चाहते। लंदन में राहुल के भाषण के बाद से पूरे देश में उनकी एक छवि बनाने की कोशिश की जा रही है कि प्रधानमंत्री मोदी को टक्कर देने का माद्दा किसी में है तो वह राहुल गांधी में है। सोशल मीडिया पर भी राहुल गांधी को एक मजबूत नेता के रूप में उभारने की कोशिश की जा रही है।

अभी तीन चार महीने में दो उपचुनाव हुए, इसमें दोनों जगहों पर कांग्रेस की ही जीत हुई है। कर्नाटक को लेकर जो रुझान आ रहे हैं वो भी कांग्रेस के पक्ष में ही आ रहे हैं। ऐसे में विपक्ष के लिए पीएम उम्मीदवार के तौर पर राहुल गांधी रोड़ा बन सकते हैं।

ममता बनर्जी का कांग्रेस को हल्के में लेना
ममता बनर्जी जिस तरह से कांग्रेस को लगातार टारगेट कर रही हैं उससे साफ लग रहा है कि वह राहुल गांधी के फेस से खुद को आगे बताना चाहती हों। ममता बनर्जी राहुल गांधी को किसी भी तरह से आगे नहीं आने देना चाहती हैं। कहा जाए तो कहीं न कहीं ममता के मन में भी प्रधानमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा बनी हुई है। ऐसे में नीतीश कुमार की विपक्षी एकता की हवा निकलते दिख रही है। नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू तो उन्हें प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश भी करने लगी थी लेकिन नीतीश कुमार की पार्टी का अस्तित्व उतना बड़ा नहीं है कि वह अकेले या दो-चार गिनी चुनी पार्टी के दम पर प्रधानमंत्री के उम्मीदवार बन जाएं।

तेलंगाना के सीएम केसीआर का अलग मूड
तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव का महाराष्ट्र में रैली करना और केंद्र सरकार को टारगेट करना कुछ अलग ही कह रहा है। वह भी खुद का एक धड़ा तैयार करना चाह रहे हैं ऐसे में कह सकते हैं विपक्ष अभी से ही चार-पांच टुकड़ों में बंट गई है जहां नीतीश कुमार की दाल गलते नजर फिलहाल तो नहीं आ रही है।

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