बिहार: नीतीश की नई सरकार में इस तरह हो सकता है मंत्रिमंडल का गठन, समझिए गणित
बिहार में सत्ता सीटों के समीकरण से ही मुमकिन हो पाया है, एक नज़र डालते हैं किस पार्टी के पास कितने विधायक है। महागठबंधन में राष्ट्रीय जनता दल के पास 79 विधायक हैं।
पटना, 10 अगस्त 2022। बिहार में सियासी घमासान के बाद मुख्यमंत्री की शपथ से पहले ही मंत्रिमंडल के गठन पर चर्चा शुरू हो गई है। सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज़ है कि किस पार्टी से कितने मंत्री बनेंगे। वहीं सूत्रों की मानें तो नीतीश कुमार की नई सरकार में 35 मंत्रियों का एक मजबूत मंत्रिमंडल हो सकता है। वहीं जनता दल यूनाइटेड के खाते से 14 मंत्री बनेंगे। इसके साथ ही राष्ट्रीय जनता दल खाते में 14 मंत्रालय जाने की उम्मीद है। कांग्रेस के खाते से तीन मंत्री और लेफ्ट को भी दो मंत्रालय मिलने की उम्मीद है। हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा के खाते में भी एक मंत्रालय जा सकता है।

164 सीटों के साथ सरकार बनाने की दावेदारी
बिहार में सत्ता सीटों के समीकरण से ही मुमकिन हो पाया है, एक नज़र डालते हैं किस पार्टी के पास कितने विधायक है। महागठबंधन में राष्ट्रीय जनता दल के पास 79 विधायक हैं। वहीं कांग्रेस के पास 19 विधायकों की तादाद है। इसके साथ ही वामदल के पास 16 विधायक हैं। सभी विधायकों को मिलाकर महागठबंधन के पास 114 विधायक हैं। अब जदयू और हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा की बात करें तो दोनों के विधायकों को मिलाकर 49 सीटें हैं। महागठबंधन से नीतीश कुमार के हाथ मिलाने के बाद कुल 163 सीटें हो गईं। वहीं एक निर्दलीय का भी समर्थन मिलने कुल 164 सीटें महागठबंधन के पास हो गई। इसी आधार पर नीतीश कुमार ने इस्तीफ़े की पेशकश करते हुए नई सरकार बनाने की दावेदारी ठोकी।

HAM ने भी दिया नीतीश कुमार का साथ
नीतीश कुमार के इस्तीफ़ा देने से पहले ही कांग्रेस, भाकपा माले, माकपा और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा ने उन्हें समर्थन देने की बात कही थी। एनडीए गठबंधन में सहयोगी दल रहे हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा ने साफ़ कर दिया था कि जदयू हर फ़ैसले में कदम से कदम मिलाकर खड़ी है। वहीं कांग्रेस ने भी बिना किसी शर्त के नीतीश कुमार को समर्थन देने का ऐलान कर दिया था। कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता अजीत शर्मा पर सोमवार को विधायकों की बैठक हुई थी। बैठक में यह फ़ैसला लिया गया कि अगर नीतीश कुमार के महागठबंधन के साथ मिलकर सरकार बनाने की परिस्तिथि हुई तो कांग्रेस बिना शर्त के उनका समर्थन करेगी।

बिहार में एक बार फिर 'नीतीश सरकार'
बिहार में सोमवार को सभी दलों की प्रतिक्रियाओं को देखते हुए सियासी गलियारों में तखता पलट होने की बात सामने आ ही रही थी, और मंगलवार को सत्ता परिवर्तन हो ही गया। जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह और प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा की मीडिया में बयानबाज़ी से संभावनाओं की सियासत को बल मिला ही था। जदयू-भाजपा नेताओं के बीच मतभेद की खबर तो सुर्खिययों में बनी ही रहती थी। यह तो तय माना ही जा रहा था कि नीतीश कुमार एनडीए से किनार कर भाजपा को झटका दे सकते हैं। अब नीतीश कुमार ने भारतीय जनता पार्टी को जोरदार झटका देते हुए महागठबंधन से हाथ मिला कर बिहार के सत्ता की कमान संभालने जा रहे हैं।
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