हिजाब विवाद पर नीतीश कुमार ने पहली बार चुप्पी तोड़ी, बोले- "हमलोगों की नजर में......"
पटना, 14 फरवरी: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कर्नाटक हिजाब विवाद में पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ी है और मामले को ज्यादा तूल नहीं देने की कोशिश की है। उन्होंने कहा है कि बिहार में ये कोई मुद्दा नहीं है और हम सभी धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा है कि अगर क्लासरूम में सिर पर कोई कुछ लगा लेता है तो इसपर कोई टिप्पणी करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने एक कार्यक्रम में मीडिया की ओर से पूछे गए सवाल के जवाब में इस विवाद को बेमतलब बताया है।

'कुछ चीजों पर ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है'
बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने कहा है, 'बिहार के स्कूलों में बच्चे लगभग एक ही तरह का ड्रेस पहनते हैं। ' उन्होंने आगे कहा, "चंदन-उंदन लगा लेता है तो उ सब पर कुछ है....इसलिए हम लोगों की नजर में तो कोई खास बात नहीं है। और बिहार में तो कोई सुनते हैं ई बात....." उन्होंने आगे कहा कि "सबकी इज्जत करते हैं....कुछ लोगों का अपना-अपना तरीका है....तो हमलोग उसमें दखल थोड़े ही देते हैं। कोई मूर्ति लगाना...कोई कुछ करना...अपने-अपने ढंग से पूजा करना। सबका अपना-अपना कर्तव्य है तो इसमें कुछ है.....इसलिए कुछ चीजों पर ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है। "
हिजाब को लेकर कर्नाटक में हो रहा है विवाद
दरअसल, नीतीश का यह बयान इसलिए अहम है कि यह विवाद कर्नाटक में शुरू हुआ है, जहां बीजेपी की सरकार है और जो बिहार की सरकार में शामिल है। कर्नाटक में यह विवाद उडुपी में तब शुरू हुआ जब दिसंबर के अंत में 6 मुस्लिम महिलाएं हिजाब पहनकर एक कॉलेज में पहुंच गईं और दलील देना शुरू कर दिया कि यह उनके धर्म का मामला है। इसके जवाब में हिंदू स्टूडेंट ने भी भगवा गमछा लपेट कर कॉलेज आना शुरू कर दिया। यह विवाद धीरे-धीरे तूल पकड़ने लगा और राज्य के दूसरे हिस्सों में भी फैल गया और इसकी वजह से कुछ जगहों पर तनाव और हिंसा शुरू हो गई।
अभी स्कूल-कॉलेज में धार्मिक प्रतीक पहनने पर है रोक
जब हालात बहुत ज्यादा बिगड़ने लगे तो कर्नाटक सरकार ने 9 फरवरी को हाई स्कूलों और प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेजों में तीन दिनों के लिए छुट्टी घोषित कर दिया, ताकि मामले को शांत किया जा सके। इस दौरान हिजाब पहनने को अपना अधिकार बताते हुए कुछ याचिकाकर्ता कर्नाटक हाई कोर्ट पहुंच गए, जिसने अपने अंतरिम आदेश में सभी छात्र-छात्राओं को क्लासरूम में कोई भी धार्मिक प्रतीक पहनने पर रोक लगा दी। इस दौरान कुछ लोग हिजाब को अपना अधिकार बनाने वाले दलील के साथ सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंच गए और तत्काल सुनवाई की मांग करने लगे। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने साफ कह दिया कि पहले कर्नाटक हाई कोर्ट को सुनवाई करने दीजिए। उधर कर्नाटक हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से आग्रह किया था कि शिक्षण संस्थाओं को खोल दे। इस मामले पर सोमवार को भी हाईकोर्ट में सुनवाई हुई है।












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