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बिहार: नीतीश सरकार के एक फ़रमान ने बढ़ाई सरकारी बाबू की टेंशन, जानिए क्या है पूरा मामला

सरकार द्वारत जारी किए गए नए फ़रमान के मुताबिक अब सड़क की मॉनिटरिंग के लिए सहायक अभियंता और जूनियर इंजीनियर जाएंगे तो अपने साथ अक्षांश और देशांतर भी ले जाएंगे।

पटना, 24 जुलाई 2022। बिहार में अब धीरे-धीरे सरकारी बाबु के लिए भी सख्त दिशा निर्देश जारी किया जा रहा है। इसी कड़ी में बिहार के सहायक अभियंता और जूनियर इंजीनियर के लिए नए नियम बनाए गए हैं। प्रदेश सरकार ने नया फरमान में मॉनिटरिंग की नई व्यवस्था को पूरी तरह से हाइटेक कर दिया गया है। पथ निर्माण विभाग की तरफ से सड़कों के रख रखाव की मॉनिटरिंग को आईटी आधारित कर दिया है।

सरकारी बाबू की बढ़ी टेंशन

सरकारी बाबू की बढ़ी टेंशन

फील्ड में तैनात सहायक अभियंता को नयी व्यवस्था के तहत हर चौदह दिन पर अपने इलाके में बन रही सड़कों की तस्वीरें मॉनिटरिंग सेल भेजनी होगी वहीं जूनियर इंजीनियर को हर सात दिन पर हेड ऑफिस के मानीटरिंग सेल को भेजनी होगी। अगर तस्वीर समय पर नहीं भेजी गई तो उनपर सख्त कार्रवाई होगी। गौरतलब है की अब अक्षांश और देशांतर के साथ तस्वीर लेना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे पहले सड़क की तस्वीर मांगी जाती थी तो अभियंताओं एक साथ कई तस्वीर भेज दिया करते थे। मुख्यालय के मॉनिटरिंग सेल को कई तस्वीरें एक साथ मिलने की वजह से वहां मौजूद कर्मी तय नहीं कर पाते थे कि तस्वीर कब ली गयी है।

मॉनिटरिंग सेल को हर हफ्ते भेजनी होगी तस्वीर

मॉनिटरिंग सेल को हर हफ्ते भेजनी होगी तस्वीर

सरकार द्वारत जारी किए गए नए फ़रमान के मुताबिक अब सड़क की मॉनिटरिंग के लिए सहायक अभियंता और जूनियर इंजीनियर जाएंगे तो अपने साथ अक्षांश और देशांतर भी ले जाएंगे। इतना ही नहीं अक्षांश और देशांतर के साथ तस्वीर लेकर हेड ऑफिस को भेजनी होगी। इससे तारीख के साथ रिकॉर्ड रह पाएगा की संबंधित इलाके की सड़क की हालत कैसी है? वक्त पर सड़क की मरम्मत हुई या नहीं हुई सबकी जानकारी आसानी से मिल पाएगी। अक्षांश और देशांतर के साथ सड़क की तस्वीर लेने से यह फ़ायदा होगा कि खराब सड़क की स्थिति साफ़ पता चल जाएगी।

निर्माण एजेंसियों के काम में बदलाव नहीं

निर्माण एजेंसियों के काम में बदलाव नहीं

दोबारा उस लोकेशन की तस्वीर आयेगी तो यह पता चल पाएगा कि वहां के सड़क की मरम्मत संबंधित कम्पनी ने की या नहीं। इसके साथ ही निर्माण कंपनी पर भी की कार्यों की भी मॉनिटरिंग हो पाएगी। अगर किसी एक जगह सड़क लगातार खराब मिलने पर एक्सर्ट भेजकर जांच की जाएगी कि वहां किस तरह की गड़बड़ी है। वहीं पथ निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बाताया कि निर्माण एजेंसियों को रोड मेंटेनेंस पालिसी के तहत को जो काम दिया गया था उसमें किसी भी तरह के बदलाव नहीं हुए हैं। सिर्फ मॉनिटरिंग सेल को आधुनिक बना दिया गया है।

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