अब नेपाल ने मोतिहारी के इस क्षेत्र पर जताया अपना दावा, तटबंध निर्माण कार्य रुकवाया
मोतिहारी। पड़ोसी देश चीन के साथ तनातनी के बीच नेपाल ने फिर एक बार भारत के सीमावर्ती पूर्वी चंपारण जिले के एक हिस्से पर दावा किया है। नेपाल ने मोतिहारी के ढाका ब्लॉक में नदी पर बन रहे तटबंध को मजबूत बनाने के लिए हो रहे निर्माण को यह कहते हुए जबर्दस्ती रुकवा दिया है कि इसका कुछ हिस्सा उसके क्षेत्राधिकार में आ रहा है। यह तटबंध लाल बकिया नदी पर बनाया जा रहा है। इस तटबंध का निर्माण प्रदेश के जल संसाधन विभाग ने बहुत साल पहले किया था और मानसून से पहले हर साल इसका सुदृढीकरण किया जाता है।

इस साल भी मानूसन को देखते हुए लाल बकिया नदी के तटबंध पर निर्माण का काम चल रहा था। यह तटबंध मोतिहारी जिला मुख्यायालय से 45 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर है। नेपाल का कहना है कि इसका कुछ हिस्सा उस जमीन पर है जो उसके अधिकार क्षेत्र में है। नेपाल के अफसरों ने तटबंध के उत्तरी छोर पर निर्माण कार्य को रुकवा दिया है।

डीएम शीर्षत कपिल अशोक ने इस बारे में बताया है कि नेपाल जिस क्षेत्र पर दावा कर रहा है उसके बारे में उन्होंने जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया और बिहार सरकार को अवगत कराकर विवाद को सुलझाने का अनुरोध किया है ताकि तटबंध का सुदृढीकरण हो सके। डीएम ने कहा कि नेपाली अधिकारियों ने तटबंध के आखिरी हिस्से के निर्माण पर आपत्ति की थी जो कि सीमा के अंतिम बिंदु के पास है। इसके बाद उन्होंने नेपाल के रौतहट के अधिकारियों के साथ बातचीत भी की थी।
इसी सप्ताह नेपाल ने संसद में एक ऐसे विवादित नक्शे को मंजूरी दी है जिसमें उत्तराखंड के लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा पर दावा जताते हुए उसे राजनीतिक मानचित्र में अपने क्षेत्राधिकार में दिखाया है। ऐसा करते हुए नेपाल ने भारत की आपत्तियों को दरकिनार कर दिया। भारत के तीन क्षेत्रों पर इस दावे के बाद दोनों देशों के संबंध में तनाव चल रहा है।












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