Bihar News: नीम के पत्ते का टेस्ट कड़वा और मीठा, अलग-अलग स्वाद की ग्रामीणों ने बताई वजह
Bihar Sharif Village: नीम के पेड़ का पत्ता कड़वा होता है, यह बात ज्यादातर लोग जानते हैं, लेकिन नालंदा ज़िले के एक गांव में नीम पेड़ के पत्ते का स्वाद मीठा है। ग्रामीणों ने बताई कि आखिर वजह क्या है?

Village In Bihar: दुनिया भर में दूसरे सबसे बड़े बुज़ुर्ग के तौर पर ख्वाजा मोईन उद्दीन चिश्ती रहमतुल्ला (अजमेश शरीफ़) को लोग मानते हैं। बिहार के नालंदा जिले में उनके उस्ताद हजरत उस्मान हारून चिश्ती रहमतुल्ला का मज़ार है। इस मज़ार के पास बड़ा सा नीम का पेड़ है।
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ग्रामीणों का दावा है कि पेड़ के पत्ते का कड़वा और मीठा दोनो स्वाद है। ग्रामीणों का मानना है कि मज़ार की तरफ झुकी टहनी के पत्ते मीठे हैं, जबकी बाकी और टहनी के पत्ते कड़वे हैं। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि पेड़ के बगल में एक कुआं भी है।
कुएं का पानीं बहुत ही ज्यादा नमकीन है, उस पानी को पीने से पेट के दर्द से निजात मिलता है। मस्जिद में जगह कम होने की वजह से कुआं को ढक दिया गया है। कुएं के बगल में एक बोरिंग और दो चापाकल है, उसका पानी भी मीठा है। पीने के लिए लोग उस पानी का इस्तेमाल करते हैं।
हर साल उर्स के मौके पर यहां मेला भी लगता है। इस मेले में बंगाल,झारखंड, यूपी,उड़ीसा और दिल्ली समेत अन्य प्रदेशों से लोग मत्था टेकने आते हैं। शनिवार को दोपहर की नमाज़ के बाद पूजा और असर की नमाज़ के बाद लंगर और मगरिब की नमाज़ के बाद चादरपोशी के साथ उर्स की शुरुआत होती है।
यहां के गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल लोग अन्य प्रदेशों में भी देते हैं। स्थानीय लोगों की मानें तो हर साल उर्दू की 14वीं और 15वीं तारीख को मजार पर उर्स का आयोजन होता आया है। इस मज़ार पर हिंदू समुदाय लोगों की आस्था काफी है।
स्थानीय लोग बताते हैं कि हिन्दू समुदाय के लोग मज़ार पर मन्नत मांगने के साथ, अपनी श्रद्धा के फूल भी चढ़ाते हैं। ग़ौरतलब है कि यहां मुस्लिम समुदाय से ज्यादा दूसरे सुमाय के लोग आते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि बाबा की करिश्माई ताकत को कोई काट नहीं सकता।
ग्रामीणों का कहना है कि उनकी बुजुर्गी का एतराफ का यहा जीता जागता उदाहरण है कि मज़ार के सिरहाने में सदियों पुराने नीम का पेड़ है। चारों तरफ़ पेड़ की टहनियां फैली हैं, मज़ार की तरफ झुके पत्ते मीठे हैं, जबकि दूसरी तरफ के पत्ते कड़वे हैं। उनका मानना है कि बाबा की करिश्माई ताक़त की वजह से ही ऐसा है। नहीं तो नीम के पत्ते तो कड़वे ही होते हैं।












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