बिहार: अचानक नज़र आई डैम में डूबी 120 साल पुरानी मस्जिद, 1984 में हुआ था डैम का निर्माण
नवादा में तीन दशक पुरानी मस्जिद पानी में डूबी मस्जिद मिलने के बाद लोग अचंभित हो रहे हैं। स्थानीय बुजुर्गों की मानें तो चंदोली गांव के पास एक मस्जिद थी। रजौली प्रखंड मुख्यालय (नवादा) से 5 किलोमीटर की दूरी पर फुलवरिया...
नवादा, 7 सितंबर 2022। बिहार में कई ऐतिहासिक स्थल है जो कि अभी अनसुलझी पहेली है। जैसे की राजगीर की गुफा में रहस्यमयी दरवाज़ा का रहस्य आज भी अनसुलझा है। इतिहासकार की मानें गुफा के अंदर स्वर्ण भंडार है, दरवाजा खुलने से बिहार समेत पूरे देश की क़िस्मत बदल जाएगी। हर्यक वंश के स्थापक बिम्बिसार के स्वर्ण भंडार को गुफा में ही रखा गया था। इस रहस्यमयी गुफा के बाद अब नवादा में डैम में डूबी 120 साल पुरानी मस्जिद चर्चा का विषय बनी हुई है। दूर-दूर से लोग दीदार करने पहुंच रहे हैं लेकिन पानी और दल-दल ज़मीन की वजह से नजदीक जाने से परहेज़ कर रहे हैं।
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30 साल पहले पानी में डूब गई थी मस्जिद
नवादा में तीन दशक पुरानी मस्जिद पानी में डूबी मस्जिद मिलने के बाद लोग अचंभित हो रहे हैं। स्थानीय बुजुर्गों की मानें तो चंदोली गांव के पास एक मस्जिद थी। रजौली प्रखंड मुख्यालय (नवादा) से 5 किलोमीटर की दूरी पर फुलवरिया डैम के पास में यह मस्जिद थी। 3 दशक पानी में डूबे रहने के बाद भी मस्जिद पूरी तरह से सुरक्षित है, इसे कुछ भी नुक्सान नहीं हुआ है। ग्रामीणों को जब पानी में डूबी मस्जिद दिखने की खबर मिली तो दूर-दूर से लोग इसे देखने के लिए पहुंच रहे हैं।

डैम किनारे पहुंच कर लोग कर रहे दीदार
पानी में डूबी मस्जिद दिखने की खबर आग के तरह तरह फैल गई। दूसरे इलाकों के लोगों के साथ ही इन्य जिलों के लोग भी मस्जिद देखने पहुंच रहे है। मुस्लिम समुदाय के साथ-साथ अन्य समुदाय के लोग भी डैम किनारे पहुंच कर मस्जिद का दीदार कर रहे हैं। वहीं कई युवा तो मस्जिद को नजदीक से देखने के लिए दल-दल जमीन और पानी में घुसने के लिए भी तैयार हैं लेकिन सुरक्षा के मद्देनज़र उन्हें दल-दल में जाने से रोका जा रहा है।

120 साल पुरानी है मस्जिद
बुजुर्गों की मानें तो यह मस्जिद 120 साल पुरानी है। 30 साल पहले यह मस्जिद पूरी तरह से पानी में डूब गई थी। 1984 में फुलवरिया डैम का निर्माण किया गया था। इससे पहले वहां पर मुस्लिम समुदाय की बड़ी आबादी बसती थी। सरकार द्वारा ज़मीन अधिग्रहण कर डैम का निर्माण करवाया गया था। डैम निर्माण की वजह से वहां बसे लोगों को डैम के बहल वाले गांव में शिफ्ट करवा दिया गया था और मस्जिद को उसी जगह पर रहने दिया गया था। पानी भरने की वजह मस्जिद का सिर्फ़ गुम्बद नज़र आता था । अब पानी घटने की वजह से पूरी मस्जिद दिख रही है।
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