पूरी दुनिया के लिए रहस्य बना 'बरमूडा ट्रायंगल' बिहार के चार छात्र समझा देंगे!
मुजफ्फरपुर जिले के रहने वाले 4 छात्रों के बनाए गए डिवाइस से इस रहस्य का पर्दा उठाने वाला है। इस जानलेवा रहस्य से पर्दा उठाने के लिए एक डिवाइस से काम हो जाएगा।
पटना। जिस रहस्य को जानने के लिए पूरी दुनिया बेताब है और हर साल इसकी चपेट में आने से हजारों लोगों की मौत हो जाती है, उस रहस्य से पर्दा उठाने के लिए वैज्ञानिक अब भी शोध कर रहे हैं। इसी रहस्य से पर्दा उठाने का दावा बिहार के 4 छात्रों ने किया है। इस दावे से अब ये स्पष्ट हो जाएगा कि आखिरकार अटलांटिक महासागर के बरमूडा ट्रायंगल का क्या रहस्य है, इसकी चपेट में आने से कैसे हजारों लोगों की मौत हो जाती है? इस रहस्य का पर्दाफाश करने के लिए बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के 4 छात्रों ने अपनी लगन और जिज्ञासा के जरिए ये दावा किया है कि हमारे बनाए गए डिवाइस के जरिए ये पता लग जाएगा कि आखिरकार कैसे इतना बड़ा हादसा हर साल होता है। आइए जानते हैं उनके और डिवाइस बारे में...

चार छात्रों का है दावा
आपको बता दें कि देश के वैज्ञानिकों ने सालों से रिसर्च किया है, इस रहस्य के बारे में अब तक कुछ भी पता नहीं चला लेकिन बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के रहने वाले 4 छात्रों के बनाए गए डिवाइस से इस रहस्य का पर्दा उठाने वाला है। मुजफ्फरपुर जिले के रहने वाले 4 छात्र आर्यन, कुशाग्र, सत्यम और विश्वजीत पिछले 2 सालों से लगातार कोशिश कर रहे हैं और बरमूडा ट्रैंगल के जानलेवा रहस्य से पर्दा उठाने के लिए एक डिवाइस भी बनाया है। जिसके जरिए वो समुद्र के अंदर की तस्वीर बाहर देख सकते हैं।

ये दे रहे हैं रहस्य पर तर्क
मुजफ्फरपुर जिले के डीएवी स्कूल में पढ़ने वाले इन छात्रों ने उचित चुंबकीय क्षमता वाले बरमूडा ट्रायंगल के भीतर जाने वाले डिवाइस को तैयार किया है। ये डिवाइस समुद्र के भीतर जाकर वहां की तस्वीर बाहर लाएगी। इस डिवाइस के समुद्र के भीतर जाते ही डिवाइस को इलेक्ट्रो मैग्नेट तकनीक से बाहर लाने का खाका तैयार किया गया है। वहीं मुजफ्फरपुर के छात्रों के अपने रिसर्च में ये दावा किया गया है कि हमारे बनाए गए डिवाइस बरमूडा ट्रायंगल के भीतर की दुर्लभ तस्वीर बाहर लाएगी। जिसकी मदद से इस के रहस्य से बहुत जल्द पर्दा उठ जाएगा और हर साल इसके शिकार होने वाले हजार लोगों को मरने से बचाया जा सकता है।

अब आजमाकर देखा जाएगा
इन छात्रों के इस रिसर्च को लेकर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और उपराष्ट्रपति की भी प्रशंसा मिल चुकी है। वहीं हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय से इन छात्रों को रिसर्च करने का मौका भी दिया गया है जहां वो गोवा स्थित नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ ओसियेनोग्राफी में जल्द ही इसे आजमाकर देखेंगे। अब अगर छात्रों का किया गया ये दावा अगर सफल रहा तो पूरी दुनिया के सामने बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के रहने वाले इन छात्रों ने एक मिसाल पेश की जाएगा। दूसरी तरफ इन छात्रों का दावा है कि अगर इस फॉर्मूला को गोवा मीट में हरी झंडी मिल जाती है तो भारत पाकिस्तान की सीमा से जारी आतंकवाद को रोकने के लिए भी आर्टिफीशियल बरमूडा ट्रायंगल का सैंपल बनाकर काम किया जा सकेगा।

चुंबक को समझा ऐसे कि अब दुनिया को समझाएंगे
वहीं उन सभी छात्रों के बारे में स्कूल के प्रिंसिपल का कहना है कि शुरू से ही ये लोग साइंस की पढ़ाई में काफी उत्तेजित थे और मैगनेट चैप्टर की पढ़ाई के दौरान इन लोगों ने रिसर्च करने की ठानी थी। अब पीएमओ कार्यालय से इसके रिसर्च की बात कहे जाने के बाद उनके हौसले और बढ़ने लगे हैं वहीं छात्र अब अपने डिवाइस को गोवा में प्रमाणित करने का इंतजार कर रहे हैं ताकि उनके इस डिवाइस और फॉर्मूले पर दुनिया की मुहर लग सके।












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