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Mushroom Farming से बदल गई महिला की जिंदगी, आप भी कर सकते हैं लाखों की कमाई

Mushroom Farming:पुष्पा झा को पहले मशरूम की खेती के बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं थी। इसलिए उन्होंने पूसा विश्वविद्यालय (समस्तीपुर) से मशरूम की खेती की ट्रेनिंग हासिल की। ट्रेनिंग लेने के बाद उन्होंने अपने पति रमेश की...

Mushroom Farming: हिंदुस्तान की लगभग 70 फीसद इकॉनॉमी खेती पर ही निर्भर करती है। यही वजह है कि भारत को कृषि प्रधान देशों में शुमार किया जाता है। इसके बावजूद देश में किसान खुशहाल नहीं है, वहीं कुछ ऐसे किसान भी हैं जो खुद तो कामयाब हो ही रहे हैं। अपने साथ-साथ दूसरों को भी आत्मनिर्भर बना रहे हैं। इसी क्रम में आज हम आपको दरभंगा जिले की रहने वाली पुष्पा झा की कहानी से रूबरू करवाने जा रहे हैं। उन्होंने मशरूम की खेती से ना सिर्फ अपनी अलग पहचान बनाई है, बल्कि हज़ारों लोगों को मशरूम की खेती का ट्रेनिंग देकर आत्मनिर्भर भी बनाया है।

बिहार में मशरूम की खेती

बिहार में मशरूम की खेती

भारत कृषि प्रधान देश है लेकिन फिर भी ज्यादातर किसान खुशहाल नहीं हैं। इसके पीछे की वजह पर बहुत कम लोग गौर करते हैं। वहीं जिन्होंने खुशहाल क्यों नहीं हैं कि वजहों पर काम किया वह कामयाबी की बुलंदियों को छू रहे हैं। हिंदुस्तान में ज्यादातर किसान के खुशहाल नहीं होने की सबसे बड़ी वजह है कि, वह वक्त के साथ अपनी खेती की तकनीक को नहीं बदल रहे हैं। वहीं कुछ किसान ऐसे भी हैं जो मॉडर्न खेती की ट्रेनिंग लेकर कामयाबी के नए आयाम लिख रहे हैं। बिहार में अगर मशरूम की खेती का ज़िक्र होता है तो पुष्पा झा के नाम का ज़िक्र ज़रूर होता है। इसकी वजह यही है कि उन्होंने मॉडर्न तकनीक से मशरूम की खेती कर खुद की अलग पहचान बनाई है।

12 साल से कर रही हैं मशरूम की खेती

12 साल से कर रही हैं मशरूम की खेती

बिहार में मशरूम की खेती कर सुर्खियों में आई पुष्पा झा खुद तो खेती कर ही रही हैं। इसके साथ ही दूसरी महिलाओं को भी इसकी ट्रेनिंग दे रही हैं। हज़ारों किसानों को उन्होंने मशरूम की खेती का प्रशिक्षण देकर कामयाब खेती करने का हुनर दिया है। साल 2010 से वह बिहार की महिलाओं को मशरूम की खेती का प्रशिक्षण देती आ रही हैं। 12 सालों से मशरूम की खेती कर रही पुष्पा झा आज महिलाओं के लिए मिसाल बन चुकी हैं।

पूसा विश्वविद्यालय समस्तीपुर से ली ट्रेनिंग

पूसा विश्वविद्यालय समस्तीपुर से ली ट्रेनिंग

पुष्पा झा को पहले मशरूम की खेती के बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं थी। इसलिए उन्होंने पूसा विश्वविद्यालय (समस्तीपुर) से मशरूम की खेती की ट्रेनिंग हासिल की। ट्रेनिंग लेने के बाद उन्होंने अपने पति रमेश की मदद से मशरूम की खेती की शुरुआत की। मशरूम की खेती के पहले प्रयोग से ही उन्हें पॉजिटिव रिज़ल्ट मिला। इसके बाद पुष्पा लगातार मशरूम की खेती में नए-नए प्रयोग करने लगी और कामयाबी की बुलंदियों को छूती चली गईं।

10 लाख रुपये तक का हो सकता है मुनाफा

10 लाख रुपये तक का हो सकता है मुनाफा

पुष्पा झा के पति रमेश पेशे से शिक्षक हैं लेकिन वह अपनी पत्नी की खेती में हर मुमकिन मदद करते हैं। वहीं पुष्पा अपने पड़ोसियों के साथ जिले के बाहर की महिलाओं को भी मशरूम की खेती के लिए प्रेरित करने लगी। उनकी कामयाबी को देखते हुए दूसरे किसान भी अब मशरूम की खेती कर काफी मुनाफा कमा रहे हैं। आपको बता दें कि पुष्पा झा 1 दिन में करीब 15 किलो मशरूम की उगाती है। रोज़ाना उन्हें 1500 रुपये तक इनकम हो जाता है। मशरूम की कीमत बाज़ार में 150 से लेकर 300 तक होती है। इस तरह मशरूम की खेती से आप भी सालाना 10 लाख रुपये तक का मुनाफा कर सकते हैं।

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