Bihar Municipal Elections:चुनाव स्थगित होने से प्रत्याशियों में मायूसी, कहा- क्या पहले नहीं था आरक्षण मुद्दा ?
Bihar Municipal Electionsस्थगित होने के बाद से प्रत्याशियों में मायूसी छाई हुई है। उनका कहना है कि नगर निकाय चुनाव स्थगित होने से सारे मेहनत पर पानी फिर गया है। चुनाव के मद्देनज़र सारी तैयारिया कर ली गईं थी लेकिन चुनाव..
Bihar Municipal Elections स्थगित होने के बाद से प्रत्याशियों में मायूसी छाई हुई है। उनका कहना है कि नगर निकाय चुनाव स्थगित होने से सारे मेहनत पर पानी फिर गया है। चुनाव के मद्देनज़र सारी तैयारिया कर ली गईं थी लेकिन चुनाव होने से कुछ दिन पहले ही स्थागित करने से सभी प्रत्याशियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। वन इंडिया हिंदी ने पूर्णिया नगर निगम उप मुख्य पार्षद कनीज़ फातमा से इस बाबत बात की। उन्होंने बताया कि इस तरह से अचानक चुनाव स्थगित करना किसी भी ऐतबार से सही नहीं था।

चुनाव स्थगित होने से विकास हुआ बाधित- कनीज
कनीज़ फातमा ने कहा कि नगर निकाय चुनाव की तारीख तय हो चुकी थी, सभी प्रत्याशी अपने-अपने क्षेत्र में जनसंपर्क कर चुनाव की तैयारी कर रहे थे। जनता से उनके मुद्दे और परेशानियों पर बात कर रहे थे। जनसंपर्क के दौरान कई क्षेत्रों में विकास का जायजा लेने पर पता चला कि फंड तो जारी होता रहा लेकिन विकास नहीं हुआ । नगर निकाय चुनाव होने से थोड़ी मायूसी ज़रूर है लेकिन इससे ज्यादा अफसोस है कि विकासी बाधित हो गया है। चुनाव संपन्न हो जाने से जनता द्वारा उठाए गए मुद्दे पर नए लोग काम करते । जो भी जीत कर आता वह कुछ न कुछ बदलाव तो ज़रूर करता।

जनता की सेवा के लिए समर्पित हूं- कनीज
नगर निकाय चुनाव में आरक्षण को मुद्दा बनाकर स्थगित करने पर कनीज़ फातमा ने कहा कि क्या इससे पहले आरक्षण मुद्दा नहीं था। आरक्षण हमेशा मुद्दा रहा है लेकिन कभी भी नियम को ताक पर रखा जाता है। उन्होंने कहा कि कोर्ट के फ़ैसले से कोई आपत्ति नहीं है लेकिन अगर आरक्षण का मुद्दा था, तो चुनाव नोटिफिकेशन जारी होने से पहले इन मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए था। चुनाव की तारीख तय होने के बाद कोर्ट का फ़ैसला आया, इससे प्रत्याशियों में मायूसी ज़रूर है। हर रात के बाद सवेरा आता है, जनता की सेवा के लिए समर्पित हूं, आगे भी समर्पित रहूंगी।

पटना हाईकोर्ट के फ़ैसले से टला चुनाव
पटना हाइकोर्ट ने बिहार में होने वाले नगर निकाय चुनाव में आरक्षण के खिलाफ दायर याचिक पर फ़ैसला सुनाया है। उच्च न्यायालय नें फ़ैसला सुनाते हुए कहा कि नगर निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षित सीटों को सामान्य में अधिसूचित कर चुनाव कराए जाएंगे। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि निर्वाचन आयोग अगर चुनावी की तारीख आगे बढ़ाना चाहती है तो बढ़ा सकती है। चीफ जस्टिस संजय करोल और एस. कुमार की बेंच ने पटना हाईकोर्ट में यह फैसला सुनाया है।आपको बता दें कि 10 अक्टूबर को पहले चरण के मतदान की तारीख तय की थी। इसके साथ ही 12 अक्टूबर को मतगणना होनी थी।वहीं 20 अक्टूबर को दूसरे चरण की वोटिंग होनी थी। इसके साथ ही 22 अक्टूबर को मतगणना की तारीख तय की गई थी।

'राज्य सरकार ने की SC के आदेशों की अनेदखी'
सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट को आरक्षण से जुड़े मामले में जल्द सुनवाई कर फैसला देने की बात कही थी। 29 सितंबर को पटना हाईकोर्ट ने आरक्षण रोस्टर पर दाखिल याचिका पर सुनवाई पूरी कर ली थी। हाईकोर्ट ने नगर निकाय चुनाव मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि चुनाव के मद्देनज़र सुप्रीम कोर्ट के आदेशों राज्य सरकार ने अमल नहीं किया । सुप्रील कोर्ट के फैसले की अनेदखी करते हुए प्रदेश सरकार ने बिना ट्रिपल टेस्ट के ही ओबीसी आरक्षण दे दिया। सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक आरक्षण देने से पहले राजनीति पिछड़ेपन वाली जातियों की निशानदेही की जानी थी लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
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