Bihar News: शादी समारोह में हो रहा था जश्न, मटकोर की रस्म के बीच पहुंची JCB, किया ऐसा काम देखते रह गए लोग
Bihar News: बिहार में शादी की रस्मों में एक अलग ही आकर्षण होता है, जिसमें अक्सर अनोखे रीति-रिवाज और नए-नए तरीके अपनाए जाते हैं। रामनगर ब्लॉक (पश्चिम चम्पारण ) के पकड़ी गांव में पारंपरिक कथा मटकोर की रस्म में एक अनोखा मोड़ जोड़ा गया।
कुदाल के बजाय जेसीबी मशीन का इस्तेमाल कर रस्म पूरी की गई। इस आयोजन ने लोगों का ध्यान खींचा क्योंकि यह उस परंपरा से अलग था, जिसमें आमतौर पर महिलाएं और दूल्हे का परिवार कुदाल का इस्तेमाल किया जाता है। जेसीबी मशीन के इर्द-गिर्द इकट्ठी हुईं दर्जनों महिलाओं ने नाच गाने के साथ माहौल को और भी खुशनुमा बना दिया।

JCB का क्यों किया इस्तेमाल: दूल्हे मनीष सिंह ने कहा कि कुदाल की जगह जेसीबी का इस्तेमाल करना सामाजिक बदलाव का प्रतीक है। उनका मानना है कि परंपराएं महत्वपूर्ण हैं, लेकिन समय के साथ खुद को ढालना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। स्थानीय लोगों ने बताया कि मटकोर को हाथ से नहीं, बल्कि मशीनों से किया गया, यह उनका पहला अनुभव था।
सोशल मीडिया चर्चा: इस अपरंपरागत तरीके ने सोशल मीडिया पर तेज़ी से लोकप्रियता हासिल की। जेसीबी की मदद से किए गए अनुष्ठान का वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिस पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। हालाँकि बिहार में इस तरह के नवाचार नए नहीं हैं, लेकिन जब ये विशेष अवसरों पर किए जाते हैं तो सुर्खियां ज़रूर बनती हैं।
मटकोर रस्म क्या है: ज्योतिषी डॉ. शत्रुघ्न द्विवेदी ने बताया कि मटकोर पारंपरिक रूप से शादी से एक दिन पहले आयोजित किया जाता है। इसमें दूल्हे का परिवार एक खास जगह से मिट्टी खोदता है। फिर लड़के की मां हल्दी की रस्म के दौरान कलश के पास इस्तेमाल के लिए इस मिट्टी को अपने पल्लू में लेकर घर जाती है।
परंपरा और आधुनिकता का मिलन: हालांकि कई स्थानीय लोगों के लिए यह पहली बार था कि वे पारंपरिक औजारों के बजाय जेसीबी से मटकोर करते हुए देखा। पकड़ी गांव में यह आयोजन इस आयोजन पर लोगों का कहना है कि परंपराएं समाज की रीढ़ हैं, वहीं परिवर्तन को अपनाने से सुखद अनुभव भी प्राप्त हो सकते हैं।
जेसीबी के इर्द-गिर्द संगीत और नृत्य द्वारा निर्मित रंगीन माहौल ने शादी समारोह में अलग ही तड़का जोड़ दिया है, लेकिन यह इस बात पर प्रकाश डालता है कि कैसे आधुनिक तरीके सदियों पुराने रीति-रिवाजों के साथ धुमिल सकते हैं। इस तरह के आयोजन न केवल मनोरंजन करते हैं बल्कि विकसित होती सांस्कृतिक प्रथाओं को भी दर्शाते हैं।












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