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Bihar News: ‘2.5 महीने पहले बनी कंपनी,NGO के नाम पर मिले 25 करोड़’, उठे कई सवाल, विपक्ष ने सरकार को घेरा

Bihar News: बिहार विधानसभा में 3 मार्च को हाल ही में पेश किए गए बजट के बाद एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। विभिन्न क्षेत्रों में विकास की चर्चाओं के बीच, धन आवंटन से जुड़े एक बड़े घोटाले के आरोप सामने आए हैं, जिस पर चर्चाओं का बाज़ार गर्म हो चुका है।

विवाद का केंद्र एक प्रमुख सरकारी अधिकारी की बेटी से जुड़े एक एनजीओ को वित्तीय आवंटन है। ईशा वर्मा ने बोधि सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट एनजीओ की स्थापना की थी, जो एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और बिहार के मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार की बेटी हैं।

NGO Bihar

नव स्थापित होने के बावजूद, इस एनजीओ को हाल ही में घोषित बिहार ग्रीन डेवलपमेंट फंड से 25 करोड़ रुपये की बड़ी राशि प्राप्त करने के लिए चुना गया था। इस निर्णय ने पर्यावरण क्षेत्र में अधिक स्थापित संगठनों की तुलना में वर्मा के एनजीओ को चुनने के लिए इस्तेमाल किए गए मानदंडों पर बहस और संदेह को जन्म दिया है।

विपक्षी नेताओं का तर्क है कि ग्रीन फंड का तेजी से गठन और पारदर्शी चयन प्रक्रिया के बिना ही ईशा वर्मा के एनजीओ को 25 करोड़ रुपये का आवंटन संभावित हितों के टकराव और सरकारी पदों का दुरुपयोग है। सार्वजनिक निविदा या अन्य एनजीओ से आवेदन आमंत्रित नहीं किया गया, जो कि भाई-भतीजावाद और सरकारी खर्च में जवाबदेही की कमी है।

विपक्ष के नेता राजद सांसद और बिहार सरकार में पूर्व मंत्री सुधाकर सिंह ने इस कदम की मुखर आलोचना की है। उन्होंने संसद में इस मुद्दे को उठाने और सीएजी तथा भारत के महालेखाकार से जांच कराने की मांग की है। उन्होंने एक पत्र सार्वजनिक किया है, जिसमें कई गंभीर आरोप लगाए गये हैं।

राजद के लोकसभा सांसद सुधाकर सिंह ने बिहार के राज्यपाल को चिट्ठी लिखी है। उन्होंने दावा किया है कि बजट में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रधान सचिव दीपक कुमार की बेटी की कंपनी को करोड़ों रूपये का काम दिया गया। इतना ही नहीं बजट को लेकर दीपक कुमार की बेटी को पूरी जानकारी थी।

सरकारी प्रावधानों का उल्लंघन करके वित्त विभाग के द्वारा आयोजित गोपनीय बैठकों में शामिल किया गया और गोपनीय सूचना साझा किया। उन्होंने कहा कि यह जानकर हैरानी होगी कि इस साल के बिहार बजट में 25 करोड़ रुपए का बिहार ग्रीन डेवलपमेंट फंड की घोषणा हुई है।

सीधे तौर पर यह बोधी सेंटर फॉर सस्टेनेबल ग्रोथ प्राइवेट लिमिटेड नाम की एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को लाभ पहुंचाने की नियत से किया गया है। बोधी सेंटर फॉर सस्टेनेबल ग्रोथ प्राइवेट लिमिटेड की मालिक ईशा वर्मा है जो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रधान सचिव दीपक कुमार की बेटी हैं। इस कंपनी का गठन मात्र 2.5 महीने पहले 17/12/2024 को दिल्ली में किया गया था।

लोकसभा सांसद सुधाकर ने कहा कि बिहार विधानसभा में वित्त मंत्री सम्राट चौधरी जिस समय बजट में 25 करोड़ रुपए के बिहार ग्रीन डेवलपमेंट फंड की घोषणा कर रहे थे ठीक उसी समय बोधी सेंटर फॉर सस्टेनेबल ग्रोथ प्राइवेट लिमिटेड अपने LinkdIn सोशल मीडिया अकाउंट से इस घोषणा का स्वागत करते हुए विस्तृत लेख पोस्ट करती है।

इससे साफ जाहिर है कि बजट के विवरण की जानकारी सार्वजनिक घोषणा के पहले ही बोधी सेंटर फॉर सस्टेनेबल ग्रोथ प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को उपलब्ध कराई गई थी। उन्होंने कहा कि सिर्फ बजट सम्बंधित जानकारी बोधी सेंटर फॉर सस्टेनेबल ग्रोथ प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को मुहैया नहीं कराई गई।

बल्कि बजट से पहले कई महत्वपूर्ण बैठकों में इस कंपनी की मालिक ईशा वर्मा को बिना किसी अधिकार के सभी सरकारी प्रावधानों का उल्लंघन करके वित्त विभाग के द्वारा आयोजित गोपनीय बैठकों में शामिल किया गया और गोपनीय सूचना साझा किया गया। बोधी सेंटर फॉर सस्टेनेबल ग्रोथ प्राइ‌वेट लिमिटेड का रजिस्टर्ड पता प्लॉट नंबर 2, शॉप नंबा 3, LSC, सेक्टर 6, द्वारका, नई दिल्ली 110075 है।

इस पते का मालिक कौन है और इस पते पर कौन कौन सी अन्य कंपनियों के ऑफिस हैं इसकी भी जांच होनी चाहिए। उन पते पर रजिस्टर्ड कंपनियों के बीच आपसी रिश्ता क्या है इसकी भी जांच की जानी चाहिए। ईशा वर्मा और बोधी सेंटर फॉर सस्टेनेबल ग्रोध प्राइवेट लिमिटेड की विहार सरकार के वित्त विभाग समेत अन्य विभागों की बैठकों किस आधार पर संलिप्तता हैं इसकी व्यापक जांच होनी चाहिए।

प्रधानमंत्री से विशेष अनुरोध हैं कि तत्कालीन प्रभाव से ईशा वर्मा और बोधी सेंटर फॉर सस्टेनेबल ग्रोथ प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े सभी लोगों को बिहार सरकार के किसी विभाग के किसी भी बैठक में शामिल होने से रोका जाए। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संरक्षण में हो रहे इस तरह के भ्रष्टाचार को रोकने के लिए तत्कालीन प्रभाव से प्रधान सचिव दीपक कुमार एवं वित्त विभाग के प्रधान सचिव आनंद किशोर को पद मुक्त करें।

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