Matihani Assembly Seat: JDU की परंपरागत सीट पर 'चिराग' का वार, अब महागठबंधन तैयार, 2025 में कौन मारेगा बाज़ी?
Matihani Assembly Seat: बिहार की मटिहानी विधानसभा सीट पर राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। जहां एक समय जेडीयू का इस सीट पर मजबूत दबदबा था, वहीं 2020 के विधानसभा चुनाव में चिराग पासवान की पार्टी लोजपा (रामविलास) ने इस किले को ढहा दिया।
2025 से पहले जदयू, महागठबंधन और लोजपा (र), तीनों इस सीट पर जीत दर्ज करने की रणनीति तैयार कर रहे हैं। सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज़ है कि चिराग पासवान की पार्टी ने 2020 के चुनाव में सिर्फ एक सीट मटिहानी में ही जीत दर्ज की थी। इस हिसाब से प्रदेश के सभी सीटों के मुकाबले इस सीट पर लोजपा (र) की दावेदारी होनी चाहिए।

राजनीतिक उलटफेर: 2020 का 'चिराग मॉडल'
2020 में लोजपा ने एनडीए से अलग होकर चुनाव लड़ा और राजकुमार सिंह को मटिहानी से टिकट दिया। उन्होंने जेडीयू के सिटिंग विधायक नरेंद्र कुमार सिंह उर्फ बोगो सिंह को बेहद करीबी मुकाबले में हरा दिया, जीत का अंतर मात्र 333 वोट था । लेकिन चुनाव जीतने के कुछ ही महीनों बाद राजकुमार सिंह ने लोजपा छोड़कर जदयू की सदस्यता ले ली, और वर्तमान में वे जदयू विधायक हैं।
मटिहानी सीट का राजनीतिक इतिहास
1980 और 90 के दशक में मटिहानी सीट पर वामपंथी दलों का प्रभाव रहा। CPI और CPI(M) जैसे दलों ने यहां मज़बूत पकड़ बनाई। 2005 के बाद NDA, खासकर जेडीयू ने सीट पर कब्जा जमाया, जिसमें बोगो सिंह का नाम सबसे अहम है। 2010 और 2015 में बोगो सिंह ने लगातार जीत दर्ज की, जिससे यह सीट जेडीयू की परंपरागत मानी जाने लगी।
2025 चुनाव से पहले चढ़ा सियासी पारा
सूत्रों के अनुसार, नरेंद्र कुमार सिंह उर्फ बोगो सिंह इस बार महागठबंधन (संभवतः RJD या वाम दलों के सहयोग से) मैदान में उतर सकते हैं। दूसरी तरफ, लोजपा (रामविलास) ने यह सीट मांग ली है, क्योंकि 2020 में जीत उन्होंने दर्ज की थी। पार्टी का कहना है कि "जीत हमारी थी, न कि जदयू की। जदयू खुद भी इस सीट को छोड़ना नहीं चाहती, क्योंकि यहां अब उनका विधायक है, भले ही वो पहले लोजपा से चुनाव जीते हों।
जातीय और सामाजिक समीकरण
भूमिहार बहुल सीट, यहां भूमिहार वोटरों की संख्या निर्णायक है, जो पहले से बोगो सिंह के साथ जुड़ी मानी जाती रही है। मुस्लिम, यादव और दलित वोटर्स महागठबंधन को मजबूती दे सकते हैं, खासकर अगर RJD बोगो सिंह को अपना चेहरा बनाता है। वाम दलों का भी इस क्षेत्र में परंपरागत आधार रहा है, CPI(M) 2020 में तीसरे नंबर पर रही थी।
NDA मेंक्या होगा ?
लोजपा (र) की ओर से सीट पर दावा करना NDA के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। एक तरफ जदयू इस सीट को छोड़ना नहीं चाहेगा क्योंकि विधायक उनका है, तो दूसरी तरफ लोजपा इसे "अपनी जीत" बता रही है। अगर दोनों दल अड़ते हैं, तो NDA में फूट के आसार बन सकते हैं, जिससे महागठबंधन को सीधा फायदा मिल सकता है।
विकास और स्थानीय मुद्दे
बरौनी इंडस्ट्रियल एरिया से जुड़े रोजगार के मुद्दे, युवाओं का पलायन, खराब सड़कों और जलजमाव की समस्या चुनाव में असर डाल सकते हैं। मतदाता यह भी पूछ रहे हैं कि जिस विधायक को उन्होंने लोजपा से जिताया, उसने जदयू जॉइन क्यों किया? इस बार जनसुराज ने भी सियासी बहस को अलग ही हवा दे दी है, युवा मतदाता स्वास्थ्य, शिक्षा और रोज़गार को ज़्यादा तवज्जोह दे रहे हैं।
2025 में तिकोना मुकाबला तय?
मटिहानी विधानसभा सीट पर इस बार मुकाबला सीधा नहीं रहने वाला। एक ओर जदयू के पास सिटिंग विधायक राजकुमार सिंह हैं, तो दूसरी ओर बोगो सिंह महागठबंधन की तरफ़ से चुनावी मैदान में उतर सकते हैं। वहीं चिराग पासवान की लोजपा (र) ने सीट वापस पाने के लिए कमर कस ली है। ऐसे में यह सीट बिहार की सबसे दिलचस्प और टक्कर वाली सीटों में से एक बन चुकी है।
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