बिहार: मेला घूमने जा रहे सेना के जवान को किडनैप कर जबरन करा दी शादी
पटना। आपने लव मैरिज, अरेंज मैरिज, चाइल्ड मैरिज, गंधर्व विवाह जैसे नाम सुने होंगे, लेकिन 'पकड़ौआ शादी' के बारे में आपने कम ही सुना होगा। 'पकड़ौआ शादी' के सबसे ज्यादा मामले बिहार से सामने आते हैं। मतलब जो लड़का ठीक-ठाक खाता-कमाता है, उसे जबरन उठाकर शादी करा दी जाती है। ऐसा ही एक मामला बिहार के हाजीपुर से सामने आया है। यहां बिदुपुर में सेना के एक जवान को पकड़की उसकी जबरन शादी करा दी गई। सेना का जवान सोनपुर का मेला घूमने के लिए आया था, इसी दौरान लड़की के भाई ने उसका अपहरण कर लिया।

जीजा की वजह से जाल में फंस गया सेना का जवान
ानकारी के मुताबिक, जिस जवान का अपहरण कर जबरन शादी कराई गई है, उसका नाम है- कृष्ण मोहन राय। वह हैदराबाद में तैनात हैं। जवान के पिता का नाम राम आशीष राय है, जो कथौलीया निवासी हैं। कृष्ण मोहन राय अपने जीजा रंजीत राय के कहने पर सोनपुर मेला घूमने के लिए बाइक से निकले थे। वह अपने जीजा के साथ सोनपुर मेले की ओर जा ही रहे थे कि रास्ते में नवादा चौक के निकट लड़की के भाई से उनकी मुलाकात हुई। यहां एक मित्र से मिलने की बात कहकर जीजा अपने साले को लेकर सैदपुर गणेश गांव पहुंचे। यहां पहुंचते ही कई लोगों ने जवान को घेर लिया और मारपीट करने के बाद जबरन शादी करा दी।

मोबाइल की लोकेशन से सेना के जवान तक पहुंची पुलिस, तब तक हो चुका था विवाह
उधर, कृष्ण मोहन राय के घर नहीं पहुंचने की वजह से परिवारवाले परेशान हो गए। जब कहीं अता-पता नहीं चला तो जवान के बड़े भाई ने पुलिस के पास मामला दर्ज कराया। इसके बाद पुलिस ने छानबीन शुरू की तो जवान के मोबाइल की लोकेशन सैदपुर गणेश की निकली। मोबाइल की लोकेशन मिलने के बाद पुलिस सैदपुर गणेश गांव में जितेंद्र राय के घर पहुंची। इसके बाद नव-विवाहित जवान और लड़की को थाने लेकर आया गया।

बेगूसराय के साथ सबसे ज्यादा जुड़ा पकड़ौआ शादी का नाम
1970 के दशक में बिहार के बेगूसराय के मटिहानी क्षेत्र में सबसे ज्यादा 1970 के दशक में बेगूसराय के मटिहानी एरिया में सबसे ज्यादा पकड़ौआ विवाह के मामले सामने आते थे। बाद में इस प्रकार की शादियां कई और जिलों में भी होने लगीं। मतलब 70 से 90 के दशक तक इस कुरीति का इतना खौफ था कि अगर किसी लड़के की अच्छी नौकरी लगती थी तो घरवाले सबसे पहले उसका घर से निकलना बंद कर देते थे। हालांकि, अब जबरन विवाह के मामले काफी कम हो गए हैं, लेकिन पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। साल 2017 के आंकड़ों के अनुसार, बिहार में करीब साढ़े तीन हजार पकड़ौआ विवाह हुए।












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