Bihar Chunav 2025: महिला रोजगार योजना की किस्त में देरी, गुस्साई महिलाओं ने कहा– “मतदान का करेंगे बहिष्कार”
Bihar Chunav 2025: बिहार सरकार द्वारा चलाई जा रही महिला रोजगार योजना (Mahila Rozgar Yojana) का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए ₹10,000 की आर्थिक सहायता प्रदान करना है। अब तक लाखों महिलाओं को दो किस्तें दी जा चुकी हैं, लेकिन हज़ारों लाभार्थी अभी भी तीसरी किस्त का इंतज़ार कर रही हैं। इस देरी ने महिलाओं के भीतर गहरी नाराज़गी और अविश्वास को जन्म दिया है।
योजना की मंशा अच्छी, लेकिन क्रियान्वयन सवालों के घेरे में है। योजना शुरू होते ही सरकार ने लाभार्थियों के बैंक खातों में दो किस्तें भेजीं। लेकिन कई महिलाओं को अब तक पैसा नहीं मिला। इसके चलते महिलाओं के मन में ये सवाल तेज़ी से उठ रहे हैं।

हमारे खाते में पैसे कब आएंगे?
क्यों कुछ को मिला और कुछ को नहीं?
क्या तीसरी किस्त चुनाव तक रोकी जा रही है?
सरकार का दावा- "किस्तें चरणबद्ध भेजी जा रही हैं"
बिहार सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी खातों का सत्यापन पूरा हो चुका है और डीबीटी के माध्यम से सीधे राशि भेजी जाएगी। आगामी किस्तों का शेड्यूल भी जारी किया गया है:
किस्त जारी होने की तारीखें (2025)
6 अक्टूबर | 17 अक्टूबर | 24 अक्टूबर | 31 अक्टूबर
7 नवंबर | 14 नवंबर | 21 नवंबर | 28 नवंबर
5 दिसंबर | 12 दिसंबर | 19 दिसंबर | 26 दिसंबर
सरकार का कहना है कि एक साथ पैसा भेजना तकनीकी रूप से कठिन है, इसलिए चरणबद्ध भुगतान हो रहा है।
जमीनी सच्चाई: लाभार्थियों में भारी असंतोष
जीविका समूह की कई महिलाओं ने वनइंडिया हिंदी से से बातचीत में नाराज़गी जताई। अखतरी खातून ने कहा कि सरकार को चाहिए था कि एक साथ सबके खाते में पैसे भेजे। लेकिन चुनावी फ़ायदा लेने के लिए किस्तों में भेजा जा रहा है, ताकि महिलाएं उम्मीद में वोट दें। अब हम वोट नहीं करेंगे, मतदान का बहिष्कार करेंगे। यह बयान सिर्फ एक महिला का नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में लाभार्थियों की सामूहिक भावना को दर्शाता है।
चुनावी रणनीति या जन-कल्याण?
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह योजना गरीब और ग्रामीण महिलाओं तक सरकार की सीधी पहुंच बनाने में मददगार रही है। लेकिन अब यह सवाल उठ रहा है कि:
क्या किस्तों की टाइमिंग चुनावी फायदे के लिए तय की जा रही है?
क्या यह वोट बैंक को साधने का तरीका बन गया है?
अगर महिलाएं नाराज़ होकर मतदान का बहिष्कार करती हैं, तो यह सरकार के लिए बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकता है।
महिलाओं का स्पष्ट संदेश
वोट सम्मान के बदले, लालच के नहीं, उनका कहना है कि "हमें सिर्फ 10 हजार नहीं, स्थायी रोजगार चाहिए। सहायता देर से नहीं, समय पर मिलनी चाहिए। अगर हक़ का पैसा नहीं देंगे तो वोट भी नहीं देंगे। यह साफ दिखाता है कि बिहार की महिलाएं अब सिर्फ लाभार्थी नहीं, बल्कि जागरूक मतदाता बन चुकी हैं।
अब आगे क्या?
महिला रोजगार योजना ने महिलाओं को उम्मीद दी थी, लेकिन देरी ने विश्वास को तोड़ा है। सरकार के सामने दो चुनौतियाँ हैं:
1. समय पर सभी को भुगतान करना
2. राजनीतिक लाभ से ऊपर जनहित को रखना
अगर सरकार पारदर्शिता और गति नहीं दिखाती, तो महिलाओं का यह असंतोष आने वाले चुनावों में बड़ा मुद्दा बन सकता है। महिला रोजगार योजना एक सराहनीय पहल है, लेकिन वास्तविक सफलता तभी होगी जब सभी लाभार्थियों को समय पर और समान रूप से लाभ मिले। लोग अब सिर्फ वादे नहीं, परिणाम चाहते हैं। अगर सरकार ने इस नाराज़गी को गंभीरता से नहीं लिया, तो आने वाला चुनाव महिलाओं की चुप्पी नहीं, उनकी प्रतिक्रिया का साक्षी होगा।
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