Bihar Chunav 2025: राहुल गांधी की मेहनत पर इन 3 मुद्दों ने डाला पानी, अस्मिता की लड़ाई में एनडीए को बढ़त?
Bihar Chunav 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए जैसे-जैसे समय नज़दीक आ रहा है, वैसे-वैसे राजनीतिक घटनाक्रम भी तेजी से करवट ले रहे हैं। कांग्रेस के लिए यह चुनाव अहम साबित हो सकता था। राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा ने जहां पार्टी के कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भर दी थी और जनता में पार्टी के प्रति धारणा बदलने की शुरुआत हुई थी, वहीं कुछ नेताओं की गैरजिम्मेदाराना बयानबाज़ी ने मेहनत पर पानी फेरने का काम कर दिया।
दरभंगा में मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिवंगत मां को लेकर की गई अपमानजनक टिप्पणी ने कांग्रेस को गहरा झटका दिया। प्रधानमंत्री के भावुक अंदाज़ ने इस मुद्दे को सीधा जनता के दिल तक पहुंचा दिया। खासकर महिलाओं में नाराज़गी साफ दिख रही है, और यह नाराज़गी चुनावी नतीजों में कांग्रेस के लिए भारी पड़ सकती है।

मामला यहीं तक सीमित नहीं रहा। कांग्रेस की केरल इकाई के अध्यक्ष द्वारा बीड़ी को बिहार से जोड़ने वाली टिप्पणी ने सत्तारूढ़ एनडीए को एक और अवसर दे दिया। एनडीए नेताओं ने इसे तुरंत बिहारी अस्मिता से जोड़कर कांग्रेस को घेरना शुरू कर दिया। दरअसल, बिहार की राजनीति में आत्मसम्मान और अस्मिता की राजनीति हमेशा निर्णायक भूमिका निभाती रही है। ऐसे में कांग्रेस की यह चूक पार्टी को महंगी पड़ सकती है।
इसके बाद कश्मीर में हजरतबल मस्जिद की उद्घाटन पट्टिका पर लगे अशोक चिह्न के तोड़े जाने का मामला सामने आया। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की टिप्पणी और कांग्रेस की चुप्पी ने बीजेपी को फिर से राष्ट्रवाद और बिहार गौरव की पिच पर खेलने का मौका दे दिया। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इसे सीधे बिहार की विरासत और सम्राट अशोक के सम्मान से जोड़ दिया। जेडीयू और यहां तक कि राजद ने भी इस घटना की निंदा की। सवाल यह है कि जब सहयोगी दल भी कांग्रेस पर दबाव बना रहे हैं, तब कांग्रेस की चुप्पी बिहारियों को क्यों खल रही है?
आज कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह अपने नेताओं की जुबान को काबू में रखे और जनता से जुड़ी गलतियों पर तुरंत व ठोस प्रतिक्रिया दे। बिहार के मतदाता भावनाओं और अस्मिता से समझौता नहीं करते। कांग्रेस अगर इस संदेश को नहीं समझ पाई, तो राहुल गांधी की सारी मेहनत जाया हो सकती है।
राजनीति में गलतियाँ होना स्वाभाविक है, लेकिन बार-बार वही भूलें दोहराना कांग्रेस की सबसे बड़ी कमजोरी बन गई है। आने वाले दिनों में बिहार की जनता यह जरूर तय करेगी कि क्या कांग्रेस अपनी इन गलतियों से सबक ले पाती है या फिर एक बार फिर सत्ता की दौड़ में पीछे छूट जाएगी।












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