Madhepura Seat: यादवों के गढ़ में 'RJD सुप्रीमो लालू' को भी मिली है मात, BJP का आज तक नहीं खुला खाता
Madhepura Lok Sabha Seat Profile And History: लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर बिहार में सियासी बाज़ार सज चुका है। राजनीतिक पार्टियां ने चुनावी मंथन कर प्रदेश की सभी 40 लोकसभा सीटों पर जीत की रणनीति बनानी शुरू कर दी है। इसी क्रम में आज हम आपको समाजवादी सियासत की प्रयोगभूमि मधेपुरा लोकसभा सीट का इतिहास और समीकरण बताने जा रहे हैं।
मधेपुरा लोकसभा सीट पर RJD-JDU के बीच उठापटक देखने को मिलती रही है। आपको बता दें कि इस लोकसभा सीट को यादवों के गढ़ वाली सीट में शुमार किया जाता है। यादवों के वर्चस्व वाली ज़मीन पर समाजवादियों की सियासत को हवा मिलती रही है। ग़ौरतलब है कि किसी भी लहर का इस सीट पर असर दिखा है।

इस लोकसभा सीट के सियासी इतिहास की बात करें, तो 1952 के पहले हुए चुनाव में जवाहर लाल नेहरू की हवा थी, इसके बाद भी यहां से कांग्रेस जीत दर्ज नहीं कर पाई थी। सोशलिस्ट पार्टी के किराई मुसहर ने पार्टी का परचम बुलंद किया था। वहीं 2014 में जब मोदी लहर थी तो यहां से पप्पू यादव ने जीत दर्ज की थी। आपको बता दें कि 1952 में यह इलाका पूर्णिया और भागलपुर क्षेत्र में शामिल था।
1967 में मधेपुरा लोकसभा सीट के अस्तित्व में आने के बाद पहली बार बीपी मंडल ने जीत दर्ज की थी। मुख्यमंत्री बनने के लिए उन्होंने सीट छोड़ी थी, बाद में हुए उपचुनाव से पहले ही उनकी कुर्सी चली गई। इसके बाद उन्होंने सांसद की कुर्सी पर क़ब्ज़ा जमाया।
मधेपुरा लोकसभा सीट के नाम एक और रिकॉर्ड दर्ज है कि यहां से हमेशा ही यादव प्रत्याशियों ने जीत का परचम लहराया है। ग़ौरतलब है कि 1967 से लेकर आज तक इस सीट पर कांग्रेस सिर्फ़ 3 बार ही जीत दर्ज कर पाई है। वहीं बीजेपी अभी तक जीत दर्ज नहीं कर सकी है।
राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव मधेपुरा लोकसभा सीट से जीत दर्ज कर दो बार दिल्ली का रुख कर चुके हैं। वहीं 1999 में उन्हें शरद यादव ने सियासी मात दी थी। आपको बता दें कि जदयू की टिकट पर शरद यादव 4 बार जीत का परचम लहरा चुके हैं।
2004 के उपचुनाव और 2014 के चुनाव में पप्पू यादव ने भी जीत का परचम लहराया था। 2019 के लोकसभा चुनाव में जदयू की टिकट पर दिनेश चंद्र यादव ने राजद उम्मीदवार शरद यादव को सियासी मात दी थी। मधेपुरा लोकसभा सीटे के मतदाताओं के गणित पर निगाह डाले तों 3.3 लाख के करीब याद, 1.8 लाख के करीब मुस्लिम मतदाताओं की तादाद है।
इसके अलावा ब्राह्मण मतदाताओं की तादाद 1.7 लाख के करीब है। इसके अलावा 1.1 लाख के करीब राजपूत मतदाता, मुसहर वोटर 1.08 लाख के करीब, वहीं दलित मतदाताओं की तादाद करीब 1.10 लाख है। वहीं, कायस्थ मतदाताओं की तादद करीब 10 हजार है। भूमिहार 5 हजार, कुर्मी मतदाता करीब 65 हजार, कोयरी मतदाता 60 हजार के करीब और धानुक मतदाताओं की तादाद 60 हजार के करीब है।












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