Lost Heritage Bihar: खंडहर हो चुका बिहार के इस ज़िले का 'हवा महल', 17वीं शताब्दी में हुआ था निर्माण
Lost Heritage Bihar: 17वीं शताब्दी में ऐतिहासिक किलेनुमा महल का निर्माण राजा बैरम सिंह (सोलंकी वंश के राजा, मध्य प्रदेश) ने मुगलकालीन कारीगर मो. बरकती मियां के हाथों से करवाया था। हवा महल के निर्माण में राख, चूना...
Lost Heritage Bihar: बिहार सरकार पर्यटन को लगातार बढ़ावा देने के लिए कई तरह की योजनाओं पर काम कर रही है। वहीं प्रदेश में कई ऐतिहासिक धरोहरें गुमनामी का शिकार हो रही है। वन इंडिया हिंदी लगातार बिहार की गुमनाम हो रही धरोहरों की खबर आप तक पहुंचा रहा है। इसी कड़ी में आज हम आपको बिहार के खगड़िया जिले के गुमनाम हो चुके 'हवा महल' के बारे में बताने जा रहे हैं। जिस पर सरकार ने अगर ध्यान दिया तो उसे पर्यटन के ऐतबार से विकसित किया जा सकता है। इससे स्थानीय लोगों के लिए रोज़गार के अवसर भी पैदा होने की उम्मीद जगेगी।

स्थानीय लोग बुलाते हैं भरतखंड का पक्का
खगड़िया जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर की दूरी परबत्ता प्रखंड है। जहां के सौढ दक्षिणी पंचायत के भरतखंड में मुगल ज़माने के कारीगर द्वारा बनाया गया ऐतिहासिक महल है। आपको बता दें कि पुराने ज़माने में भरतखण्ड गांव का नाम बटखण्ड था। स्थानीय लोग अपनी ज़ुबान (भाषा) में इस महल को भरतखंड का पक्का भी कहते हैं। ग्रामीण आज भी इस उम्मीद में है कि इस ऐतिहासिक धरोहर को सरकार नई पहचान दिला सकती है। लेकिन ज़मीनी हक़ीकत है कि सरकार की तरफ़ अभी तक इसके जीर्णोद्धार के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है।

17वीं शताब्दी में हुआ था महल का निर्माण
17वीं शताब्दी में ऐतिहासिक किलेनुमा महल का निर्माण राजा बैरम सिंह (सोलंकी वंश के राजा, मध्य प्रदेश) ने मुगलकालीन कारीगर मो. बरकती मियां के हाथों से करवाया था। हवा महल के निर्माण में राख, चूना और सुरखी का इस्तेमाल किया गया था। महल के निर्माण में करीब दो फिट तक के 51 तरह के ईंटों का इस्तेमाल किया गया था। ग़ौरतलब है कि जयपुर के हवा महल से इस महल की तुलना की जाती है। 52 कोठरी, 53 द्वार महल के नाम से भी यह धरोहर मशहूर है। इस महल में 53 दरवाज़े और 52 कमरे हैं। वहीं यह महल 5 बीघा, 5 कट्ठा, 5 धुर और 5 धुरकी ज़मीन पर बनाया गया है।

‘भूलभुलैया’ भी बुलाते हैं ग्रामीण
भरतखंड आप जाएंगे तो वह नज़ारा आपको काफी पसंद आएगा। स्थानीय लोग बताते हैं कि आज की तारीख में भी चत्मकारी मंडप के चारों खंभे पर चोट करने पर कई किस्म की आवाज़ सुनाई देती है। मनमोहक आवाजों को महसूस करते हुए लोग उसका लुत्फ भी उठाते हैं। महल के अंदर रानी के नहाने के लिए तालाब, महल से मंदिर तक जाने के लिए सुंरग वाला रास्ता और दीवारों पर शानदार चित्रकारी और भी मौजूद है। ग्रामीण इस ऐतिहासिक धरोहर को 'भूलभुलैया' भी बुलाते हैं।

‘केंद्र और राज्य सरकार नहीं दे रही ध्यान’
भरतखण्ड गांव के रहने वाले लोगों के साथ ही खगड़िया जिले के लोगों को यह उम्मीद है कि सरकार इस ओर ध्यान देगी और उनके ज़िले को अलग पहचान मिलेगी। आपको बता दें कि इस महल के जीर्णोद्धार के लिए राज्य से लेकर केंद्र सरकार और पर्यटन विभाग को कई बार चिट्ठी लिखी जा चुकी है लेकिन इसका अभी तक कोई हल नहीं निकला है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शासन और प्रशासन की अनदेखी की वजह से यह महल पर्यटक क्षेत्र के तौर पर लिकसित नहीं किया गया और ना ही इस ओर कोई ठोस क़दम उठाए जा रहे हैं।
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