Bihar: केके पाठक का नाम लिए बिना राज्यपाल ने दी नसीहत, शिक्षा मंत्री भी भड़के, कहा- जल्दबाजी में न हो फैसला
बिहार के शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक ने जब से पद संभाला है तब से वह विवादों में घिरे रहते हैं। आए दिन उनका टकराव राजभवन के साथ देखा जा रहा है। कई बार तो राजभवन ने नसीहत भी भेजी है लेकिन फिलहाल यह मामला थमता नहीं दिख रहा है। इसी क्रम में एक बार फिर से राज्यपाल ने केके पाठक का नाम लिए बिना नसीहत दे डाली है और अधिकारियों को संस्कार सीखने तक की बात कह डाली है।
राज्यपाल ने अधिकारियों को संस्कार सीखने को कहा
राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने केके पाठक का नाम लिए बिना नसीहत देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री से किसी तरह का टकराव नहीं है, लेकिन अधिकारियों को संस्कार सीखने की जरूरत है। हम सब को शिक्षक को सम्मान देना होगा। इससे ज्यादा जरूरी कुछ नहीं है। दरअसल, राज्यपाल ने पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में शिक्षकों के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे।

राज्यपाल आर्लेकर ने आगे कहा कि शिक्षा विभाग के सेक्रेटरी को हिम्मत कैसे होती है कि वह पत्र लिखता है। अभी मुख्यमंत्री कह रहे थे कि गिरीश कुमार चौधरी को एक्सटेंशन चाहिए, लेकिन जब अच्छा समन्वय रहेगा तब इस पर सोच सकते हैं। हम सब को शिक्षक को सम्मान देना होगा।
शिक्षा मंत्री ने भी दी नसीहत
बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखब ने अधिकारियों को नसीहत देते हुए कहा कि हड़बड़ी में किसी तरह का निर्णय नहीं लिया जाए। इससे विभाग की फजीहत और सरकार की किरकिरी हो रही है। हर फैसला सोच समझकर लें तो नहीं आगे परेशानी हो सकती है।
बिहार की शिक्षा व्यवस्था पर भी सरकार ने उठाया सवाल
वहीं बिहार की शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी राज्यपाल ने बिहार सरकार को जमकर सुनाया. उन्होंने कहा कि 30-40 विद्यार्थियों के पीछे एक शिक्षक की जरुरत होती है. लेकिन हम कितने शिक्षक दे रहे हैं. पटना विश्विद्यालय ही नहीं हमारे सभी विश्वविद्यालय का स्तर बढ़ना चाहिए।












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