कलयुग का श्रवण कुमार! वृद्ध मां-पिता को कांवड़ में बैठा शुरू की बाबाधाम की यात्रा, बहू भी दे रही साथ

पटना, 18 जुलाईः कांवड़ यात्रा धर्म, आस्था, श्रद्धा, विश्वास, भक्ति संग आध्यात्मिक शक्ति के मिलन का पर्व है। श्रावण माह में विशेष रूप से चलने वाली इस यात्रा में भक्तगण अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप कांवड़ में गंगा जल भरकर पैदल अपने गंतव्य तक पहुंचते हैं। लेकिन कई ऐसे भी लोग हैं जो स्वास्थ्य कारणों से पैदल इस पावन यात्रा को करने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे में कुछ 'बेटे' होते हैं जो अपने परिजनों की मनोकामना को पूरा करने के लिए 'श्रवण कुमार' बन जाते हैं।

शुरू की कांवर यात्रा

शुरू की कांवर यात्रा

एक ऐसे ही श्रवण कुमार बने चंदन ने माता-पिता की इच्छा के लिए 105 किलोमीटर पैदल यात्रा शुरू की है। लंबी दूरी की यात्रा करने में असमर्थ जब मां-पिता ने अपने बच्चे से देवघर के बाबाधाम जाने की इच्छा जताई तो चंदन उनकी इच्छा पूरी करने के लिए सहर्ष ही तैयार हो गए। इसमें चंदन का साथ उनकी पत्नी रानी देवी ने भी दिया।

सुल्तानगंज से किया प्रस्थान

सुल्तानगंज से किया प्रस्थान

एक बहंगी तैयार करने के बाद श्रवण कुमार की तरह कंधे पर कांवड़ लेकर बेटा और बहू ने यह यात्रा शुरू की है। आज चंदन और रानी ने माता-पिता संग सुल्तानगंज से पानी लेकर देवघर के लिए प्रस्थान किया है। बेटे-बहू की यह कांवड़ यात्रा सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोर रही है। लोग उनकी खूब तारीफ कर रहे हैं।

धार्मिक परिवार से आते हैं चंदन

धार्मिक परिवार से आते हैं चंदन


बेटे चंदन कुमार ने मीडिया को बताया कि हम प्रत्येक महीने सत्यनारायण व्रत का पूजन करते हैं। हमारा परिवार बेहद धार्मिक रहा है। ऐसे ही एक बार पिताजी के मन में पैदल बाबाधाम जाने की इच्छा हुई। चूंकि वे बेहद वृद्ध हैं ऐसे में यह संभव नहीं था कि वे सौ किलोमीटर से भी अधिक की दूरी तय कर पाएं। ऐसे में मुझे यह ख्याल आया कि क्यों न अपने मां-पिता को कंधे पर रखकर पैदल ही बाबाधाम चलूं।

माता-पिता से मांगी अनुमति

माता-पिता से मांगी अनुमति

जब यह इच्छा मैंने अपनी पत्नी को बताया तो वह बेहद खुश हुईं और उसने काफी हिम्मत दी। जिसके बाद हम दोनों ने माता-पिता की अनुमति ली और इस यात्रा पर निकल पड़े। चंदन बताया कि माता-पिता को बहंगी में बिठाकर अपने कंधे के बल इस यात्रा को सफल करेंगे। इसके लिए उन्होंने एक मजबूत कांवड़नुमा बहंगी तैयार किया है। चंदन ने रविवार को सुल्तानगंज से जल भरकर उस बहंगी में आगे पिताजी और पीछे माताजी को बिठाकर यात्रा शुरू की है।

बहू बोली- मैं भी बनूंगी भागीदार

वहीं बहू रानी देवी ने बताया कि जब उनके पति के मन में माता-पिता को कांवर लेकर पैदल बाबाधाम जाने की इच्छा जाहिर हुई तो मुझे भी इसमें भागीदार बनने का मन हुआ। हम लोग खुश हैं कि अपने सास-ससुर को बाबाधाम की यात्रा कराने निकले हैं। लोग भी हम लोगों को हिम्मत दे रहे हैं और हमारी प्रशंसा कर रहे हैं। माता-पिता को कांवड़ में लेकर जाने में बहुत अच्छा महसूस हो रहा है। चंदन की माता ने बताया कि हम तो आशीर्वाद ही दे सकते हैं। भगवान से प्रार्थना है कि मेरे पुत्र को सबल बनाये।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+