बिहार: कैमूर बनेगा ईकोटूरिज्म का हब, जल्द बनेगा एक और टाइगर रिज़र्व क्षेत्र

बिहार में ईकोटूरिज्म को बढ़ावा देने की क़वायद हब तेज़ की जा रही है। इसी कड़ी में अब एक और टाइगर रिजर्व क्षेत्र बनाने की योजना तैयार की जा रही है।

पटना, 14 अप्रैल 2022। बिहार में ईकोटूरिज्म को बढ़ावा देने की क़वायद हब तेज़ की जा रही है। इसी कड़ी में अब एक और टाइगर रिजर्व क्षेत्र बनाने की योजना तैयार की जा रही है। बिहार में पहले जंगली क्षेत्र काफ़ी था लेकिन झारखंड के बंटवारे के बाद बिहार में काफी कम जंगली क्षेत्र बचा है। मौजूदा समय में बिहार में सिर्फ़ एक टाइगर रिज़र्व है। प्रदेश में फिलहाल एक वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व क्षेत्र ही है। अब जल्द ही बिहार को दूसरा टाइगर रिज़र्व क्षेत्र कैमूर के जंगलों में बनने जा रहा है।

बिहार में ग्रीन कवर एरिया बढ़ाने पर ज़ोर

बिहार में ग्रीन कवर एरिया बढ़ाने पर ज़ोर

नीरज कुमार सिंह (पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री, बिहार) ने बताया कि इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए राज्य में खास कोशिश की जा रही है। मीडिया से मुखातिब होते हुए मंत्री नीरज कुमार सिंह ने कहा कि राज्य के ग्रीन कवर एरिया बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि वन क्षेत्रों को बढ़ाने और उनके संरक्षण के लिए लगातार बिहार सरकार लगातर काम कर रही है। ग्रीन कवर एरिया बढ़ाने के लिए प्रदेश में युद्धस्तर पर काम कर लोगों को जागरूक किया भी जा रहा है।

टाईगर रिज़र्व बनाने के लिए केंद्र से मिली मंजूरी

टाईगर रिज़र्व बनाने के लिए केंद्र से मिली मंजूरी

बिहार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री नीरज कुमार सिंह ने बताया कि कैमूर वन्य प्राणी आश्रयणी को टाईगर रिज़र्व बनाने के लिए केंद्र सरकार से मंजूरी मिल गई है। कैमूर वन्य प्राणी आश्रयणी को टाइगर रिजर्व में तब्दील करने के लिए सरकार की तरफ़ से प्राथमिकता से काम किया जा रहा है। ग़ौरतलब है कि कैमूर वन्य प्राणी शेल्टर प्रदेश का सबसे बड़ा जंगली क्षेत्र आश्रयणी है।

विंध्य पर्वत श्रृंखला से जुड़ा है यह शेल्टर

विंध्य पर्वत श्रृंखला से जुड़ा है यह शेल्टर

रोहतास और कैमूर जिला में 1465 वर्ग किलोमीटर में यह शेल्टर फैला हुआ है। साथ ही विंध्य पर्वत श्रृंखला से भी जुड़ा हुआ। संरक्षित क्षेत्र मिलाकर 1800 वर्ग किलोमीटर तक इसका दायरा है। कैमूर वन्य प्राणी शेल्टर और मध्यप्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के बीच रेनुकुट कॉरीडोर होने की वजह से यहां बाघ आते रहते हैं। इसके अलावा तेंदुआ, चिंगारा, काला हिरण,भालू, जंगली सुअर, जंगली कुत्ता, चीतल, सांभर, शाहिल समेत कई और अन्य वन्य प्राणियों का भी यहां बसेरा है।

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