बिहार: चुनाव से पहले जीतन राम मांझी जदयू में वापसी करेंगे या महागठबंधन छोड़ बनाएंगे तीसरा मोर्चा?

पटना। महागठबंधन में राष्ट्रीय जनता दल से तकरार, तीसरा मोर्चा बनाने की खबरों के साथ-साथ बिहार के सियासी गलियारे में हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के मुखिया और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की जदयू में वापसी की चर्चा जोरों पर है। इस चर्चा को नीतीश सरकार के कैबिनेट मंत्री अशोक चौधरी ने यह कहकर और हवा दे दी है कि अगर मांझी घर वापसी करते हैं तो उनका स्वागत है। उन्होंने साथ में यह भी जोड़ा कि इस मामले में आखिरी फैसला मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही करेंगे। ऐसा कहा जा रहा है कि जीतन राम मांझी अपनी पार्टी का विलय भी जदयू में कर सकते हैं। पत्रकारों से बात करते हुए जीतन राम मांझी ने हाल में नीतीश कुमार की प्रशंसा करते हुए कहा था कि वे अच्छा काम कर रहे हैं लेकिन जमीन पर उनके निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है। यही नहीं कैबिनेट मंत्री संजय कुमार झा ने भी उपेंद्र कुशवाहा और जीतन राम मांझी की तारीफ की थी। इसके बाद से ही मांझी के जदयू में घर वापसी और फिर से नीतीश कुमार के साथ जाने के चर्चे शुरू हो गए थे।

'राजनीति संभावनाओं का खेल है...'

'राजनीति संभावनाओं का खेल है...'

इससे पहले शनिवार को मांझी ने राजद को अल्टीमेटम दिया था कि अगर 25 जून तक उनकी मांग नहीं मानी गई तो वो तीसरा मोर्चा बनाने की तरफ आगे बढ़ सकते हैं। जब जीतन राम मांझी से यह पूछा गया कि 25 जून तक अगर उनकी मांग पूरी नहीं होती है तो क्या वे नीतीश कुमार के साथ जा सकते हैं? इसके जवाब में मांझी ने कहा कि राजनीति संभावनाओं का खेल है। नीतीश कुमार का ही उदाहरण देते हुए कहा कि वे कभी भाजपा के विरोधी तो कभी लालू के सहयोगी रहे हैं। मांझी के जदयू में आने की अटकलों पर कैबिनेट मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि इस बारे में अंतिम फैसला नीतीश कुमार ही लेंगे। मांझी का हम स्वागत करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस के कई नेता जदयू में शामिल हो सकते हैं।

चुनाव से ठीक पहले तीसरे मोर्चे का फॉर्मूला

चुनाव से ठीक पहले तीसरे मोर्चे का फॉर्मूला

बिहार में अक्टूबर-नवंबर में विधानसभा के चुनाव होने हैं। इससे पहले मांझी ने बिहार की सियासत में फिर नए समीकरण बनाने के संकेत दिए। मांझी पिछले साल से ही महागठबंधन में समन्वय समिति की मांग करते रहे हैं और 15 जून शनिवार को भी यही बात दोहराई थी। शनिवार को मांझी ने कहा था कि महागठबंधन को बचाने के लिए राष्ट्रीय जनता दल अगर 25 जून तक समन्वय समिति नहीं बनाती है तो वे राजद और भाजपा के खिलाफ किसी भी बड़े दल जैसे कांग्रेस के साथ मिलकर तीसरा मोर्चा बनाने को तैयार हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि बिना किसी बड़ी पार्टी के नेतृत्व के तीसरा मोर्चा बनाना संभव भी नहीं है।

'हम जानते हैं- तीसरे मोर्चे से भाजपा को होगा फायदा'

'हम जानते हैं- तीसरे मोर्चे से भाजपा को होगा फायदा'

मांझी ने कहा कि वे यह भी जानते हैं कि किसी भी तीसरे मोर्चे से भाजपा को ही फायदा होगा। मांझी ने तीसरे मोर्चे में उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी, मुकेश साहनी की विकासशील इंसान पार्टी और सीपीआई समेत अन्य वामपंथी पार्टियों को साथ लाने की बात कही। इस पर सीपीआई ने कहा कि मांझी ने जो तीसरे मोर्चा बनाने का जो फॉर्मूला दिया है वह सही नहीं है। कांग्रेस ने भी कहा कि वह किसी ऐसे मोर्चे का हिस्सा नहीं बनेगी जिससे भाजपा को फायदा हो सकता हो। साथ ही राष्ट्रीय जनता दल ने मांझी को अपनी बात को मीडिया के जरिए सामने न लाकर महागठबंधन के फोरम पर सीधे रखने की सलाह दी।

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