Bihar News: मंत्री पद छोड़ देंगे मांझी? राज्यसभा सीट को लेकर NDA को दी चेतावनी, बिहार की सियासत में हड़कंप
Jitan Ram Manjhi Rajya Sabha Seat: केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के संरक्षक जीतन राम मांझी ने बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल मचा दी है। गया में मीडिया से बात करते हुए मांझी ने आगामी राज्यसभा चुनावों के लिए अपनी पार्टी के लिए एक सीट की दावेदारी ठोक दी है।
उन्होंने एनडीए गठबंधन को पुराने वादे की याद दिलाते हुए कहा कि 2024 के चुनाव के समय उनसे जो वादा किया गया था, वह अभी भी अधूरा है। मांझी के इस बयान को गठबंधन के लिए एक बड़ी चेतावनी माना जा रहा है, क्योंकि उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि हक न मिलने पर वे अपना अलग रास्ता चुनने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

राज्यसभा सीट पर पुरानी 'बकाया' दावेदारी
जीतन राम मांझी ने याद दिलाया कि 2024 के लोकसभा चुनाव के समय एनडीए के साथ हुए समझौते में 'हम' को दो लोकसभा और एक राज्यसभा सीट का आश्वासन दिया गया था। हालांकि, चुनाव में उन्हें केवल एक लोकसभा सीट मिली। मांझी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने उन्हें मंत्री बनाकर सम्मान दिया, जिसके लिए वे आभारी हैं, लेकिन राज्यसभा की जो एक सीट बकाया है, वह अप्रैल में होने वाले चुनावों में उनकी पार्टी को मिलनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि गठबंधन में सम्मान के साथ हक भी जरूरी है।
'मंत्री पद बड़ी बात नहीं, राजनीतिक अस्तित्व जरूरी'
मांझी ने कड़े लहजे में कहा कि उनके लिए केंद्रीय मंत्री का पद कोई बहुत बड़ी उपलब्धि या मजबूरी नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनकी पार्टी की अनदेखी की गई, तो वे अपना रास्ता खुद बनाने के लिए स्वतंत्र हैं। मांझी के अनुसार, मंत्री पद रहे या न रहे, उनका राजनीतिक वजूद और जनता का समर्थन उनके साथ हमेशा रहेगा। यह बयान संकेत देता है कि राज्यसभा सीट को लेकर वे इस बार किसी भी तरह के समझौते के मूड में नहीं हैं।
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पार्टी संरक्षक और कार्यकर्ताओं की इच्छा
मीडिया से मुखातिब होते हुए मांझी ने खुद को पार्टी का केवल एक 'संरक्षक' बताया। उन्होंने कहा कि पार्टी के अंतिम निर्णय राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष कुमार सुमन और अन्य पदाधिकारी लेंगे, लेकिन उन्होंने कार्यकर्ताओं की भावनाओं को मजबूती से सामने रखा है। मांझी ने मीडिया से अपनी बातों को तोड़-मरोड़ कर पेश न करने की अपील की, हालांकि उनके तेवरों से यह साफ झलक रहा था कि वे अपनी पार्टी के भविष्य को लेकर काफी गंभीर और आक्रामक हैं।
आगामी चुनाव और गठबंधन में बढ़ती रार
राज्यसभा सीटों के बंटवारे को लेकर चल रही खबरों में जेडीयू, बीजेपी और चिराग पासवान की एलजेपी (आर) का नाम तो था, लेकिन 'हम' की चर्चा न होने पर मांझी बिफर पड़े। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सबको सीटें मिल रही हैं, तो उनकी पार्टी का स्थान कहाँ है? बिहार की राजनीति के माहिर खिलाड़ी माने जाने वाले मांझी का यह "प्रेशर पॉलिटिक्स" वाला दांव अप्रैल के चुनाव से पहले एनडीए के भीतर सीटों के गणित को उलझा सकता है, जिससे गठबंधन में तनाव बढ़ना तय है।
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