बिहार में जदयू-राजद में दरार! उपेंद्र कुशवाहा कौन सा खेल खेलने वाले हैं ?
बिहार में चूड़ा-दही के भोज में भी महागठबंधन में दरार पैदा होने की अटकलें हैं। राजद-जदयू के नेताओं के बीच कुछ गड़बड़ होने की बात राजनीति के जानकार भी कह रहे हैं। उपेंद्र कुशवाहा के भी असहज होने की चर्चा है।

बिहार की राजनीति में एक बार फिर से सरगर्मी बढ़ी हुई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार में शामिल सबसे बड़ी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल के नेताओं की ओर से हाल में सीएम को लगातार निशाना बनाया गया है। लेकिन, डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव पर आरोप लग रहे हैं कि उनकी ओर से ऐसे नेताओं की जानबूझकर अनदेखी की जा रही है। ऐसे में राजनीति के जानकारों को महागठबंधन की दोनों प्रमुख पार्टियों नीतीश की जेडीयू और लालू यादव की आरजेडी के बीच सबकुछ ठीक चलता नहीं नजर आ रहा है। नया मुद्दा चूड़ा-दही भोज का भी है, जिसको लेकर जेडीयू संसदीय बोर्ड के नेता उपेंद्र कुशवाहा के नए सियासी रास्ते तलाशने की अटकलें लग रही हैं।
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चूड़ा-दही पर भी राजनीति का असर ?
बिहार की राजनीति में मकर संक्रांति के मौके पर दही-चूड़ा के भोज से भी राजनीति साधी जाती रही है। लेकिन, दि न्यू इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस बार सत्ताधारी महागठबंधन के दोनों ही बड़े दलों राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और जनता दल (यूनाइटेड-JDU) ने अलग-अलग दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया है। इससे यह अटकलें तेज हो गई हैं कि क्या महागठबंधन में सबकुछ सही से चल रहा है? राजद की ओर से 14 जनवरी को दही-चूड़ा खाने के लिए लोगों को पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के आधिकारिक आवास पर बुलाया जा रहा है तो जेडीयू के संसदीय बोर्ड के चेयरमैन और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा अपने आवास पर उसी दिन दही-चूड़ा खिलाने वाले हैं।

बिहार में जदयू-राजद में दरार!
राजनीतिक विश्लेषकों को लगता है कि जदयू-राजद में कुछ ना कुछ तो दिक्कत जरूर है। इसके लिए वे पूर्व कृषि मंत्री सुधाकर सिंह और राजद एमएलए विजय मंडल की ओर इशारा कर रहे हैं, जिन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जमकर खिंचाई की है, लेकिन उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने उनके खिलाफ फौरी कार्रवाई नहीं की। विपक्षी बीजेपी को भी कुछ ना कुछ महसूस होने लगा है और इसलिए वह भी महागठबंधन पर तंज कसने का मौका नहीं छोड़ रही है।

राजद की रणनीति के तहत नीतीश का हो रहा है अपमान-मोदी
पूर्व उपमुख्यमंत्री और भाजपा के राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी ने कहा है, 'आरजेडी का शीर्ष नेतृत्व अपने नेताओं के माध्यम से नीतीश का अपमान कर रहा है और साथ ही उनके खिलाफ कार्रवाई की बात भी कर रहा है। आरजेडी ने सुधाकर के खिलाफ नोटिस तक नहीं जारी किया है, जिससे दूसरे नेता (मंडल) को सीएम के खिलाफ बोलने का प्रोत्साहन मिल रहा है। सबकुछ आरजेडी की अच्छी तरह से सोची-समझी रणनीति के अनुसार हो रहा है।' तेजस्वी भी सुधाकर और मंडल के खिलाफ कार्रवाई को लेकर मौन हैं। वे सिर्फ इतना दोहरा रहे हैं कि महागठबंधन के खिलाफ बोलने से बीजेपी को फायदा मिल रहा है और उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।

राजद का आंतरिक मामला-जदयू
हालांकि, जदयू के अध्यक्ष राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह, जो कि मुंगेर से सांसद भी हैं, उन्होंने इस मुद्दे को राजद का आंतरिक मसला बताकर यह कहा कि इससे गठबंधन का कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन, राजनीतिक जानकारों का कहना है कि राजद नेताओं का नीतीश पर हमला करने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से भाजपा को गठबंधन सरकार पर हमले का मौका मिल रहा है।

'कुशवाहा को जेडीयू में संभावना नहीं दिख रही'
उधर जदयू के अंदर भी एक उथल-पुथल का माहौल है। क्योंकि, उपेंद्र कुशवाहा ने चूड़ा-दही खाने के लिए कुछ भाजपा नेताओं को भी बुलाया है। इंडियन एक्सप्रेस से सूत्रों ने कहा कि उन्होंने पूर्व की सहयोगी बीजेपी के साथ अपना संवाद शुरू कर दिया है। इसके मुताबिक, 'हाल ही में बीजेपी के एक केंद्रीय नेता से मिले हैं' क्योंकि, उन्हें 'जेडीयू में अपने लिए बहुत संभावना नहीं दिख रही है।' हालांकि कुशवाहा ने कहा है कि 'मेरी ओर से कई दलों के नेताओं को मकर संक्रांति में खाने पर बुलाने में कुछ भी नया नहीं है। तेजस्वी यादव ने भी बीजेपी नेताओं को बुलाया है। मैंने कई नेताओं को बुलाया है, उनमें से कुछ बीजेपी के भी हो सकते हैं।'

'इन खबरों का कोई आधार नहीं है'
दरअसल, कुशवाहा ने 2021 में बड़ी उम्मीदों से अपनी आरएलएसपी का जदयू में विलय कर दिया था। वह खुद को नीतीश के उत्तराधिकारी के तौर पर देख रहे थे। लेकिन, नीतीश ने 2025 में तेजस्वी को अपना उत्तराधिकारी बनाने का ऐलान कर रखा है। जानकारी के मुताबिक इससे कुशवाहा के लिए बड़ी असहजता वाली स्थिति पैदा हो गई है। उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की बात उठी थी, लेकिन राजद किसी भी सूरत में यह मानने को तैयार नहीं होगी। क्योंकि, आरजेडी के मुकाबले जेडीयू के लगभग आधे एमएलए हैं। ऐसे में अटकलें हैं कि गैर-यादव ओबीसी, कोयरी-कुर्मी और अति पिछड़ों की राजनीति के नाम पर वह एनडीए में जाने की संभावना तलाश सकते हैं। लेकिन, वरिष्ठ भाजपा नेता से हालिया मुलाकात के बारे में वे कहते हैं, 'इन खबरों का कोई आधार नहीं है।' इसके साथ ही अपनी पार्टी की ओर से मंत्री पद का ऑफर दिए जाने के सवाल को भी उन्होंने अहमियत नहीं दी।
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