2019 से ही JDU-BJP के रिश्तों में क्यों आ गई थी खटास, नीतीश कुमार ने बताई वह वजह

पटना, 12 अगस्त: बिहार में पिछला विधानसभा चुनाव भले ही बीजेपी-जेडीयू ने मिलकर लड़ा है, लेकिन दोनों के रिश्तों में दरार 2019 के लोकसभा चुनावों के बाद से ही पड़ने लगी थी। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज कहा है कि उन्होंने केंद्रीय कैबनेट में चार मंत्री पद मांगा था, लेकिन भाजपा उसके लिए तैयार नहीं हुई थी। यही नहीं उन्होंने पार्टी से इस्तीफा देने वाले जेडीयू के पुराने सहयोगी आरसीपी सिंह के मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाए जाने में खुद की सहमति होने से भी साफ इनकार कर दिया है।

2019 से ही रिश्तों में पड़ने लगी थी दरार

2019 से ही रिश्तों में पड़ने लगी थी दरार

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को कहा है 2019 में उन्होंने केंद्र सरकार में जेडीयू के शामिल होने के खिलाफ इसलिए फैसला लिया था, क्योंकि बीजेपी ने चार मंत्री पद की उनकी मांग मानने से मना कर दिया था। उन्होंने यह भी कहा है कि पिछले साल उनके बेहद करीबी आरसीपी सिंह को जो मोदी मंत्रिमंडल में जगह दी गई थी, उसमें उनकी सहमति नहीं थी। नीतीश ने कहा, '2019 में मैंने कहा था कि हमें कम से कम चार मंत्री पद चाहिए। हमारे 16 एमपी थे, बिहार से उनका सिर्फ एक ज्यादा था। इससे कम कुछ भी मानने से बिहार में एक खराब संदेश जाता, जहां से उन्होंने पांच लोगों को शामिल किया था। उन्होंने इनकार कर दिया, इसलिए हम शामिल नहीं हुए।'

चुनावों में भाजपा का सपोर्ट नहीं मिला- नीतीश

चुनावों में भाजपा का सपोर्ट नहीं मिला- नीतीश

भाजपा नेताओं के ये कहने के बारे में कि आरसीपी सिंह को शामिल किए जाने से पहले उनकी (नीतीश की) सहमति ली गई थी तो उन्होंने कहा कि 'यह असत्य है।' वे बोले, 'वे (आरसीपी सिंह) राष्ट्रीय अध्यक्ष थे और मैंने इस बारे में मंजूरी नहीं दी। यही कारण है कि मैंने उन्हें 6 महीने बाद पार्टी के शीर्ष पद से हटा दिया।' इससे पहले नीतीश ने यह भी दावा किया था कि '(बिहार विधानसभा) चुनावों के दौरान भी जीतने वाले उम्मीदवारों ने कहा कि किसी (बीजेपी से) ने सपोर्ट नहीं किया और जो हार गए उन्होंने कहा कि उन्हें बीजेपी के लोगों ने हरा दिया था। मुझे अपनी पार्टी को सुरक्षित रखना था और लोगों की इच्छा के मुताबिक काम करना था।'

पीएम बनने की महत्वाकांक्षा नहीं रखने का दावा

पीएम बनने की महत्वाकांक्षा नहीं रखने का दावा

इससे पहले उन्होंने मीडिया वालों से बातचीत के दौरान फिर से दावा किया कि उनका प्रधानमंत्री बनने का कोई मंसूबा नहीं है। हालांकि, उन्होंने केंद्र में एनडीए के खिलाफ विपक्ष को एकजुट करने में सकारात्मक भूमिका निभाने की बात जरूर कही है। उन्होंने हाथ जोड़कर कहा कि 'कृप्या मुझसे ऐसे प्रश्न मत पूछिए, मैंने कई बार कहा है कि मेरी ऐसी कोई महत्वाकांक्षा नहीं है। मैं अपने प्रदेश की सेवा करना चाहता हूं।'

'जिन्हें दुरुपयोग करने की आदत है....'

'जिन्हें दुरुपयोग करने की आदत है....'

नीतीश कुमार से जब सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय जैसी केंद्रीय एजेंसियों के कथित दुरुपयोग के बारे में सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि 'जिन्हें दुरुपयोग करने की आदत है, उन्हें जनता के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा।' नीतीश कुमार ने रिकॉर्ड आठवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लिया है। दूसरी बार आरजेडी के तेजस्वी यादव उनके डिप्टी सीएम बने हैं। नीतीश कुमार ने अपने राजनीतिक करियर में दूसरी बार भारतीय जनता पार्टी के साथ चुनाव जीतने के बाद उससे गठबंधन तोड़ा है। इससे पहले वह 2017 में इसी तरह आरजेडी का साथ छोड़कर वापस भाजपा के साथ मिलकर अपनी सरकार बचा चुके हैं।

नीतीश कुमार को 164 विधायकों के समर्थन का दावा

नीतीश कुमार को 164 विधायकों के समर्थन का दावा

243 सीटों वाली बिहार विधानसभा में नीतीश कुमार को अपनी सरकार बचाने के लिए 122 विधायकों की आवश्यकता है, लेकिन उनके साथ 164 विधायकों के समर्थन का दावा है। महागठबंधन में जदयू-राजद-कांग्रेस- हिंदुस्तान आवाम मोर्चा और लेफ्ट पार्टियां शामिल हैं। इनके अलावा भी कई दल सत्ताधारी गठबंधन को समर्थन दे रहा है।

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