बिहार के राजनीतिक झगड़े में बेरस हुआ जर्दालु आम, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भी स्वाद से किया दूर

ठीक दो साल हुए हैं, जब केंद्र सरकार ने बड़े गर्व से घोषणा की थी कि बिहार के भागलपुर का जर्दालु आम अब ब्रिटेन तक पहुंचेगा। 14, जून, 2021 को जीआई सर्टिफिकेशन के बाद पहली बार इस आम की व्यवसायिक खेप ब्रिटेन भेजी गई थी। लेकिन, लेकिन, दो वर्षों में सियासत का पहिया ऐसे घूमा है कि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भी इसके स्वाद से दूर कर दिया गया है।

इस साल घोर राजनीति की वजह से भागलपुर के एक किसान के बगीचे में बड़ी मात्रा में रसीला जर्दालु आम सड़ रहा है। क्योंकि अब यह आम राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और दिल्ली में कई और बड़ी हस्तियों को इस साल नहीं भेजे जाने का फैसला लिया गया है।

Jardalu mangoes got embroiled in politics

2007 से ही चल रही थी शिष्टाचार की यह परंपरा
अधिकारियों का कहना है कि राज्य सरकार भागलपुर के बगीचों से रसीले और स्वादिष्ट जर्दालु आम 2007 से ही दिल्ली में देश की बड़ी शख्सियतों को भेजती रही है। इसका दो मकसद रहा है, एक तो इस खास किस्म के आम का स्वाद उनतक पहुंचाना और दूसरा शिष्टाचार के नाते। क्योंकि, राष्ट्रपति और पीएम को पड़ोसी मुल्कों से भी उपहार के रूप में आम पहुंचते रहे हैं।

खास सुगंध और गुणों की वजह से मशहूर है जर्दालु आम
भागलपुर का जर्दालु आम अपने विशेष सुगंध, मिठास और पौष्टिक गुणों के लिए दुनिया भर में मशहूर है। लेकिन,इस साल 5-5 किलो के तैयार पैकेट यूं ही पड़े रह गए है। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से पीएम मोदी को इस साल भी शिष्टाचार के नाते आम भेए गए हैं।

डिलिवरी भेजने से पहले भी रोकने का आ गया आदेश
हालांकि, इस साल भी राज्य सरकार ने शुरू में आम के पैकेट पहले की तरह ही दिल्ली भेजने की योजना बना रखी थी। एक स्थानीय किसान को 2,500 पैकेट तैयार करके रखने के लिए भी कहा गया था। जानकारी के मुताबिक 2,000 पैकेट दिल्ली भेजे जाने थे और 500 पैकेट पटना पहुंचने थे। लेकिन, डिलिवरी भेजे जाने से ठीक पहले इसे रोक दिया गया।

2,500 पैकेट जर्दालु आम तैयार करने को कहा गया था-किसान
अशोक चौधरी नाम के एक किसी ने टीओआई से बुधवार को कहा, 'स्थानीय जिला कृषि पदाधिकारी, बागवानी पदाधिकारी और बाकियों ने मुझसे 2,500 पैकेट जर्दालु आम तैयार करने को कहा था। उनके अनुसार इसे 3 जून को विक्रमशिला एक्सप्रेस से भेजा जाना था। इसी के हिसाब से मैंने 70 मजदूरों को स्वच्छता का ख्याल रखते हुए आम के पैकेट तैयार करने के लिए लगाया।'

'ऊपर से आदेश आया कि कैंसिल हो गया है'
उन्होंने कहा कि 'जब 1,200 पैकेट तैयार भी हो चुके थे, तब मुझसे कहा गया कि रोक दें। एक अधिकारी जो फोन पर थे, उन्होंने कहा, 'ऊपर से आदेश आया है कि कैंसिल हो गया है।' गौरतलब है कि पिछले साल आम के मौसम तक बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू का बीजेपी के साथ गठबंधन था। लेकिन, अब 23 जून, 2023 को उनके बुलावे पर भाजपा और मोदी सरकार के खिलाफ पटना में करीब 16 विपक्षी दलों की एक महाबैठक होने जा रही है।

इस बार आम की क्वालिटी अच्छी नहीं थी-जेडीयू
चौधरी का कहना है कि उन्होंने स्थानीय बाजारों से 12-13 लाख रुपए में स्टैंर्ड-साइज के 250 क्विंटल आम खरीद लिए थे, जिनसे 2,500 कार्टन तैयार हो रहे थे। फलों के राजा आम की बेहतरीन वेरायटी के आम के स्वाद से देश की सबसे बड़ी शख्सियतों को दूर करने के बाद इस मसले पर सत्ताधारी जेडीयू ने जो बयान दिया है, वह बहुत ही दिलचस्प है।

नीतीश कुमार की पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव राजीव रंजन ने किसी के खिलाफ दुर्भावना को खारिज करते हुए दलील दी है कि, 'पहले जिस तरह का आम भेजा जाता था, इस बार आम की क्वालिटी उस स्तर की नहीं थी, और हम खराब क्वालिटी का आम नहीं भेजना चाहते थे।'

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