बिहार के लाल रोहित ने किया कमाल, 10वीं पास छात्र की तकनीक पर IIT पटना की मुहर, जानिए

रोहित की इस तकनीक को आईआईटी पटना की तरफ़ से मंजूरी मिल जाने के बाद नेशनल वाटर अकादमी पुणे में प्रेजेंटेशन के लिए भेजा जाएगा। दसवीं पास छात्र रोहित जमुई जिले के छोटे से गांव में रहने के बावजूद दुनिया की सबसे सस्ती बिजली..

पटना, 2 सितंबर 2022। बिहार की धरती होनहारों की सरज़मीन भी कहते हैं, वजह यह है कि यहां के लाल अपनी प्रतिभा के ज़रिए विदेशों तक देश और राज्य क नाम रोशन करते रहे हैं। बिहार के जमुई ज़िले के रहने वाले लाल ने रोहित ने अपनी हुनर का लोहा मनवाया है। 10वीं पास छात्र रोहित ने सात साल की कड़ी मेहनत से तकनीक विकसित किया है। इस तकनीक के ज़रिए पानी से सस्ती बिजली का उत्पादन किया जा सकता है। ग़ौरतलब है कि रोहित के आईडिया पर आईआईटी पटना ने भी मुहर लगा दी है। बताया जा रहा है कि सिर्फ़ 12 प्रतिशत ऊर्चा की खपत से दोबारा पानी से बिजली बनाई जा सकती है।

7 साल की मेहनत से मिली कामयाबी

7 साल की मेहनत से मिली कामयाबी

रोहित की इस तकनीक को आईआईटी पटना की तरफ़ से मंजूरी मिल जाने के बाद नेशनल वाटर अकादमी पुणे में प्रेजेंटेशन के लिए भेजा जाएगा। दसवीं पास छात्र रोहित जमुई जिले के छोटे से गांव में रहने के बावजूद दुनिया की सबसे सस्ती बिजली उत्पादन के तकनीक की ईजाद की है। रोहित के सीआईएमपी के इंक्यूबेशन फाउंडेशन से इंक्यूबेटेड स्टार्ट-अप का नाम हाइड्रो लिफ्टिंग टेक्नोलॉजी है। इसे डेवलप करने के लिए रोहित ने 7 सालों तक गहनता से रिसर्च किया जिसके बाद उसे कामयाबी मिली है।

रोहित ने किया हाइड्रो लिफ्टिंग तकनीकका ईजाद

रोहित ने किया हाइड्रो लिफ्टिंग तकनीकका ईजाद

रोहित के सात साल की शोध के हाइड्रो लिफ्टिंग तकनीक को आईपीआर केंद्र कोलकाता से प्रोविजनल पेटेंट भी मिल गया है। इस तकनीक के खासियत की बात की जाए तो बहुत ही कम खर्च में नीचे वाले डैम से ऊपर वाले डैम में पानी पहुंचाया जा सकता है। आपको बता दें कि बिजली बनाने के लिए डैम में एक ही बार पानी भरने की आवश्यकता होती है। इस तकनीक से एक ही पानी नीचे और ऊपर वाली डैम में रोटेट होता रहेगा।

कम खपत ज्यादा बिजली उत्पादन

कम खपत ज्यादा बिजली उत्पादन

निचले डैम से पानी ऊपर वाले डैम में ले जाने में बनाई गई बिजली का सिर्फ 12 फ़ीसद ही खर्च होगा। वहीं बची हुई 88 फ़ीसद बिजली का इस्तेमाल दूसरे कामों में किया जा सकेगा। ग़ौरतलब है कि अभी तक नीचे वाले डैम से पानी ऊपर वाले डैम में ले जाने में काफ़ी ख़र्च आता था। यही वजह है कि बिजली उत्पादन के लिए इस नीचे वाले डैम से ऊपर वाले डैम में पानी नहीं पहुंचाया जाता था। रोहित की नई तकनीक से कम खर्च में यह काम मुमकिन हो पाएगा।

11 करोड़ की लागत से 1 मेगावाट बिजली उत्पादन

11 करोड़ की लागत से 1 मेगावाट बिजली उत्पादन

रोहित की नई तकनीक पर जानकारों का कहना है कि हाइड्रो लिफ्टिंग टेक्नोलॉजी के जरिए एक मेगावट तक बिजली के उत्पादन में सिर्फ़ 11 करोड़ की लागत आएगी। वहीं छात्र रोहित का कहना है कि यह हाइड्रोलिफ्टिंग तकनीक दुनिया की अब तक सबसे सस्ती तकनीक विकसित की गई है। प्रोविजनल पेटेंट भी इस स्टार्ट-अप को मिल चुका है। एक आवेदन स्थायी पेटेंट के लिए भेजा गया है। 11 करोड़ की लागत से एक मेगावाट तक बिजली का उत्पादन तीन एकड़ क्षेत्र में हो सकता है। इस तकनीक के ज़रिए साल भर बिजली का उत्पादन मुमकिन है।

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