'पेपर लीक ऐसे नहीं बंद होगा', टेलीग्राम बैन के फैसले पर केजरीवाल ने केंद्र सरकार को घेरा
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने देश में लगातार हो रहे पेपर लीक मामलों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों को पूरी तरह से नाकाफी और बेतुका करार दिया। केजरीवाल का कहना है कि सिर्फ ऊपरी बदलावों से इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान कभी नहीं निकाला जा सकता है।
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार इस धांधली को रोकने के लिए कोई ठोस या प्रभावी कदम नहीं उठाना चाहती। उन्होंने इसे एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाते हुए दावा किया कि पेपर लीक का यह खेल वास्तव में अरबों रुपये का काला कारोबार बन चुका है। उनके मुताबिक, इस नेटवर्क का पैसा ऊपर तक जाता है, जिसका इस्तेमाल राजनीतिक स्वार्थों को पूरा करने के लिए किया जाता है।

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार की नीति और नीयत दोनों पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि लाखों छात्रों की दिन-रात की मेहनत और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर सरकार को बेहद सख्त व्यवस्था और पारदर्शी प्रक्रिया अपनानी चाहिए, न कि केवल दिखावटी कदम उठाने चाहिए।
केजरीवाल ने सरकारी उपायों को बताया बेअसर
दरअसल, नीट परीक्षा में हुई गड़बड़ियों के बाद सरकार ने टेलीग्राम जैसे लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर अस्थाई रोक लगाने का फैसला किया। इस कार्रवाई का मुख्य कारण परीक्षा से जुड़े पेपर लीक मामलों में इस ऐप का इस्तेमाल होना बताया गया था। अरविंद केजरीवाल ने इस फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि एक कम्युनिकेशन ऐप को बंद कर देने से असल अपराधी नहीं पकड़े जाएंगे।
इसके साथ ही उन्होंने परीक्षा के प्रश्न पत्रों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए भारतीय वायुसेना के विमानों का उपयोग किए जाने पर भी तंज कसा। केजरीवाल ने कहा कि केवल परिवहन के साधन बदल देने से या मिलिट्री जहाजों से पेपर भेजने से सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती। यदि व्यवस्था के अंदर बैठे लोग ही बेईमान हैं, तो पेपर लीक किसी भी स्तर पर हो सकता है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि असली समस्या परिवहन या किसी ऐप की नहीं है, बल्कि उस भ्रष्ट सिंडिकेट की है जो इस पूरी व्यवस्था को चला रहा है। जब तक उस बड़े नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त नहीं किया जाएगा और मुख्य साजिशकर्ताओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं होगी, तक तक देश के युवाओं का भविष्य सुरक्षित नहीं किया जा सकता है।
राजनीतिक फंडिंग और करोड़ों का अवैध धंधा
केंद्रीय व्यवस्था पर सीधा निशाना साधते हुए अरविंद केजरीवाल ने एक बड़ा राजनीतिक आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पेपर लीक का यह धंधा अब एक संगठित उद्योग का रूप ले चुका है, जिसमें अरबों रुपये का लेन-देन होता है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि इस अवैध कमाई को पूरी तरह से बंद कर दिया गया, तो राजनीतिक दलों और गतिविधियों के लिए भारी भरकम फंड जुटाना मुश्किल हो जाएगा।
केजरीवाल ने सीधे तौर पर कहा कि राजनीतिक खरीद-फरोख्त और चुनावों में पानी की तरह पैसा बहाने के लिए इस तरह के काले धंधों को शह दी जाती है। उन्होंने केंद्र सरकार पर नीयत की कमी का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर सरकार की मंशा साफ होती, तो इस पूरे रैकेट की जड़ तक पहुंचकर इसे बहुत पहले ही खत्म किया जा चुका होता।
इस पूरे घटनाक्रम ने देश के प्रशासनिक तंत्र के साथ-साथ राजनीतिक शुचिता पर भी बड़े सवाल खड़े किए हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले देश के करोड़ों छात्र और उनके माता-पिता इस समय भारी तनाव और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं। केजरीवाल की इस टिप्पणी ने इस तकनीकी समस्या को सीधे तौर पर राजनीतिक इच्छाशक्ति से जोड़ दिया है।
छात्रों और अभिभावकों से एकजुट होने की अपील
आम आदमी पार्टी के नेता ने देश के नागरिकों, छात्रों और अभिभावकों से इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की पुरजोर अपील की। उन्होंने कहा कि यह केवल कुछ लाख छात्रों का मसला नहीं है, बल्कि देश की पूरी शिक्षा प्रणाली और युवाओं की योग्यता के सम्मान से जुड़ा हुआ विषय है। जब तक आम लोग इसके खिलाफ लामबंद नहीं होंगे, तब तक बदलाव संभव नहीं है।












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